यूपी में लागू हुई किसानों के लिए मोदी सरकार की सबसे बड़ी योजना
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प्रदेश सरकार ने अमरोहा, झांसी, गोरखपुर, मुरादाबाद, शामली व श्रावस्ती को छोड़कर सभी जिलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू कर दी है। इन जिलों में इसे रबी फसलों से लागू करने का फैसला हुआ है।
नई योजना में न सिर्फ किसानों के नुकसान के आकलन की प्रक्रिया सरल की गई है बल्कि भुगतान को भी समयबद्ध और सीधे बैंक खाते में करने का प्रावधान किया है। साथ ही गांव और निजी स्तर पर किसानों के नुकसान पर मुआवजे का प्रावधान किया गया है।
नुकसान को चार श्रेणियों में बांटकर क्षतिपूर्ति की व्यवस्था हुई है। पहली श्रेणी में प्रतिकूल मौसम के कारण बुआई न होने और दूसरी श्रेणी में फसलों को कटाई से पहले दैवीय व प्राकृतिक आपदा, रोगों के कारण होने वाले नुकसान को शामिल किया है।
तीसरी ओलावृष्टि, भू-स्खलन, बाढ़ और चौथी श्रेणी खलिहान में रखी फसलों को नुकसान की भरपाई के लिए बनाई है। योजना का लाभ खरीफ की फसलों में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंगफली, उर्द, मूंग, तिल, अरहर, सोयाबीन और रबी में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों और आलू की फसलों पर मिलेगा।
'नुकसान का आकलन पर पंचायत स्तर पर होगा'
योजना का संचालन एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। योजना का लाभ बटाईदार और किराए पर खेती करने वालों को भी देने का फैसला किया गया है। जिन्होंने बैंकों से ऋण लेकर बुआई की है उनका बीमा संबंधित बैंकों के जरिये होगा। सूखे या अन्य कारण से प्रतिकूल मौसम के चलते बुआई न होने पर किसानों के नुकसान का आकलन अब ग्राम पंचायत स्तर पर होगा।
किसी ग्राम पंचायत के 75 प्रतिशत किसान अगर बुआई नहीं कर पाए तो उन्हें इस योजना में कवर दिया जाएगा। मुआवजे के रूप में उनकी बीमित राशि का 25 प्रतिशत भुगतान होगा। पर, ऐसी ग्राम पंचायतों के किसान को आगे की योजना के अंतर्गत उस फसल के लिए उस वर्ष कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
दैवीय आपदा में नुकसान का आकलन
ओलावृष्टि, भू-स्खलन और बाढ़ की दशा में किसान को इकाई मानकर नुकसान का आकलन होगा। किसान को नुकसान के समय तक फसलों की लागत का आकलन कर मुआवजे का भुगतान होगा।
दैवीय आपदा में नुकसान का आकलन संबंधित ग्राम पंचायत में संबंधित फसल के सात वर्षों का औसत उत्पादन निकालकर होगा। पर, इनमें 2009 और 2014 के दौरान खरीफ और रबी फसलों तथा 2014-15 के दौरान रबी फसल के उत्पादन को शामिल नहीं किया जाएगा।
खेतों में रखी फसल होती है खराब तो भी मिलेगा मुआवजा
कटाई के बाद खलिहान में रखी फसलों को यदि 14 दिन में अतिवृष्टि, बेमौसम वर्षा या अन्य किसी कारण नुकसान होता है तो भी इस योजना का लाभ उसे मिलेगा। नुकसान के आकलन के लिए बीमा कंपनी कृषि या उद्यान विभाग के किसी सेवानिवृत्त अधिकारी अथवा कर्मचारी की मदद लेगी।
किसानों को 48 घंटे के अंदर सीधे बीमा कंपनी अथवा संबंधित बैंक को टोल फ्री नंबर पर इसकी सूचना देनी होगी। सर्वेयर को 10 दिन के भीतर नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट के 15 दिन के भीतर किसानों को मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित होगा।
ये हैं इस योजना की खास बातें
बीमा कंपनी की वेबसाइट : ww.agri-insurance.gov.in
खरीफ के लिए किस्त जमा करने की अंतिम तिथि : 31 जुलाई
रबी के लिए किस्त जमा करने की अंतिम तिथि : 31 दिसंबर
शिकायतों व समस्याओं के लिए हेल्पलाइन : मुख्यमंत्री बैंकिंग सर्विस हेल्पलाइन नंबर -1520
नोडल अधिकारी : जिला स्तर पर उप कृषि निदेशक
मॉनिटरिंग व्यवस्था : मॉनिटरिंग के लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति। यह समिति हर माह समीक्षा करेगी।