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Lucknow News: एफडी घोटाले में बैंक मित्र और कर्मियों पर एफआईआर
Sun, 18 Jan 2026 02:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 18 Jan 2026 02:46 AM IST
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बैंक का शटर गिराते खाताधारक व पीड़ित।
लखनऊ। पारा स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय परिसर में बने बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में एफडी घोटाले के मामले में आखिरकार शनिवार को बैंक मित्र शिवा राव और 2020 से अब तक तैनात दोषी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। यह कार्रवाई पीड़ित राम सिंह की तहरीर पर हुई, जिसमें 227 पीड़ितों की शिकायतें शामिल की गई हैं।
चार दिन तक बैंक और थाने के चक्कर काटते रहे पीड़ितों का सब्र तब टूटा, जब उन्हें न बैंक से जवाब मिला और न ही थाने से राहत। मजबूर होकर ग्राहकों ने बैंक परिसर और थाने पर प्रदर्शन किया। दबाव बढ़ने के बाद पुलिस ने कूटरचना, फ्राड, धोखाधड़ी समेत 10 गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज किया। प्रारंभिक जांच में करीब एक करोड़ दस लाख रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है, जबकि पीड़ितों का दावा है कि कुल घोटाला दस करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है। पीड़ित दूध कारोबारी राम सिंह ने बताया उनके नाम से फर्जी एफडी बनाकर 10 लाख रुपये हड़प लिए गए, वहीं खाते से 8 लाख 60 हजार रुपये भी निकाल लिए गए। गोमती यादव के छह लाख, आरती के तीन लाख अस्सी हजार, श्यामली रस्तोगी की आठ लाख की फर्जी एफडी, सरोज और दशरथ के खातों से आठ लाख तीस हजार रुपये निकालने के आरोप हैं। काकोरी के उदित खेड़ा निवासी गोविंद प्रसाद ने बताया कि उनसे पांच लाख रुपये लेकर फोटोकॉपी कागज पर एफडी का प्रिंटआउट थमा दिया गया और यह कहकर घर भेज दिया गया कि असली कागजात बाद में मिल जाएंगे। जब बैंक पहुंचे तो पता चला कि रकम पहले ही उड़ चुकी है। राम नरेश गुप्ता के खाते से भी सात लाख अस्सी हजार रुपये निकाल लिए गए।
पीड़ितों का आरोप है कि यह खेल सिर्फ बैंक मित्र तक सीमित नहीं है। वर्ष 2020 से अब तक बैंक में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। ग्राहकों का कहना है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी रकम निकालना संभव ही नहीं है। पुलिस ने बैंक मित्र शिवा राव के साथ-साथ बैंक के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
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...और बैंक का शटर बाहर से बंद कर दिया
इधर ठगी से आक्रोशित खाताधारकों ने दोपहर में बैंक पहुंचकर जमकर हंगामा किया और बैंक का शटर बाहर से बंद कर दिया। अचानक हुए इस विरोध से बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई। बैंक प्रबंधन की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया और शटर खुलवाया। इसके बाद ही बैंक का कामकाज दोबारा शुरू हो सका। घटना के दौरान बैंक परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
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चार दिन तक बैंक और थाने के चक्कर काटते रहे पीड़ितों का सब्र तब टूटा, जब उन्हें न बैंक से जवाब मिला और न ही थाने से राहत। मजबूर होकर ग्राहकों ने बैंक परिसर और थाने पर प्रदर्शन किया। दबाव बढ़ने के बाद पुलिस ने कूटरचना, फ्राड, धोखाधड़ी समेत 10 गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज किया। प्रारंभिक जांच में करीब एक करोड़ दस लाख रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है, जबकि पीड़ितों का दावा है कि कुल घोटाला दस करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है। पीड़ित दूध कारोबारी राम सिंह ने बताया उनके नाम से फर्जी एफडी बनाकर 10 लाख रुपये हड़प लिए गए, वहीं खाते से 8 लाख 60 हजार रुपये भी निकाल लिए गए। गोमती यादव के छह लाख, आरती के तीन लाख अस्सी हजार, श्यामली रस्तोगी की आठ लाख की फर्जी एफडी, सरोज और दशरथ के खातों से आठ लाख तीस हजार रुपये निकालने के आरोप हैं। काकोरी के उदित खेड़ा निवासी गोविंद प्रसाद ने बताया कि उनसे पांच लाख रुपये लेकर फोटोकॉपी कागज पर एफडी का प्रिंटआउट थमा दिया गया और यह कहकर घर भेज दिया गया कि असली कागजात बाद में मिल जाएंगे। जब बैंक पहुंचे तो पता चला कि रकम पहले ही उड़ चुकी है। राम नरेश गुप्ता के खाते से भी सात लाख अस्सी हजार रुपये निकाल लिए गए।
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पीड़ितों का आरोप है कि यह खेल सिर्फ बैंक मित्र तक सीमित नहीं है। वर्ष 2020 से अब तक बैंक में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। ग्राहकों का कहना है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी रकम निकालना संभव ही नहीं है। पुलिस ने बैंक मित्र शिवा राव के साथ-साथ बैंक के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
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...और बैंक का शटर बाहर से बंद कर दिया
इधर ठगी से आक्रोशित खाताधारकों ने दोपहर में बैंक पहुंचकर जमकर हंगामा किया और बैंक का शटर बाहर से बंद कर दिया। अचानक हुए इस विरोध से बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई। बैंक प्रबंधन की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया और शटर खुलवाया। इसके बाद ही बैंक का कामकाज दोबारा शुरू हो सका। घटना के दौरान बैंक परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

बैंक का शटर गिराते खाताधारक व पीड़ित।