फास्ट फूड से हो सकती है ये गंभीर समस्या, देखें लक्षण
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तेज आवाज के बीच लगातार रहने से सुनने की क्षमता तो कम होती है लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता है कि फास्ट फूड और दूसरे ऐसे आहार, जिसमें पोषक तत्वों की कमी है, उसे खाने से भी सुनने की क्षमता कम होती है।
यह जानकारी विश्व श्रवण दिवस की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को बलरामपुर अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. हिमांशु प्रताप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि पोषक तत्वों की कमी से कान से लेकर दिमाग तक जाने वाले न्यूरो ट्रांसमीटर्स कमजोर होने लगते हैं।
इस वजह से सुनने की क्षमता घटती है। जब तक कम सुनाई देने का पता चलता है तब तक कान की कई सतहों को नुकसान हो चुका होता है। व्यक्ति अंकुरित अनाज और फलों के सेवन से हालात बेहतर रह सकते हैं।
डॉ. हिमांशु ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान मां को थायरॉयड होने या शरीर में नमक की कमी की से बच्चे को सुनने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे में जन्म के बाद ‘नियोनेटल स्क्रीनिंग’ से बच्चे के सुनने और देखने की स्थिति का पता चल जाता है।
कई बार बच्चों में हियरिंग नर्व के कमजोर होने से उसको सुनने में परेशानी होती है। इस तरह के मामलों में कॉकलियर इंप्लांट की मदद से बच्चे के सुनने और बोलने की क्षमता को बरकरार रखा जा सकता है।
ऑपरेशन के बाद सुनाई दे, गारंटी नहीं
सुनाई देने की समस्या से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो उनको ये विश्वास होता है कि ऑपरेशन के बाद उनको सुनाई देना शुरू हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं है। कान की नसों के बेहद कमजोर होने और पर्दे से लेकर हड्डी तक में संक्रमण फैलने से ऑपरेशन के बाद भी सुनाई देना मुमकिन नहीं है।
ऐसे में कान कि किसी तरह की समस्या पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। लोकबंधु अस्पताल के डॉ. एम लाल ने बताया कि मोबाइल समेत अन्य उपकरणों से बनने वाला चुंबकीय क्षेत्र से कान की नसें कमजोर होती हैं जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे घटती है। इसका असर बहुत देर में दिखाई पड़ता है।
ईएनटी सर्जन डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि लोग बच्चे के कान में तेल और अन्य तरह की दवाएं अपनी इच्छानुसार डाल देते हैं। इससे कान के पर्दे के साथ हड्डी में संक्रमण का खतरा रहता है जो सुनने की क्षमता को बाधित कर देता है।
टीकाकरण में लापरवाही, नाक की एलर्जी और टॉसिंल जैसी समस्या से भी कान को नुकसान होता है। नवजात को पीलिया होने पर सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है।
ऑडियोलॉजिस्ट सुहानी शर्मा ने बताया कि हियरिंग इम्प्लांट की दुनिया में डिजिटल हियरिंग एड का दौर है। इसमें इस तरह के आधुनिक उपकरण कान में लगाए जाते हैं जो उस फ्रिक्वेंसी को बढ़ाता है जिसकी जरूरत सुनने के लिए होती है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल हियरिंग एड की मदद से मरीज की स्थिति के आधार पर प्रोग्राम सेट किया जाता है। चक्कर व कमजोरी महसूस होने के साथ अगर कान का लगातार बहता रहे तो इससे ब्रेन को भी खतरा हो सकता है। वहीं कान में सनसनाहट हो, हमेशा तेज दर्द और खुजली हो तो भी तुरंत डॉक्टर को दिखाए।