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मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा अनशन : राकेश
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35 : गौरीगंज : लखनऊ स्थित गांधी प्रतिमा पर अनशन कर रहे विधायक को जबरन अस्पताल ले जाते पुलिस कर्मी। -स?
- फोटो : AMETHI
गौरीगंज (अमेठी)। अपने विधान सभा क्षेत्र की दो सड़कों के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर लखनऊ स्थित गांधी प्रतिमा पर अनशन कर रहे विधायक को शुक्रवार रात पुलिस ने जबरन उठा कर अस्पताल में भर्ती करवा दिया। अस्पताल में जबरन हाथ-पैर बांधकर ड्रिप चढ़ाने के बावजूद विधायक अनशन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। जिला पंचायत संदस्य व प्रतिनिधि की मौजूदगी में शनिवार को भी कार्यकर्ता अनशन पर डटे रहे। विधायक ने प्रदेश सरकार पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रखने की चेतावनी दी है।
मुसाफिरखाना में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से निर्मित कादूनालाथौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) के पुनर्निर्माण के लिए गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद अनशन शुरू किया है। 31 अक्तूबर से लखनऊ के गांधी प्रतिमा पर धरना देने के बाद सरकार द्वारा मांगें न माने जाने पर विधायक ने अनशन शुरू कर दिया था।
विधायक के अनशन स्थल पर शुक्रवार को पहुंची मेडिकल टीम ने जांच करने के बाद बीपी कम होने की जानकारी दी। इसके बाद भी विधायक ने अनशन समाप्त नहीं किया तो पुलिस ने जबरन विधायक को विस्तर समेत उठाकर सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया। विधायक के विरोध के बावजूद अस्पताल में उनका हाथ-पैर बांधकर ड्रिप चढ़वा दी गई।
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इस बीच अस्पताल में विधायक को जबरन भर्ती करने के बावजूद समर्थकों ने जीपीओ गंाधी प्रतिमा के सामने अनशन जारी रखा। विधायक के साथ अनशन पर बैठे डीडीसी धर्मेश धोबी के नेतृत्व में विधायक प्रतिनिधि उमेश सिंह व समर्थक अनशन स्थल पर मौजूद रहे। विधायक ने प्रदेश सरकार पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए मांगें पूरी होने तक अन्न जल ग्रहण नहीं करने की चेतावनी दी है।
विधायक ने कहा कि सरकार जनप्रतिनिधि की उपेक्षा करने के साथ अब उत्पीड़न कर रही है। जनहित के मुद्दों को उठाने के बावजूद उसे पूरा नहीं करना प्रदेश सरकार की कथनी व करनी के फर्क को साबित कर रहा है। विधायक ने कहा कि अगर उन्हें अनशन स्थल नहीं जाने दिया जाता तो भी वह अस्पताल में ही अनशन करेंगे। उन्होंने मांगेें पूरी होने के बाद ही अनशन समाप्त करने की बात कही है।
एक माह पहले तय की थी दो सड़कों के निर्माण की डेडलाइन
गौरीगंज के मऊ गांव के निवासी राकेश प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे। उनके पहले कार्यकाल में बनीं कई सड़कें अब जर्जर हो चुकी हैं। इन्हीं सड़कों में शामिल कादूनाला थौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) भी हैं। दोनों सड़कों को दुरुस्त कराने की मांग राकेश प्रताप ने शासन-प्रशासन दोनों से की थी।
विधानसभा में इस पर प्रश्न उठाने के अलावा प्राक्कलन समिति का गठन तक कराया। बावजूद इसके सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं होने से नाराज विधायक ने दो अक्तूबर को डीएम अरुण कुमार को ज्ञापन देकर सड़कों का पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए 31 अक्तूबर सुबह 11 बजे तक का समय दिया था। उनकी अंतिम चेतावनी का भी कोई असर नहीं हुआ तो 31 अक्तूबर को सुबह 11 बजे वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के पास पहुंचे और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद से वह जीपीओ पर गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे हैं।
2017 में दो पार्टियों से टिकट
2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश के चाचा व तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली थी। विधानसभा चुनाव के दौरान राकेश प्रताप को समाजवादी पार्टी के अलावा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने भी टिकट दिया। हालांकि वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे।
राकेश का राजनीतिक सफर
1992 से 1997 तक राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिलाध्यक्ष रहे।
2003 से 2011 तक समाजवादी पार्टी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष रहे।
2006 में अपने गांव मऊ से क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए।
2006 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में रवींद्र प्रताप सिंह को हराकर ब्लॉक प्रमुख बने।
2006 से 2011 तक ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष व प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष रहे।
