धोखे से किया दूसरा निकाह राज खुला तो फोन पर ही दिया तीन तलाक, केस दर्ज
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एक से अधिक विवाह करने पर एक मुस्लिम युवक पर राजधानी में एफआईआर दर्ज की गई है। युवक पहले से शादीशुदा था। उसने कैसरबाग की एक ईसाई युवती से यह बात छिपाते हुए धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कर लिया। आठ माह बाद राज खुला तो युवती को अकेला छोड़ दिया। बाद में फोन पर तलाक दे दिया। युवती कोर्ट पहुंची तो उसके आदेश पर आशियाना थाने में केस दर्ज कराया गया है। युवती के वकील का दावा है कि बहुविवाह करने पर किसी मुस्लिम के खिलाफ देश में यह पहली एफआईआर है।
38 साल की पीड़िता ने बताया कि वह बेवा थी। वर्ष 2015 में उसकी मुलाकात कानपुर के महबूब हैदर से हुई। हैदर ने खुद को अविवाहित बताया और विवाह का प्रस्ताव रखा। धर्म अलग होने की बात कही तो हैदर ने कहा कि वे ‘हम किताबा’ (इंजिल, कुरान और तोरा को मानने वाले) हैं। विवाह में बाधा नहीं आएगी। तब वह राजी हो गई।
निकाह करने पहुंची तो धर्म परिवर्तन करवाने पर मजबूर किया
पीड़िता ने बताया कि दोनों की शादी सेक्टर एल, एलडीए आशियाना कॉलोनी में एक फ्लैट में हुई। वहां हैदर ने बताया कि मौलवी धर्म परिवर्तन के बिना निकाह करवाने को तैयार नहीं है। तब न चाहते हुए भी पीड़िता को इस्लाम कुबूल करना पड़ा।
बुर्का पहनने को मजबूर किया तो बढ़ा तनाव
निकाह के बाद दोनों उसी फ्लैट में रहने लगे। पीड़िता का आरोप है कि हैदर उसे बुरका पहनने को मजबूर करने लगा, जिससे तनाव शुरू हो गया। करीब 8 माह बाद हैदर के पहले से शादीशुदा होने का राज खुला। उसकी बीवी इलाहाबाद में रहती है। पीड़िता ने इसका विरोध किया तो हैदर उसे छोड़कर चला गया। सितंबर 2017 में फोन पर तीन तलाक भी दे दिया। पीड़िता कानपुर के स्वरूप नगर उसके घर पहुंची तो पूरी रात घर के बाहर ही गुजारनी पड़ी।
दूसरा विवाह शून्य होगा अगर...
पीड़िता के वकील रिजवान अहमद ने बताया कि एसीजेएम द्वितीय ज्ञानेंद्र त्रिपाठी के निर्देश पर आशियाना थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसमें आईपीसी की 494, 420 और 507 धाराएं लगाई हैं।
उन्होंने दावा किया कि देश में यह पहला मामला है जहां किसी मुस्लिम पर आईपीसी 494 के तहत केस दर्ज हुआ है। इस धारा में अपने वैवाहिक साथी के जीवित रहते जानबूझकर दूसरी शादी करने पर हिंदू विवाह अधिनियम 1953 के तहत केस दर्ज होता है। इसमें अधिकतम सात वर्ष की जेल होती है।
अहमद ने कहा कि मुस्लिम नागरिक इस कानून की जद में नहीं आते क्योंकि वहां पर्सनल लॉ लागू होता है। पर्सनल लॉ में बहु विवाह के लिए अपनी पत्नी से अनुमति लेनी होती है। हैदर ने मौजूदा मामले में पहली बीवी होने की जानकारी छिपाते हुए शादी की।
धोखा देकर युवती का धर्म परिवर्तन किया और तीन तलाक भी दिया। सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुका है कि इस्लाम में विवाह एक कॉन्ट्रैक्ट है। मौजूदा मामले में यह कॉन्ट्रैक्ट मूल तथ्यों को छिपाकर धोखा देकर किया गया, इसलिए इसे शून्य करार दिया जा सकता है। यही वजह है कि एफआईआर दर्ज हो सकी।