{"_id":"2e612e17a1315d32b56546e7d243f0d6","slug":"fake-age-certificate-matter-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"उम्र का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर बच रहे जेल जाने से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उम्र का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर बच रहे जेल जाने से
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sat, 12 Oct 2013 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उम्र का फर्जी सर्टिफिकेट संगीन आरोपियों को भी जेल की सलाखों से बचा रहा है। वे इसी सर्टिफिकेट के सहारे जेलों के बजाय संप्रेक्षण गृहों में रौब गांठ रहे हैं।
विज्ञापन
प्रदेश के कई प्रमुख संप्रेक्षण गृहों में ऐसे ही दर्जनों बाल अपचारी हैं जो कई साल पहले 18 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। इनमें हत्या, लूट, डकैती व बलात्कार जैसे संगीन धाराओं के आरोपी भी शामिल हैं।
विज्ञापन
किशोर न्याय अधिनियम के तहत 18 साल से कम उम्र के कैदियों को जेल के बजाय संप्रेक्षण गृहों में रखने का प्रावधान है। इसी नियम का फायदा कई संगीन धाराओं के आरोपी भी उठा रहे हैं।
विज्ञापन
इनकी उम्र तो 24-25 साल हो गई है लेकिन फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे ये प्रदेश के विभिन्न संप्रेक्षण गृहों में मौज काट रहे हैं।
पढ़ें-यूपी: अखिलेश के लिए कोई नियम नहीं
एक तो अधिक उम्र, ऊपर से खतरनाक धाराओं के आरोपियों के यहां रहने से आए दिन संप्रेक्षण गृहों में मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में संप्रेक्षण गृहों में रहने वाले किशोर भी इनसे डरे-सहमे रहते हैं।
पिछले दिनों लखनऊ का संप्रेक्षण गृह भी इसी कारण से युद्ध का मैदान बना रहा। यहां पहले भी कई बार आपस में मारपीट व झगड़ा हो चुका है।
मेरठ के संप्रेक्षण गृह में ही 55 बाल अपचारियों की उम्र 18 वर्ष से ऊपर हो चुकी है। खुद महिला कल्याण निदेशालय ने मेरठ का मामला पकड़ा है।
जांच-पड़ताल में मेरठ केडीएम ने भी यहां 35 अपचारियों को 18 वर्ष से ऊपर माना है। लखनऊ व आगरा में भी ऐसे ही कई बाल अपचारी हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है।
महिला कल्याण निदेशालय ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य को पत्र लिखकर ऐसे आरोपियों को जेल भेजने की सिफारिश की है।
चूंकि जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट का जिम्मा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पास होता है, इसलिए निदेशालय ने प्राधिकरण से इन गंभीर आरोपियों को जेल भेजने को कहा गया है।
चंद कर्मियों के भरोसे गंभीर आरोपियों की सुरक्षा
संप्रेक्षण गृहों में गंभीर आरोपों के किशोरों को भी रखा जाता है। इनकी सुरक्षा चंद कर्मियों के ही भरोसे है। महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले इन संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा कुछ केयर टेकर व चतुर्थ श्रेणी कर्मी कर रहे हैं।
हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिला कल्याण विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 196 पद खाली हैं। इस कारण संप्रेक्षण गृहों में जरूरत से काफी कम कर्मी हैं।
लखनऊ की और खबरों के लिए देखें यहां