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गोरखपुर ऑक्सीजन कांड: डॉ. कफील को सभी मामलों में नहीं मिली राहत, जांच अभी भी जारी
Fri, 27 Sep 2019 09:43 PM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Abhishek Singh
Updated Fri, 27 Sep 2019 09:43 PM IST
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डॉ कफील खान
- फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले में डॉ. कफील के खिलाफ चल रही विभागीय जांच और प्राइवेट प्रैक्टिस के मामले में अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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अगस्त 2017 में बच्चों की ऑक्सीजन की कमी से मौत के बाद उन पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने, 100 बेड एईएस वार्ड का नोडल प्रभारी होने सहित चार मामलों में जांच की जा रही थी। शासन स्तर से कराई गई इस जांच में उन्हें दो मामलों में आरोपी पाया गया है। अभी इस पर अंतिम कार्रवाई बाकी है।
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बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के बाल रोग विभाग के प्रवक्ता डॉ. कफील खान की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के मामले में उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे। जिसमें मुख्य 100 बेड के वार्ड का नोडल प्रभारी होते हुए ऑक्सीजन की उपलब्ध में लापरवाही था। जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता गया, उनके प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होने का भी खुलासा हुआ था।
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शुक्रवार को अचानक डॉ. कफील खान को बच्चों की मौत केमामले में क्लीन चिट मिलने की सूचना फैल गई। इस पर शासन का कहना है कि डॉ. कफील अहमद खान के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव एफएसडीए को 11 सितंबर 2017 को जांच अधिकारी नामित किया गया था।
डॉ. कफील ने चार बार जांच अधिकारी के समक्ष अपने बयान दिए। जिसमें उन्होंने प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोपों को नकारा था। जबकि मेडिस्प्रिंग हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रुस्तमपुर के पंजीयन में उनका नाम दर्ज था।
इसी तरह उनपर दूसरा आरोप भी निजी नर्सिंग होम का संचालन करने और राजकीय चिकित्सक होने के बावजूद प्राइवेट प्रैक्टिस करने का था। इसमें उन्होंने वर्ष 2017 में मेडिस्प्रिंग से कोई सरोकार न होने का शपथ पत्र दिया गया था। जबकि वह 2016 में ही प्रवक्ता रूप में मेडिकल कॉलेज में योगदान दे रहे थे। इस मामले में भी जांच केबाद कार्रवाई लंबित है।
अनुशासनहीनता की विभागीय जांच भी है लंबित
शासन से जारी जांच रिपोर्ट के अनुसार निलंबन के दौरान डॉ. कफील ने बहराइच जिला चिकित्सालय के बाल रोग विभाग में 22 सितंबंर 2018 को जबरदस्ती घुसकर मरीजों का इलाज करने का प्रयास किया। जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और पीआईसीयू में भी बाल रोगियों के जीवन पर संकट बना।