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SGPGI: कोरोना काल के बाद बच्चों में बढ़ा मोटापा, देश का हर दसवां बच्चा फैटी लिवर का शिकार
Sun, 26 Feb 2023 02:00 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 26 Feb 2023 02:00 PM IST
सार
फैटी लिवर का एक प्रमुख कारण बच्चों का खानपान है। फास्ट फूड इसके लिए सर्वाधिक जिम्मेदार है। कोरोना के बाद बच्चों में फैटी लिवर की समस्या बढ़ी है।
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- फोटो : iStock
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विस्तार
बच्चों का मोटापा उनके लिए खतरनाक हो सकता है। देश का हर दसवां बच्चा फैटी लिवर का शिकार है। कोरोना काल के बाद बच्चों में मोटापा का प्रतिशत 1.5 गुना बढ़ा है। यह फैटी लिवर की वजह बन सकता है। एसजीपीजीआई के हेपोटोलॉजी विभाग के स्थापना दिवस पर आयोजित सीएमई में प्रो. मोइनक सेनशर्मा ने यह जानकारी दी।
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पीजीआई के बाल पेट रोग विशेषज्ञ प्रो. मोइनक सेन शर्मा ने बताया कि लिवर की कोशिकाओं में जब ज्यादा मात्रा में फैट जमा हो जाता है तब फैटी लिवर की परेशानी होती है। इससे लिवर के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। मोटापे की वजह से इनमें कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण दिल की बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए बच्चों का खानपान विशेषकर फास्ट फूड सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।
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पेट रोग विशेषज्ञ प्रो. समीर मोहिंद्रा ने बताया कि इम्यून हेपेटाइटिस ऐसी बीमारी है, जिसमें किसी अज्ञात कारणों से लिवर में क्रोनिक सूजन होने लगती है। ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस की समस्या होने पर मरी ऑटोइम्यून हैपेटाइटिस के निदान के लिए जांच जरूरी है। अगर लीवर एंजाइम में बढ़ोतरी होती है, तो इसका पता रक्त जांच से चल जाता है।
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