यूपी: अवध में बाढ़ से हालात बेकाबू, मासूम समेत दो बहे
पहाड़ों पर धुआंधार बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण अवध के कई जिलों में बाढ़ से हालात बेकाबू हो गए हैं। शुक्रवार को बलरामपुर में बाढ़ के पानी में एक युवक व मासूम बह गई। बाराबंकी में घाघरा की कटान से एल्गिन-चरसड़ी बांध में रिसाव से हड़कंप मच गया।
बलरामपुर में बाढ़ से लबालब नाले को पार करते समय गैसड़ी कोतवाली क्षेत्र के मदरहवा निवासी राजकरन (22) बह गया। जबकि नगर कोतवाली क्षेत्र के बिजलीपुर गांव में लवकुश की बेटी गुड़िया (3) खेलते समय अचानक गांव में भरे बाढ़ के पानी में बह गई। दोनों का पता नहीं चल सका है।
यहां राप्ती खतरे के निशान से 53 सेमी. ऊपर बह रही है। इससे शुक्रवार को 80 गांव और बाढ़ की चपेट में आ गए। जिला मुख्यालय के चारों तरफ भी बाढ़ का पानी भरने लगा है।
11 सौ बीघा भूमि घाघरा में समाई
उधर, बाराबंकी के टिकैतनगर में एलिग्न-चरसरी तटबंध में रिसाव हो रहा है। नदी व बांध के बीच की करीब 11 सौ बीघा भूमि घाघरा में समा चुकी है। यहां घाघरा खतरे के निशान से 52 सेमी. ऊपर बह रही है। सीतापुर में घाघरा व शारदा उफान पर हैं। रेउसा के निर्मलपुरवा का पंचायत भवन लहरों की भेंट चढ़ गया।
बाढ़ से घिरे कोनी व पचीसा गांव में लोग फंसे हैं। श्रावस्ती में राप्ती का जलस्तर शुक्रवार को बैराज व भकला पर सामान्य हो गया पर इकौना व गिलौला में नदी कहर बरपाती रही।
जिले के 180 गांवों में बाढ़ का पानी घुसा हुआ है, इससे करीब दो लाख आबादी प्रभावित है। बहराइच के नानपारा और महसी तहसील में हालात काफी खराब हैं। घाघरा का पानी घरों में घुसा हुआ है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि नदी खतरे के निशान से 58 सेंटीमीटर ऊपर है। शिवपुर विकासखंड के चार गांवों में तीन दिन से चूल्हा नहीं जल रहा है। 2700 लोगों की जिंदगी संकट में है।