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UP News: किसान बन रहे उद्यमी, गांवों में बढ़ीं सूक्ष्म इकाइयां और उद्योग; ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव

Sat, 20 Jun 2026 07:50 PM IST
Bhupendra Singh अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sat, 20 Jun 2026 07:50 PM IST
सार

बैंक ऋण आंकड़ों में नया यूपी दिख रहा है। किसान उद्यमी बन रहे हैं, गांवों में सूक्ष्म इकाइयां और उद्योग बढ़े हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव हो रहा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Farmers in UP are becoming entrepreneurs micro-units and industries have grown in villages
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

यूपी सरकार को बैंकों से भेजी गई वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) 2025-26 की रिपोर्ट में यूपी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अब सिर्फ पारंपरिक खेती ही नहीं, बल्कि जुड़ी सहायक गतिविधियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगाई जा रहीं सूक्ष्म इकाइयों और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। इससे प्रदेश में किसानों, युवाओं व नए उद्यमियों के बीच नवाचार व स्वरोजगार की प्रवृत्ति मजबूत हो रही है।
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पिछले साल भर में खेती से जुड़ी सहायक गतिविधियां डेयरी, पशुपालन व मत्स्यपालन आदि में 22,694 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 33,048 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। यह लक्ष्य का 146.62 प्रतिशत है, जो कृषि क्षेत्र की सभी उप श्रेणियों में सर्वाधिक है। 
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यूनियन बैंक के महाप्रबंधक राजेश कुमार कहते हैं, किसान अब सिर्फ अनाज-फल-सब्जी उगाने तक सीमित नहीं रहकर अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित कर रहे हैं। डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्यपालन और कृषि आधारित सूक्ष्म उद्योगों की ओर बढ़ता रुझान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।
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इकाइयों की संख्या भी लक्ष्य से अधिक

रिपोर्ट से दूसरा बड़ा संकेत सूक्ष्म (माइक्रो) उद्यमों से मिला है। सूक्ष्म विनिर्माण और सेवा इकाइयों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1.58 लाख करोड़ रुपये ऋण वितरित हुआ, जो 103.91 प्रतिशत है। इकाइयों की संख्या भी लक्ष्य से अधिक रही। इसके विपरीत छोटे व मध्यम उद्योगों में उपलब्धि क्रमशः 85.30 और 57.02 प्रतिशत रही। इससे स्पष्ट है कि निवेश का बड़ा हिस्सा छोटे शहरों और गांवों में शुरू होने वाले कम पूंजी वाले उद्यमों में जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक गांवों में सूक्ष्म उद्यम और नवाचार तेजी से बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र का है। इस श्रेणी में 1,609 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 5,054 करोड़ रुपये का ऋण वितरित हुआ, जो लक्ष्य का 314.11 प्रतिशत है। इकाइयों की संख्या के आधार पर भी उपलब्धि 246 फीसदी अधिक रही। पीएम सूर्य घर योजना, कृषि सोलर पंप और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं ने इस क्षेत्र में ऋण मांग को बढ़ाया है।

कमजोर वर्गों को दिए जाने वाले में ऋण में 172 फीसदी की वृद्धि

कमजोर वर्गों को दिए जाने वाले ऋण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 99,227 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक ऋण दिए गए जो 172.28 फीसदी अधिक है। कुल मिलाकर देखें तो प्राथमिकता क्षेत्र में 6.45 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 5.30 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। 


बैंकिंग मामलों के विशेषज्ञ एसके मिश्रा का कहना है कि ऐसे में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में विकास का नया केंद्र गांव, किसान और सूक्ष्म उद्यमी बन रहे हैं। बैंक ऋण का झुकाव भी अब बड़े उद्योगों की तुलना में ग्रामीण उद्यमिता, कृषि मूल्य संवर्धन और हरित ऊर्जा की ओर दिखाई दे रहा है।
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