UP : अयोध्या रोड पर रिहायशी इलाके के तीन अवैध कारखानों में लगी भीषण आग, एक के बाद धमाके; इलाके में दहशत
रिहायशी इलाके में चल रहे तीन अवैध कारखानों में आग लग गई। एक के बाद एक ताबड़तोड़ धमाके हुए। आग में 40 मजदूर फंसे रहे। 12 गाड़ियों से दमकल कर्मियों ने पांच घंटे में आग पर काबू पाया।
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राजधानी लखनऊ में शुक्रवार की शाम अयोध्या रोड शक्तिनगर दल पर सोफा-गद्दा बनाने की फैक्टरी में आग लग गई। आग की लपटें देख आसपास दहशत फैल गई। लोग घरों से बाहर निकल आए। सूचना पर पहुंचे दमकलकर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं।
गाजीपुर के रिहायशी शक्तिनगर इलाके में शुक्रवार शाम बनी दो मंजिला इमारत में चल रहे तीन अवैध कारखानों में आग लग गई। आग के बीच वहां मौजूद 40 लोग फंस गए। सभी ने इमारत की बाउंड्री फांद कर जान बचाई। आग की चपेट में आने से वहां रखे चार छोटे गैस सिलिंडर ताबड़तोड़ फटने लगे। दमकल कर्मियों 12 गाड़ियों से पांच घंटे में आग पर काबू पा लिया।
चौक के राजा बाजार निवासी प्रखर रस्तोगी की शक्तिनगर ढाल के पास दो मंजिला बिल्डिंग है। बिल्डिंग में मेट्रो सिटी निवासी अशरफ का गद्दे का कारखाना, रशीद का फर्नीचर और रफी उल्ला का फोम का कारखाना है। तीनों कारखानों में तीन परिवार समेत 40 लोग रहकर वहीं काम करते हैं। शुक्रवार शाम छह बजे कुछ लोग काम कर रहे थे, जबकि महिलाएं खाना बना रही थीं। इस बीच अशरफ के गोदाम में अचानक आग लग गई और ऊंची-ऊंची लपटें और धुआं उठने लगी। यह देख सभी घबरा गए। वे चीखने चिल्लाने लगे।
10 फीट ऊंची बाउंड्री फांदकर बचाई जान
आग से फंसने लोग मदद के लिए शोर मचाने लगे। जान बचाने के लिए वह बिल्डिंग के गेट से लगे जीने पर चढ़कर 10 फीट ऊंची बाउंड्री में बने गड्ढों के सहारे उतर कर अपनी जान बचाई। इस बीच आग ने रशीद और रफीउल्लाह के गोदाम को भी अपनी चपेट में ले लिया।
गोदाम में रखे गैस सिलिंडर एक के बाद एक फटने लगे। धमाका इतना तेज था कि पड़ोसी व मजदूर सहम उठे। आग इतनी भयानक थी कि आसपास के दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी। घटना की जानकारी लोगों ने दमकल, पुलिस और बिल्डिंग के मालिक को दी।
एक किलोमीटर दूर से दिख रहा था धुआं
आग की खबर पाकर सीएफओ मंगेश कुमार, एफएसओ इंदिरानगर शत्रुघन, एफएसओ हजरतगंज रामकुमार रावत टीम के साथ पहुंच गए। नौ गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाना का काम शुरू किया गया। कारखानों में फोम व लड़की होने के कारण आग विकराल होती चली गईं। इस पर सीएफओ को दो और गाड़ियां बुलानी पड़ी। दमकलकर्मी आग बुझाने में जुटी रहे। आग की विकटता का अंदाजा करीब एक किलोमीटर दूर से ही उठ रहे धुएं को देख सहज ही लगाया जा सकता था।
रह-रहकर धधकती रही आग
कारखानों से निकल रहे धुएं के कारण दमकल व अन्य लोगों को सांस लेना दूभर हो गया था। आग पर थोड़ा काबू पाने के बाद दमकल कर्मियों ने थोड़ी राहत की सांस ली। वहीं दमकल कर्मी को बीआर सेट पहना कर बिल्डिंग में दाखिल किया गया। मगर आग एक बार फिर आग तेज हो गई। कड़ी मशक्कत के बाद पांच घंटे में गाड़ियों से दमकल कर्मियों ने आग पूरी तरह से बुझा ली।
पहले भी लग चुकी है छुटपुट आग
इमारत के ठीक पीछे रहने वाले अधिवक्ता राहुल सिंह के मुताबिक कारखानों में पहले भी छोटी-मोटी आग लग चुकी है। मगर तब लोगों ने समय रहते ही उस पर काबू पा लिया था। तीनों कारखाने करीब चार साल से रिहायशी इलाके बीच चल रहे हैं। राहुल ने और अन्य लोगों ने कई बार मालिकों से कारखानों को बंद की बात कही गई, मगर कुछ नहीं हुआ। अगर अब भी कुछ नहीं हुआ तो भविष्य में और भी बढ़ी घटना हो सकती है।
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