2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर गौरीगंज से विधायक चुने गए। कांग्रेस प्रत्यराशी मो. नईम को मामूली अंतर से हराया।
2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के मो. नईम को 26479 से अधिक वोटों से हराया।
31 अक्तूबर 2021 को कार्यकाल पूरा होने से पहले जनहित के मुद्दे पर दिया इस्तीफा।
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मुसाफिरखाना में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से निर्मित कादूनालाथौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) के पुनर्निर्माण के लिए गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद अनशन शुरू किया है। 31 अक्तूबर से लखनऊ के गांधी प्रतिमा पर धरना देने के बाद सरकार द्वारा मांगें न माने जाने पर विधायक ने अनशन शुरू कर दिया था।
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विधायक के अनशन स्थल पर शुक्रवार को पहुंची मेडिकल टीम ने जांच करने के बाद बीपी कम होने की जानकारी दी। इसके बाद भी विधायक ने अनशन समाप्त नहीं किया तो पुलिस ने जबरन विधायक को विस्तर समेत उठाकर सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया। विधायक के विरोध के बावजूद अस्पताल में उनका हाथ-पैर बांधकर ड्रिप चढ़वा दी गई।
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इस बीच अस्पताल में विधायक को जबरन भर्ती करने के बावजूद समर्थकों ने जीपीओ गंाधी प्रतिमा के सामने अनशन जारी रखा। विधायक के साथ अनशन पर बैठे डीडीसी धर्मेश धोबी के नेतृत्व में विधायक प्रतिनिधि उमेश सिंह व समर्थक अनशन स्थल पर मौजूद रहे। विधायक ने प्रदेश सरकार पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए मांगें पूरी होने तक अन्न जल ग्रहण नहीं करने की चेतावनी दी है।
विधायक ने कहा कि सरकार जनप्रतिनिधि की उपेक्षा करने के साथ अब उत्पीड़न कर रही है। जनहित के मुद्दों को उठाने के बावजूद उसे पूरा नहीं करना प्रदेश सरकार की कथनी व करनी के फर्क को साबित कर रहा है। विधायक ने कहा कि अगर उन्हें अनशन स्थल नहीं जाने दिया जाता तो भी वह अस्पताल में ही अनशन करेंगे। उन्होंने मांगेें पूरी होने के बाद ही अनशन समाप्त करने की बात कही है।
एक माह पहले तय की थी दो सड़कों के निर्माण की डेडलाइन
गौरीगंज के मऊ गांव के निवासी राकेश प्रताप सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते थे। उनके पहले कार्यकाल में बनीं कई सड़कें अब जर्जर हो चुकी हैं। इन्हीं सड़कों में शामिल कादूनाला थौरी मार्ग (9.15 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) भी हैं। दोनों सड़कों को दुरुस्त कराने की मांग राकेश प्रताप ने शासन-प्रशासन दोनों से की थी।
विधानसभा में इस पर प्रश्न उठाने के अलावा प्राक्कलन समिति का गठन तक कराया। बावजूद इसके सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं होने से नाराज विधायक ने दो अक्तूबर को डीएम अरुण कुमार को ज्ञापन देकर सड़कों का पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए 31 अक्तूबर सुबह 11 बजे तक का समय दिया था। उनकी अंतिम चेतावनी का भी कोई असर नहीं हुआ तो 31 अक्तूबर को सुबह 11 बजे वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के पास पहुंचे और विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद से वह जीपीओ पर गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे हैं।
2017 में दो पार्टियों से टिकट
2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश के चाचा व तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली थी। विधानसभा चुनाव के दौरान राकेश प्रताप को समाजवादी पार्टी के अलावा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने भी टिकट दिया। हालांकि वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे।
राकेश का राजनीतिक सफर
1992 से 1997 तक राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिलाध्यक्ष रहे।
2003 से 2011 तक समाजवादी पार्टी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष रहे।
2006 में अपने गांव मऊ से क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए।
2006 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में रवींद्र प्रताप सिंह को हराकर ब्लॉक प्रमुख बने।
2006 से 2011 तक ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष व प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष रहे।
2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर गौरीगंज से विधायक चुने गए। कांग्रेस प्रत्यराशी मो. नईम को मामूली अंतर से हराया।
2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के मो. नईम को 26479 से अधिक वोटों से हराया।
31 अक्तूबर 2021 को कार्यकाल पूरा होने से पहले जनहित के मुद्दे पर दिया इस्तीफा।

34 : गौरीगंज : लखनऊ स्थित गांधी प्रतिमा पर अनशन करते विधायक का स्वास्थ्य परीक्षण करते डॉक्टर। -संवा?- फोटो : AMETHI