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Lucknow News: स्टेरॉयडयुक्त आई ड्रॉप से ग्लूकोमा का खतरा
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बगैर डॉक्टरी सलाह के आई ड्रॉप डालने की आदत आपको ग्लूकोमा जैसे गंभीर रोग की तरफ ले जाती है। ग्लूकोमा या काला मोतिया ऐसी बीमारी है, जिसमें आंखों की ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ने की वजह से देखने की क्षमता प्रभावित होती है। ध्यान न देने पर आंखों की रोशनी तक जा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार 60 साल के बाद इसका खतरा बढ़ता है। स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप और दवाओं की वजह से यह कम उम्र में भी हो सकता है। लोगों को ग्लूकोमा के प्रति जागरूक करने के लिए 12 से 18 मार्च के बीच ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है।
केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि इस बीमारी में अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और ना ही दर्द होता है। इसकी वजह से लोगों की इसके बारे में पता ही नहीं चल पाता है। काला मोतिया में हमारी आंखों की ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ता है, जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। आंखों की ऑप्टिक नर्व ही सूचनाएं और किसी चीज का चित्र मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। यदि ऑप्टिक नर्व और आंखों के अन्य भागों पर पड़ने वाले दबाव को कम न किया जाए तो आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है। इसके लिए कोई विशिष्ट कारण अभी तय नहीं है, लेकिन अगर किसी के परिवार में ग्लूकोमा का मरीज है तो फिर उसे 40 साल के बाद अपनी आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए। स्टेरॉयड ऐसा पदार्थ है, जिसकी वजह से आंखों की नर्व पर दबाव बढ़ता है। इसलिए बगैर विशेषज्ञ सलाह के आई ड्रॉप या फिर दवाएं नहीं लेनी चाहिए। आई ड्रॉप या फिर दवाओं में मौजूद स्ट्रेरॉयड से उनको नुकसान पहुंचता है। बीपी और डायबिटीज वाले मरीजों के मामले में भी ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है।
मोतियोबिंद के मुकाबले क्यों खतरनाक है ग्लूकोमा
डॉ. शर्मा के अनुसार मोतियाबिंद और ग्लूकोमा में बहुत बड़ा अंतर है। मोतियाबिंद में जहां ऑपरेशन करके आंखों की रोशनी वापस आ जाती है, वहीं ग्लूकोमा में एक बार आंख की रोशनी जाने के बाद उसे दोबारा नहीं पाया जा सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि आंखों की नियमित अंतराल पर जांच कराई जाए ताकि आंखों पर पड़ने वाले दबाव का कारण पता लगाकर तुरंत उचित उपचार कराया जा सके।
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व्यायाम से होता है फायदा
ग्लूकोमा की समस्या आंखों की नर्व पर दबाव पड़ने की वजह से होती है, इसलिए व्यायाम और जीवन शैली के माध्यम से इसके खतरे को भी कम किया जा सकता है।
इनसे बचने के लिए जरूरी है कि आंखों की नियमित रूप से जांच की जाए तथा खतरा मिलने पर सही उपचार हो। आमतौर पर दवाओं और सर्जरी के माध्यम से इसकी रोकथाम की जा सकती है।
लक्षण
आंखों और सिर में तेज दर्द होना।
नजर कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना।
आंखें लाल होना।
रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना।
जी मचलाना।
उल्टी होना।
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केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि इस बीमारी में अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और ना ही दर्द होता है। इसकी वजह से लोगों की इसके बारे में पता ही नहीं चल पाता है। काला मोतिया में हमारी आंखों की ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ता है, जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। आंखों की ऑप्टिक नर्व ही सूचनाएं और किसी चीज का चित्र मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। यदि ऑप्टिक नर्व और आंखों के अन्य भागों पर पड़ने वाले दबाव को कम न किया जाए तो आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है। इसके लिए कोई विशिष्ट कारण अभी तय नहीं है, लेकिन अगर किसी के परिवार में ग्लूकोमा का मरीज है तो फिर उसे 40 साल के बाद अपनी आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए। स्टेरॉयड ऐसा पदार्थ है, जिसकी वजह से आंखों की नर्व पर दबाव बढ़ता है। इसलिए बगैर विशेषज्ञ सलाह के आई ड्रॉप या फिर दवाएं नहीं लेनी चाहिए। आई ड्रॉप या फिर दवाओं में मौजूद स्ट्रेरॉयड से उनको नुकसान पहुंचता है। बीपी और डायबिटीज वाले मरीजों के मामले में भी ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है।
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मोतियोबिंद के मुकाबले क्यों खतरनाक है ग्लूकोमा
डॉ. शर्मा के अनुसार मोतियाबिंद और ग्लूकोमा में बहुत बड़ा अंतर है। मोतियाबिंद में जहां ऑपरेशन करके आंखों की रोशनी वापस आ जाती है, वहीं ग्लूकोमा में एक बार आंख की रोशनी जाने के बाद उसे दोबारा नहीं पाया जा सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि आंखों की नियमित अंतराल पर जांच कराई जाए ताकि आंखों पर पड़ने वाले दबाव का कारण पता लगाकर तुरंत उचित उपचार कराया जा सके।
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व्यायाम से होता है फायदा
ग्लूकोमा की समस्या आंखों की नर्व पर दबाव पड़ने की वजह से होती है, इसलिए व्यायाम और जीवन शैली के माध्यम से इसके खतरे को भी कम किया जा सकता है।
इनसे बचने के लिए जरूरी है कि आंखों की नियमित रूप से जांच की जाए तथा खतरा मिलने पर सही उपचार हो। आमतौर पर दवाओं और सर्जरी के माध्यम से इसकी रोकथाम की जा सकती है।
लक्षण
आंखों और सिर में तेज दर्द होना।
नजर कमजोर होना या धुंधला दिखाई देना।
आंखें लाल होना।
रोशनी के चारों ओर रंगीन छल्ले दिखाई देना।
जी मचलाना।
उल्टी होना।