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Lucknow News: लॉकर तोड़ 48 लाख के जेवर हड़पने के आरोप में शाखा प्रबंधक पर एफआईआर

Tue, 03 Feb 2026 02:13 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:13 AM IST
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FIR against branch manager for breaking into locker and stealing jewellery worth Rs 48 lakh
लखनऊ। ठाकुरगंज के गढ़ी पीर खां निवासी राम प्यारे श्रीवास्तव ने जून 2024 में तैनात तत्कालीन पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के शाखा प्रबंधक पर उनके चार लॉकर तोड़कर 48 लाख के सोने के जेवर हड़पने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर ठाकुरगंज पुलिस ने आरोपी तत्कालीन शाखा प्रबंधक व अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
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सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी राम प्यारे के मुताबिक पीएनबी शाखा ठाकुरगंज में उनका बैंक अकाउंट है। साथ ही 20 अक्तूबर 1987 से बैंक में उनके चार लॉकर भी हैं। इनमें उनके 48 लाख के जेवर रखे थे। नौकरी के कारण वह लॉकर की जानकारी नहीं ले सके। 21 जून 2024 को वह लॉकर से जेवर निकालने बैंक पहुंचे थे। वहां बैंक प्रबंधक ने जेवर गायब होने और लाॅकर किसी और को अलॉट किए जाने की जानकारी दी। इस पर उन्होंने बैंक को शिकायती पत्र लिखा और घर लौट आए।
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55 हजार रुपये देकर मामला दबाने का आरोप

राम प्यारे का आरोप है कि बैंक प्रबंधक ने कुछ कार्रवाई करने के बजाय उनके दूसरे बैंक खाते में लॉकर की फीस के एवज में 55 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। उन्होंने विरोध किया तो प्रबंधक ने अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई न होने की बात कही। साथ ही उन्हें सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में जेल भेजने की धमकी दी।
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बैंक ने गायब कर दिए रिकॉर्ड

हताश होकर राम प्यारे ने बैंक को नोटिस भिजवा दिया। कुछ दिन बाद बैंक ने जवाब में कहा कि 2007 तक उनके लॉकरों का किराया जमा था। इसलिए लॉकर तोड़कर सारे जेवर उनकी पत्नी को दे दिए गए जबकि उनकी पत्नी को जेवर मिले ही नहीं। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अभिलेख मांगे तो पता चला कि सारे रिकॉर्ड गायब हो चुके हैं। हारकर उन्होंने सात जुलाई 2025 को ठाकुरगंज थाने में तहरीर दी, लेकिन उनका रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अंत में उन्होंने कोर्ट की शरण ली।



पुलिस ने मांगे दस्तावेज, बैंक ने साधी चुप्पी

इंस्पेक्टर ओमबीर चौहान के मुताबिक मामला 2024 का है। उस समय थानाध्यक्ष कोई और थे। यह बताना मुश्किल है कि किन परिस्थितियों में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। फिलहाल, पीड़ित को बयान और लॉकर संबंधी दस्तावेज लाने के लिए कहा गया है। संबंधित बैंक प्रबंधक से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में बैंक का पक्ष जानने के लिए पीएनबी के जनसंपर्क विभाग से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया।
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