फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   fast food is harmful for hearing capacity

फास्ट फूड से हो सकती है ये गंभीर समस्या, देखें लक्षण

Fri, 03 Mar 2017 05:14 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 03 Mar 2017 05:14 PM IST
विज्ञापन
 fast food is harmful for hearing capacity
d

तेज आवाज के बीच लगातार रहने से सुनने की क्षमता तो कम होती है लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता है कि फास्ट फूड और दूसरे ऐसे आहार, जिसमें पोषक तत्वों की कमी है, उसे खाने से भी सुनने की क्षमता कम होती है।

विज्ञापन


यह जानकारी विश्व श्रवण दिवस की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को बलरामपुर अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. हिमांशु प्रताप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि पोषक तत्वों की कमी से कान से लेकर दिमाग तक जाने वाले न्यूरो ट्रांसमीटर्स कमजोर होने लगते हैं।
विज्ञापन


इस वजह से सुनने की क्षमता घटती है। जब तक कम सुनाई देने का पता चलता है तब तक कान की कई सतहों को नुकसान हो चुका होता है। व्यक्ति अंकुरित अनाज और फलों के सेवन से हालात बेहतर रह सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. हिमांशु ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान मां को थायरॉयड होने या शरीर में नमक की कमी की से बच्चे को सुनने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे में जन्म के बाद ‘नियोनेटल स्क्रीनिंग’ से बच्चे के सुनने और देखने की स्थिति का पता चल जाता है।

कई बार बच्चों में हियरिंग नर्व के कमजोर होने से उसको सुनने में परेशानी होती है। इस तरह के मामलों में कॉकलियर इंप्लांट की मदद से बच्चे के सुनने और बोलने की क्षमता को बरकरार रखा जा सकता है।

ऑपरेशन के बाद सुनाई दे, गारंटी नहीं

 fast food is harmful for hearing capacity
डाॅ एम लाल और डाॅ ह‌िमांशु - फोटो : amar ujala

सुनाई देने की समस्या से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो उनको ये विश्वास होता है कि ऑपरेशन के बाद उनको सुनाई देना शुरू हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं है। कान की नसों के बेहद कमजोर होने और पर्दे से लेकर हड्डी तक में संक्रमण फैलने से ऑपरेशन के बाद भी सुनाई देना मुमकिन नहीं है।

ऐसे में कान कि किसी तरह की समस्या पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। लोकबंधु अस्पताल के डॉ. एम लाल ने बताया कि मोबाइल समेत अन्य उपकरणों से बनने वाला चुंबकीय क्षेत्र से कान की नसें कमजोर होती हैं जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे घटती है। इसका असर बहुत देर में दिखाई पड़ता है।

ईएनटी सर्जन डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि  लोग बच्चे के कान में तेल और अन्य तरह की दवाएं अपनी इच्छानुसार डाल देते हैं। इससे कान के पर्दे के साथ हड्डी में संक्रमण का खतरा रहता है जो सुनने की क्षमता को बाधित कर देता है।

टीकाकरण में लापरवाही, नाक की एलर्जी और टॉसिंल जैसी समस्या से भी कान को नुकसान होता है। नवजात को पीलिया होने पर सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है।

ऑडियोलॉजिस्ट सुहानी शर्मा ने बताया कि हियरिंग इम्प्लांट की दुनिया में डिजिटल हियरिंग एड का दौर है। इसमें इस तरह के आधुनिक उपकरण कान में लगाए जाते हैं जो उस फ्रिक्वेंसी को बढ़ाता है जिसकी जरूरत सुनने के लिए होती है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल हियरिंग एड की मदद से मरीज की स्थिति के आधार पर प्रोग्राम सेट किया जाता है। चक्कर व कमजोरी महसूस होने के साथ अगर कान का लगातार बहता रहे तो इससे ब्रेन को भी खतरा हो सकता है। वहीं कान में सनसनाहट हो, हमेशा तेज दर्द और खुजली हो तो भी तुरंत डॉक्टर को दिखाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed