{"_id":"679004a367a980297205fef3","slug":"fear-of-tiger-life-imprisoned-in-homes-for-48-days-in-60-villages-lucknow-news-c-13-knp1050-1044178-2025-01-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाघ का खौफ : 60 गांवों में 48 दिनों से घरों में कैद जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाघ का खौफ : 60 गांवों में 48 दिनों से घरों में कैद जिंदगी
विज्ञापन
लखनऊ। रहमान खेड़ा इलाके के 60 गांवों के करीब 10 हजार परिवारों के लोग पिछले करीब 48 दिनों से बाघ के खौफ में जी रहे हैं। ये घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। बड़े, बुजुर्ग व महिलाएं ज्यादातर समय घर में ही बिता रहे हैं। वहीं, बच्चे पूरी तरह घर में कैद होकर रह गए हैं। स्कूल बंद होने के चलते इनकी पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है।
रहमान खेड़ा के जंगल और आसपास के 20 किलोमीटर के दायरे में बाघ की चहलकदमी से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, खेती-किसानी और व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है। जो चौराहे शाम होते ही गुलजार होने लगते थे, वहां अब शाम ढलते ही वहां सन्नाटा फैल जाता है। रात में यदि कोई बाहर भी निकलता है तो झुंड बनाकर ही चलता है। रात में पुलिस व वन विभाग की टीम कभी कभार इन गांवों का भ्रमण करते दिख जाती हैं।
-- -- -- -- --
जब से बाघ आया है, जीना दुश्वार हो गया है...
हफीजखेड़ा गांव में बाघ की दहशत की पड़ताल करने मंगलवार दोपहर अमर उजाला टीम पहुंची तो वहां बागों के बीच बने घर में परिवार के साथ मौजूद मिले किसान मिथलेश ने बताया कि बाघ के डर से घर से कहीं नहीं जाते हैं। बेटी ने बताया कि घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। किसान छोटे लाल ने बताया कि जब से बाघ आया है तब से जीना दुश्वार हो गया है। वहीं, किसान संतोष अपने बेटे शिवम के साथ घर के बाहर बैठकर जानवरों की रखवाली करते नजर आए। उन्होंने कहा कि हमेशा डर बना रहता है कि बाघ कहीं रात के अंधेरे में बागों की ओर से न आ जाए और मवेशियों को कोई नुकसान न पहुंचा दे।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- --
तीन घंटे पहले बंद कर रहे दुकानें
कसमंडी हाईवे, हरदोई रोड हाईवे, जेहटा के पास देर रात तक खुलने वाली दुकानें अब रात नौ बजे की जगह तीन घंटे पहले शाम छह बजे ही बंद कर दी जाती हैं। यहां की सड़कें जंगल से सटी हुई हैं। दुकानदार कई किमी दूर से आकर दुकानें खोलते हैं। इससे दुकानें खुलने व बंद होने का समय भी बदल गया है। इसलिए दुकानदारी पर भारी असर पड़ा है। सबसे ज्यादा असर रहमान खेड़ा जंगल के आसपास के गांवों से गुजरे हाईवे वाले इलाकों में देखने को मिल रहा है। यहां तीन सौ से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों में बिक्री 50 फीसदी से भी कम हो गई है।
उलरापुर में मिले नए पगचिह्न
रहमानखेड़ा क्षेत्र के उलरापुर बेहता नाले के पास सरसों और गेहूं के खेत में बाघ के नए पगचिह्न मिले हैं। लखनऊ हरदोई हाईवे किनारे बसे दुगौली, हफीजखेड़ा, हलवापुर, मीठेनगर, उलरापुर, हबीबपुर, टिकैतगंज, बुधड़िया, कुशमौरा, दुर्गागंज, अमेठिया, अल्लुपुर, सहिलामाऊ, कनार, कसमंडी, बहेलिया सहित 60 गांवों में बाघ की दहशत है।
विज्ञापन
रहमान खेड़ा के जंगल और आसपास के 20 किलोमीटर के दायरे में बाघ की चहलकदमी से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, खेती-किसानी और व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है। जो चौराहे शाम होते ही गुलजार होने लगते थे, वहां अब शाम ढलते ही वहां सन्नाटा फैल जाता है। रात में यदि कोई बाहर भी निकलता है तो झुंड बनाकर ही चलता है। रात में पुलिस व वन विभाग की टीम कभी कभार इन गांवों का भ्रमण करते दिख जाती हैं।
विज्ञापन
जब से बाघ आया है, जीना दुश्वार हो गया है...
हफीजखेड़ा गांव में बाघ की दहशत की पड़ताल करने मंगलवार दोपहर अमर उजाला टीम पहुंची तो वहां बागों के बीच बने घर में परिवार के साथ मौजूद मिले किसान मिथलेश ने बताया कि बाघ के डर से घर से कहीं नहीं जाते हैं। बेटी ने बताया कि घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। किसान छोटे लाल ने बताया कि जब से बाघ आया है तब से जीना दुश्वार हो गया है। वहीं, किसान संतोष अपने बेटे शिवम के साथ घर के बाहर बैठकर जानवरों की रखवाली करते नजर आए। उन्होंने कहा कि हमेशा डर बना रहता है कि बाघ कहीं रात के अंधेरे में बागों की ओर से न आ जाए और मवेशियों को कोई नुकसान न पहुंचा दे।
विज्ञापन
तीन घंटे पहले बंद कर रहे दुकानें
कसमंडी हाईवे, हरदोई रोड हाईवे, जेहटा के पास देर रात तक खुलने वाली दुकानें अब रात नौ बजे की जगह तीन घंटे पहले शाम छह बजे ही बंद कर दी जाती हैं। यहां की सड़कें जंगल से सटी हुई हैं। दुकानदार कई किमी दूर से आकर दुकानें खोलते हैं। इससे दुकानें खुलने व बंद होने का समय भी बदल गया है। इसलिए दुकानदारी पर भारी असर पड़ा है। सबसे ज्यादा असर रहमान खेड़ा जंगल के आसपास के गांवों से गुजरे हाईवे वाले इलाकों में देखने को मिल रहा है। यहां तीन सौ से अधिक छोटी-बड़ी दुकानों में बिक्री 50 फीसदी से भी कम हो गई है।
उलरापुर में मिले नए पगचिह्न
रहमानखेड़ा क्षेत्र के उलरापुर बेहता नाले के पास सरसों और गेहूं के खेत में बाघ के नए पगचिह्न मिले हैं। लखनऊ हरदोई हाईवे किनारे बसे दुगौली, हफीजखेड़ा, हलवापुर, मीठेनगर, उलरापुर, हबीबपुर, टिकैतगंज, बुधड़िया, कुशमौरा, दुर्गागंज, अमेठिया, अल्लुपुर, सहिलामाऊ, कनार, कसमंडी, बहेलिया सहित 60 गांवों में बाघ की दहशत है।