6-डी के साथ ‘द ग्रेंड कैन्योन’ का रोमांच
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साइंस सिटी में शुक्रवार से शुरू हुई ‘द ग्रेंड कैन्योन, ए रिवर एट रिस्क’ एक तरफ पानी को बचाने का संदेश देती है।
दूसरी तरफ रोमांचकारी सीन के साथ एक पूरी नदी के खतरे में होने के बारे में बताती है।
साइंस सिटी में शुक्रवार को
प्रदर्शित नई मूवी में स्टूडेंट्स ने ग्रैंड कैन्योन की विशाल दीवारों के
नीचे खड़े होने का रोमांच उठाया।
क्या है खास
फिल्म के इस प्रदर्शन के पीछे साई-मैक्स तकनीक काम
करती है। विज्ञान एक बहुत सामान्य सिद्धांत इसमें काम करता है। इसके
मुताबिक, हमारी आंख की एक निश्चित कोण तक देखने की सीमा होती है।
इसे
पेरीफेरल व्यू कहते हैं। इसी पेरीफेरल व्यू से ज्यादा सीमा का पर्दा और
प्रोजेक्टर साइमैक्स के लिए तैयार किया गया। फ्लैट स्क्रीन की जगह 20 मीटर
व्यास का विशेष अर्द्ध गोलाकार पर्दा साइमैक्स ऑडिटोरियम में है।
पूरी छत को कवर करता यह पर्दा पेरीफेरल व्यू से ज्यादा होने के चलते दर्शक को फिल्म के सीन में खुद भी शामिल होने का अहसास देता है।
प्रोजेक्शन
के लिए भी सामान्य लेंस की जगह ‘फिश आई लेंस’ इस्तेमाल हुआ है। लेंस का
नाम फिश आई इसलिए क्योंकि मछली की आंख भी मनुष्य से ज्यादा पेरीफेरल व्यू
की होती है।
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