Lucknow News: देशज के मंच पर झूमीं लोककलाएं
पहले दिन के आयोजन की शुुरुआत संस्था की अध्यक्ष पद्मश्री विद्या विंदु सिंह और लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मालिनी अवस्थी ने वंदेमातरम गाकर जोश भरा। अयोध्या से आए संस्था के ट्रस्टी और लेखक यतींद्र मिश्र ने कहा कि जिस सोनचिरैया संस्था ने 15 वर्ष पूरे किए हैं, मेरी कामना है कि आगे चलकर वह स्वर्ण जयंती और हीरक जयंती भी मनाए।
मुख्य अतिथि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि देशज जिस तरह देश की कलाओं को सामने ला रहा है, वह प्रशंसनीय है। पहली प्रस्तुति केरल के प्रसिद्ध थेय्यम नृत्य से हुई। आठ कलाकारों ने चामुंडा थेय्यम और पुट्टम थेय्यम की प्रस्तुति दी। ग्रुप लेकर आईं मशहूर मोहिनीअट्टम कलाकार जयप्रभा मेनन ने बताया कि थेय्यम शब्द देवता के लिए इस्तेमाल होता है। उत्तरी केरल में 500 प्रकार के थेय्यम प्रस्तुत किए जाते हैं। इस नृत्य प्रस्तुति में भव्य शृंगार, विशाल मुकुट, तांबे और पीतल के आभूषण और चेहरे पर पारंपरिक रंगों से सुसज्जित होकर देवी के उग्र रूप को दिखाया गया।
इसके बाद अंजना कुमावत के नेतृत्व में राजस्थान के घूमर नृत्य की प्रस्तुति रंगीलो राजस्थान... और कदे आवो जी रंगीलो म्हारे देश... गीत की प्रस्तुति हुई। गुजरात के डांगी नृत्य की प्रस्तुति सुरेश पवार के नेतृत्व में 15 कलाकारों ने दी जिसमें नई फसल और विवाहोत्सव का उल्लास दिखा। मिजोरम से जोसंगलउरा जोते के नेतृत्व में 16 सदस्यों ने चेराओं नृत्य की प्रस्तुति दी।
छत्तीसगढ़ से गंगा के नेतृत्व में 20 कलाकारों ने गोंडमारी नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद पंजाबी गिद्धे की प्रस्तुति रवि कुनर के निर्देशन में हुई तो दर्शक भी थिरकने लगे। अंत में छेबिल दास विष्णु गौली के नेतृत्व में महाराष्ट्र का रंग सांगी लोकनृत्य पेश किया गया। कार्यक्रम में लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी, वरिष्ठ गायक पं. धर्मनाथ मिश्र समेत बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
छाप तिलक सब छीनी... ने बरसाया सूफी रंग
राजस्थान के लोकप्रिय गायक कुतले खान ने देशज की पहली शाम को यादगार बना दिया। उन्होंने गायन की शुरुआत विश्व प्रसिद्ध राजस्थानी मांड केसरिया बालम... से की। इसके बाद मशहूर रचना छाप तिलक सब छीनी... सुनाया तो देशज के मंच पर सूफी रंग सिर चढ़कर बोला। राजस्थानी मांगनिया कम्युनिटी के गीत सावन आयो... की प्रस्तुति पर भी सभी को खूब झुमाया।

सोनचिरैया संस्था की ओर से आयोजित देशज के मंच पर भारत की लोककलाओं का संगम देखने को मिला। गोमतीनग

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