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मदरसों पर आजम की जिद पर झुकी सरकार!

Sat, 21 Feb 2015 01:41 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 21 Feb 2015 01:41 AM IST
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Finance dept could not make changes on Madarsa.

अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री मो. आजम खां की जिद के आगे वित्त विभाग को एक बार फिर झुकना पड़ा। मदरसों को अनुदान देने के मामले में वित्त विभाग ने शर्त लगाई थी मदरसों की छात्रसंख्या का सत्यापन समिति बनाकर किया जाए, लेकिन मंत्री को यह बात नागवार गुजरी। उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की। इसके बाद यह मामला सुलझ सका।

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प्रदेश में सपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 146 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी। इसके लिए विभाग तय मानक पहले ही घटा चुका है।

इस बीच वित्त विभाग ने घपलों के मद्देनजर सलाह दी थी कि मदरसों की छात्रसंख्या के सत्यापन का आधार छात्रवृत्ति रखी जाए, आजम ने मुख्यमंत्री से मिलकर इस शर्त को खत्म करा दिया।
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इसके बाद वित्त विभाग ने शर्त रख दी कि एक समिति बनाकर मदरसों की छात्रसंख्या का सत्यापन कराया जाए। समिति में डीएम, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी (डीएमओ) के अलावा शिक्षा विभाग के भी प्रतिनिधि शामिल किए जाएं।
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इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने लिखा-वित्त विभाग की सहमति पर अनुमोदित। जब यह मामला आजम के पास पहुंचा तो वे फिर भड़क गए।

दिये गए ये तर्क

Finance dept could not make changes on Madarsa.

दरअसल, प्रदेश सरकार मदरसों को अनुदान देने के लिए दो साल पहले ही प्रस्ताव मंगा चुकी है और डीएमओ की समिति इस पर अपनी रिपोर्ट भी दे चुकी है।

ऐसे में नई समिति बनाकर छात्रसंख्या का सत्यापन करवाने में फिर कई महीने लग जाएंगे। इसलिए मंत्री ने मुख्यमंत्री से फिर शिकायत की और कहा कि इस तरह तो मदरसों को अनुदान नहीं मिल पाएगा।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद मुख्य सचिव ने सुलझाया विवाद
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को यह मसला सुलझाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य सचिव ने वित्त विभाग के प्रमुख सचिव व अल्पसंख्यक विभाग के सचिव की पंचायत कराई।

इसमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने कहा कि जब एक बार डीएमओ व डीएम की छात्र संख्या सत्यापन की रिपोर्ट आ गई तो फिर नई समिति बनाने का क्या मतलब है। राज्य सरकार के करीब तीन साल बीत चुके हैं। प्रक्रिया पूरी करने में बचे दो साल भी बीत जाएंगे। बाद में मुख्य सचिव ने भी वित्त विभाग से यह शर्त हटाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के सामने इस तरह मामले को रखा गया

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जिसके बाद अंत में तय हुआ कि मुख्यमंत्री यदि चाहें तो समिति बनाने वाला नियम हटा सकते हैं। इसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने यह फाइल मुख्यमंत्री के यहां अनुमोदन के लिए भेज दी है।

गाजियाबाद हज हाउस मामले में भी झुकना पड़ा था
इससे पहले गाजियाबाद हज हाउस के मामले में भी वित्त विभाग को आजम खां के आगे झुकना पड़ा था। हज हाउस पर वित्त विभाग ने आपत्ति लगा दी थी।

इसके बाद मो. आजम खां ने तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को कड़ी चिट्ठी लिख दी थी। बाद में मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाया था।

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