संसद में पारित किए गए कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ व अन्य जिलों में जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। किसानों ने लखनऊ में अयोध्या फैजाबाद राजमार्ग जाम करने की कोशिश की और पराली जलाकर व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विधेयकों का विरोध किया। वहीं, अहिमामऊ में प्रदर्शन कर रहे किसानों को गिरफ्तार किया गया है।
किसान नेताओं का कहना है कि तीनों विधेयक पास होने के बाद अब न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा। इसलिए विधेयक वापस लेने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। किसान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं।
बता दें कि समाजवादी पार्टी व कांग्रेस ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने इस संबंध में सभी जिला इकाइयों को एक दिन पहले ही निर्देश भेज दिए थे। सपा का कहना है कि कृषि एवं श्रम कानूनों में सुधार से किसान और मजदूर उद्योगपतियों के बंधुआ हो जाएंगे। भाजपा सरकार ने खेती को कारपोरेट के हाथों में सौंपने जा रही है। आजादी के बाद पहली बार किसानों पर इतना बड़ा हमला हुआ है। मजदूरों की हालत तो और भी खराब हो जाएगी। नए श्रम कानूनों के अनुसार, कर्मचारियों को कभी भी नौकरी से निकाला जा सकेगा। कारखानों में उन्हें गुलामी करने के लिए मजबूर किया जाएगा। उनका शोषण बढ़ेगा और जीवन स्तर में गिरावट आएगी।
प्रदर्शनकारी किसान ट्रैक्टर से आए। किसानों द्वारा पहले ही चक्का जाम का एलान किए जाने के बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को लेकर पुख्ता प्रबंध किए हैं।
बाराबंकी में भारतीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने पटेल तिराहा जाम कर प्रदर्शन किया। चौराहा जाम होने से राहगीरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
रायबरेली में अध्यादेशों के विरोध में राजनीति तेज हो गई है। किसानों ने शहीद स्मारक पर धरना दिया। इसके अलावा भदोखर थाना क्षेत्र और मुंशीगंज शहीद स्मारक पर भी प्रदर्शन हुए।
बाराबंकी में कृषि बिल का विरोध करते हुए भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने हाईवे पर पराली जलाकर व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर कृषि विधेयक पर विरोध जताया है।