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Lucknow News: 70 लाख नहीं, 1.25 करोड़ रुपये प्रति बीघा मुआवजा मांग रहे किसान, महापंचायत में भरी हुंकार

Fri, 21 Aug 2026 02:22 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 02:22 AM IST
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Farmers demand compensation of 1.25 crore per bigha instead of 70 lakh, raise a spirited call at the Mahapanchayat
काकोरी के घुरघुरी तालाब में आयोजित महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन-लोकतांत्रिक के नेतृत्व में
लखनऊ। एलडीए की प्रस्तावित वरुण विहार योजना को लेकर किसानों का आक्रोश बृहस्पतिवार को काकोरी के घुरघुरी तालाब पर आयोजित महापंचायत में खुलकर सामने आया। भारतीय किसान यूनियन-लोकतांत्रिक के नेतृत्व में एक हजार से अधिक किसानों ने एलडीए और शासन के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए प्रस्तावित मुआवजा बढ़ाने की मांग की। किसानों ने 70 लाख रुपये प्रति बीघा की दर को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये प्रति बीघा करने की मांग उठाई।
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महापंचायत में किसानों की मांगों को लेकर ज्ञापन लेने पहुंचे एलडीए के एसडीएम विराग तरवरिया, सरोजनीनगर तहसील के नायब तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों ने ज्ञापन लिया। अधिकारियों ने किसानों और संगठन के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि रक्षाबंधन के बाद खुली बैठक आयोजित की जाएगी। साथ ही तीन सितंबर को किसानों के प्रतिनिधिमंडल की एलडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया। इसके बाद शाम साढ़े पांच बजे महापंचायत समाप्त हुई।
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संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश सिंह चौहान ने कहा कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं। शहरी विकास जरूरी है, लेकिन विकास परियोजनाओं से प्रभावित किसानों और भूमिधरों के साथ न्यायपूर्ण और पारदर्शी व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि आजीविका और परिवार के भविष्य का आधार है।युवा जिला अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि भूमि जाने के बाद किसान खेती से वंचित हो जाते हैं। ऐसे में उचित मुआवजा नहीं मिलने पर परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह चौहान ने कहा कि भूमि का मूल्यांकन वर्तमान कृषि दर के साथ भविष्य के विकास मूल्य, बाजार भाव और शहरी विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।किसानों ने पारदर्शी मूल्यांकन, न्यायोचित मुआवजा और किसान हितों की सुरक्षा की मांग की। महापंचायत में संगठन के प्रदेश और जिला पदाधिकारियों समेत एक हजार से अधिक संख्या में किसान मौजूद रहे।
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