मंत्री के ओएसडी के लिए अलग से कोच लगाने पर सोशल मीडिया पर उड़ी धज्जियां, होगी जांच
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पद्मावत एक्सप्रेस में केंद्रीय मंत्री के ओएसडी के लिए अतिरिक्त कोच लगाने के मामले में सोशल मीडिया पर रविवार को उत्तर रेलवे की जमकर फजीहत हुई। उधर रेलवे बोर्ड ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इससे जिम्मेदार रेलवे अधिकारियों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। हालांकि, उत्तर रेलवे अधिकारियों की दलील है कि एसी की कम्पोजिट अतिरिक्त बोगी छठ पूजा के लिए लगाई गई थी।
गत शनिवार रात एक केंद्रीय मंत्री के ओएसडी की पत्नी के लिए ट्रेन संख्या पद्मावत एक्सप्रेस में अतिरिक्त कोच लगा दिया गया। वर्तमान में मंत्री के ओएसडी लखनऊ में पासपोर्ट अधिकारी रह चुके हैं और उनकी पत्नी रेलवे में अधिकारी हैं।
अतिरिक्त कोच लगाए जाने से एक ओर जहां ट्रेन बेवजह घंटेभर की देरी से चली, वहीं वेटिंग के यात्रियों को भी सीट नहीं मिलने से हड़कम्प मच गया था। दरअसल, ओएसडी का टिकट कन्फर्म नहीं होने पर दिल्ली से अतिरिक्त बोगी लगाने के निर्देश दिए गए थे।
रविवार को मीडिया और सोशल मीडिया में रेलवे की फजीहत शुरू होते ही रेलवे बोर्ड को हस्तक्षेप करना पड़ा। अंतत: मामले की जांच के आदेश दे दिए गए। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि इंक्वायरी के बाद ही प्रकरण पर कुछ कहा जा सकता है। हालांकि, अतिरिक्त कोच लगाने के मार्फत सटीक जवाब रेलवे अधिकारियों को नहीं सूझ रहा है।
अधिकारियों की दलील, रेलवे ने कमाए 28 हजार
उत्तर रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बोगी केंद्रीय मंत्री के ओएसडी के लिए नहीं लगाई गई थी। इसे सप्लाई कोच के रूप में दिल्ली भेजा जा रहा था। जहां से इसे छठ पूजा के यात्रियों के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
बोगी से ओएसडी के अतिरिक्त करीब 25 यात्रियों ने सफर किया है, जिससे रेलवे को 27,660 रुपये कमाए हैं। आगे बताया कि पद्मावत एक्सप्रेस में रविवार को भी तीन अतिरिक्त बोगियां लगाई गईं, जिससे वेटिंग के यात्रियों को राहत मिली।
डीआरएम ने साधी चुप्पी
उत्तर रेलवे अधिकारियों की कारस्तानी से रेल मंत्रालय व केंद्र की भाजपा सरकार की जमकर फजीहत हुई है। दिल्ली से किस अधिकारी ने उत्तर रेलवे मंडल में फोन कर कोच के लिए निर्देश दिए और कोच में वेटिंग केयात्रियों को क्यों नहीं बिठाया गया? इन सवालों के जवाब डीआरएम सतीश कुमार देने से कतरा रहे हैं। पर, सूत्रों की मानें तो अतिरिक्त कोच लगाने पर ऑपरेटिंग, इंजीनियरिंग व कॉमर्शियल विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है, जिन पर कार्रवाई हो सकती है।
सोशल मीडिया पर फजीहत : रेलवे की दोहरी मानसिकता
सोशल मीडिया पर मामले को लेकर संदीप पाठक ने ट्वीट किया कि रेलवे की दोहरी मानसिकता उजागर हो गई है। एक ओर चेयरमैन रेलवे बोर्ड वीआईपी कल्चर खत्म करने की बातें करते हैं। अधिकारियों को स्लीपर में सफर करने के निर्देश देते हैं।
दूसरी ओर उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन मंत्री के ओएसडी के एक्स्ट्रा कोच लगाने में गुरेज नहीं करता। वहीं अभिनव सिंह ने ट्वीट किया कि उत्तर रेलवे को यात्रियों की लम्बी वेटिंग नहीं दिखती। पर, अधिकारियों का कोटा न लगे तो उनके लिए बोगी लगवा देते हैं।
इसे भी जानें : ऐसे लगता है अतिरिक्त कोच
ट्रेनों में अतिरिक्त बोगी लगाने के नियमों के बारे में एक रेलवे अधिकारी बताते हैं कि जब यात्रियों की वेटिंग लिस्ट लम्बी हो जाती है तो अतिरिक्त बोगी लगाई जाती है। इसके लिए मंडल अधिकारियों को मुख्यालय से मांग करनी होती है। मांग स्वीकृत होने पर अतिरिक्त कोच लगाया जाता है। इसकी फिटनेस जांच नियम से होती है। आम तौर पर त्योहारी सीजन में ही एक्स्ट्रा कोच लगाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त जब बोर्ड अधिकारियों, जीएम व उनके स्तर के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता है तो रेलवे उन्हें सैलून की सुविधा देती है, इसका इस्तेमाल यात्री नहीं कर सकते।
अभी तक नहीं मिला इन सवालों का जवाब
- रेलवे अधिकारियों ने दलील है कि छठ पूजा के लिए कोच को सप्लाई कोच के रूप में दिल्ली भेजा जा रहा था, जो बंद था। अब सवाल यह है कि जब कोच यात्रियों के लिए नहीं था तो ओएसडी के लिए कैसे खोल दिया गया?
- दूसरे, उनकी अगवानी के लिए रेलवे अधिकारियों को चारबाग स्टेशन पर क्यों तैनात किया गया?
- तीसरे, कोच की फिटनेस जांच के बारे में भी कोई अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं।
- चौथे, गर कोच लगाया जाना था और उसका इस्तेमाल भी होना था तो वेटिंग के आम यात्रियों को इसका लाभ क्यों नहीं दिया गया?