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Family Planning : नसबंदी में बढ़ी पुरुषों की रुचि, डेढ़ फीसदी से अधिक हुई हिस्सेदारी
Mon, 08 Aug 2022 04:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 08 Aug 2022 04:30 AM IST
सार
Family Planning : नसबंदी के प्रति पुरुषों का रुझान बढ़ रहा है। उनकी भागीदारी बढ़कर डेढ़ फीसदी से अधिक हो गई है। वर्ष 2020-21 में प्रदेश में कुल 2,90,899 नसबंदी हुई। इसमें पुरुषों की संख्या 1,987 थी यानी उनकी भागीदारी 0.68 फीसदी थी।
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विस्तार
प्रदेश में परिवार नियोजन के मामले में ट्रेंड बदल रहा है। नसबंदी के प्रति पुरुषों का रुझान बढ़ रहा है। उनकी भागीदारी बढ़कर डेढ़ फीसदी से अधिक हो गई है। वर्ष 2020-21 में प्रदेश में कुल 2,90,899 नसबंदी हुई। इसमें पुरुषों की संख्या 1,987 थी यानी उनकी भागीदारी 0.68 फीसदी थी। वर्ष 2021-22 में 2,99,198 नसबंदी हुई, इनमें पुरुषों की संख्या बढ़कर 2,998 हो गई।
चालू सत्र में अब तक 18,457 नसबंदी हो चुके हैं, इनमें पुरुषों की संख्या 294 है। यह करीब 1.59 फीसदी है। इस तरह पिछले डेढ़ साल में पुरुषों की हिस्सेदारी लगभग एक फीसदी बढ़ी है। इससे स्वास्थ्य विभाग बेहद उत्साहित है। पहले 50 फीसदी से ज्यादा जिलों में पुरुष नसबंदी नाममात्र के होते थे, वहां भी इनकी संख्या में लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवार सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष नसबंदी के मामले में टॉप पांच जिलों में ललितपुर, महोबा, भदोही, महराजगंज और मिर्जापुर शामिल है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के मुताबिक एक हजार में से पांच नसबंदी विफल हो जाते हैं। प्रदेश में वर्ष 2020-21 में 255 नसबंदी विफल हो गई और चार लोगों की मौत हो गई। यह कुल नसबंदी की संख्या करीब 0.08 फीसदी है। इसी तरह वर्ष 2021-22 में 354 नसबंदी विफल हुई और दो लोगों की मौत हुई। यह कुल नसबंदी का करीब 0.11 फीसदी है।
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नसबंदी विफल होने पर मुआवजे का प्रावधान
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अश्वनी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत नसबंदी विफल होने पर मुआवजे का प्रावधान है। नसबंदी कई बार 5 से 10 साल बाद भी विफल होते हैं। ऐसे में तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना देनी चाहिए। यदि किसी महिला को नसबंदी के बाद गर्भधारण हो जाता है तो अस्पताल अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई जाती है।
नसबंदी के बाद सात दिन के अंदर मौत होने पर चार लाख रुपये, 8 से 30 दिन के अंदर मौत होने पर एक लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। इसी तरह 90 दिन के अंदर नसबंदी के विफल होने पर महिला व पुरुष को 60 हजार रुपये और किसी तरह की चिकित्सकीय जटिलता होने पर 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है।
नसबंदी से नहीं आती पुरुषों में कोई कमजोरी
स्वास्थ्य विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि नसबंदी से पुरुषों में कमजोरी आने की भ्रांति रहती है। धीरे-धीरे यह दूर हो रही है। पुरुष नसबंदी पूरी तरह से सुरक्षित है। इससे उनको कोई कमजोरी नहीं आती है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में संक्रमण का भी खतरा न के बराबर रहता है। नसबंदी के बाद पुरुष सभी तरह के काम कर सकता है।
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चालू सत्र में अब तक 18,457 नसबंदी हो चुके हैं, इनमें पुरुषों की संख्या 294 है। यह करीब 1.59 फीसदी है। इस तरह पिछले डेढ़ साल में पुरुषों की हिस्सेदारी लगभग एक फीसदी बढ़ी है। इससे स्वास्थ्य विभाग बेहद उत्साहित है। पहले 50 फीसदी से ज्यादा जिलों में पुरुष नसबंदी नाममात्र के होते थे, वहां भी इनकी संख्या में लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवार सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष नसबंदी के मामले में टॉप पांच जिलों में ललितपुर, महोबा, भदोही, महराजगंज और मिर्जापुर शामिल है।
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वहीं, स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के मुताबिक एक हजार में से पांच नसबंदी विफल हो जाते हैं। प्रदेश में वर्ष 2020-21 में 255 नसबंदी विफल हो गई और चार लोगों की मौत हो गई। यह कुल नसबंदी की संख्या करीब 0.08 फीसदी है। इसी तरह वर्ष 2021-22 में 354 नसबंदी विफल हुई और दो लोगों की मौत हुई। यह कुल नसबंदी का करीब 0.11 फीसदी है।
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नसबंदी विफल होने पर मुआवजे का प्रावधान
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अश्वनी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत नसबंदी विफल होने पर मुआवजे का प्रावधान है। नसबंदी कई बार 5 से 10 साल बाद भी विफल होते हैं। ऐसे में तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना देनी चाहिए। यदि किसी महिला को नसबंदी के बाद गर्भधारण हो जाता है तो अस्पताल अनचाहे गर्भ को गिराने के लिए चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई जाती है।
नसबंदी के बाद सात दिन के अंदर मौत होने पर चार लाख रुपये, 8 से 30 दिन के अंदर मौत होने पर एक लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। इसी तरह 90 दिन के अंदर नसबंदी के विफल होने पर महिला व पुरुष को 60 हजार रुपये और किसी तरह की चिकित्सकीय जटिलता होने पर 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है।
नसबंदी से नहीं आती पुरुषों में कोई कमजोरी
स्वास्थ्य विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. बद्री विशाल का कहना है कि नसबंदी से पुरुषों में कमजोरी आने की भ्रांति रहती है। धीरे-धीरे यह दूर हो रही है। पुरुष नसबंदी पूरी तरह से सुरक्षित है। इससे उनको कोई कमजोरी नहीं आती है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में संक्रमण का भी खतरा न के बराबर रहता है। नसबंदी के बाद पुरुष सभी तरह के काम कर सकता है।