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Lucknow News: हर तीसरी महिला मोटापे और छठी कुपोषण का शिकार
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सचिन त्रिपाठी
लखनऊ। महिलाओं में मोटापा और कम वजन दोनों बड़ी समस्या बन रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार लखनऊ में हर तीसरी महिला ज्यादा वजन या मोटापे की शिकार है। वहीं हर छठी महिला कुपोषण की चपेट में है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार लखनऊ में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 37.8 प्रतिशत महिलाएं सामान्य से ज्यादा या मोटापे की श्रेणी में हैं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 34.8 प्रतिशत था। इस लिहाज से महिलाओं में मोटापे की समस्या करीब 10 फीसदी बढ़ी है। वहीं 17.7 प्रतिशत महिलाएं अभी भी सामान्य से कम बॉडी मास इंडेक्स यानी कम वजन की श्रेणी में हैं। पांच साल पहले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 15.7 प्रतिशत था।
खानपान और खराब जीवनशैली बड़ी वजह
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी. हिमांशु के मुताबिक, महिलाओं में बढ़ते वजन की प्रमुख वजह खानपान और बदलती जीवनशैली है। पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट फूड का चलन बढ़ा है। वहीं शारीरिक गतिविधियां और व्यायाम कम हुआ है। इससे एक ओर मोटापा बढ़ रहा है तो दूसरी ओर संतुलित पोषण की कमी से कम वजन की समस्या भी बनी हुई है। उन्होंने पौष्टिक भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाने की सलाह दी।
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गांव के मुकाबले शहर के डेढ़ गुना पुरुषों में मोटापा
ज्यादा वजन या फिर मोटापे की समस्या सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। पुरुषों में भी मोटापे की समस्या है। रिपोर्ट के अनुसार 15 से 49 वर्ष आयु के 21.8 फीसदी पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं। शहरी पुरुषों में यह आंकड़ा 29.4 फीसदी है, जबकि ग्रामीण पुरुषों में 19.1 फीसदी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में प्रदेश के पुरुषों में यह आंकड़ा 18.5 फीसदी था।
मोटापे की वजह से हो सकती हैं ये समस्याएं
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, फैटी लिवर, जोड़ों का दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस), खर्राटा और सोते समय सांस बार-बार रुकने की समस्या, पित्ताशय की पथरी, मानसिक तनाव और डिप्रेशन, कैंसर का जोखिम।
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लखनऊ। महिलाओं में मोटापा और कम वजन दोनों बड़ी समस्या बन रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार लखनऊ में हर तीसरी महिला ज्यादा वजन या मोटापे की शिकार है। वहीं हर छठी महिला कुपोषण की चपेट में है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार लखनऊ में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 37.8 प्रतिशत महिलाएं सामान्य से ज्यादा या मोटापे की श्रेणी में हैं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 34.8 प्रतिशत था। इस लिहाज से महिलाओं में मोटापे की समस्या करीब 10 फीसदी बढ़ी है। वहीं 17.7 प्रतिशत महिलाएं अभी भी सामान्य से कम बॉडी मास इंडेक्स यानी कम वजन की श्रेणी में हैं। पांच साल पहले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 15.7 प्रतिशत था।
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खानपान और खराब जीवनशैली बड़ी वजह
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी. हिमांशु के मुताबिक, महिलाओं में बढ़ते वजन की प्रमुख वजह खानपान और बदलती जीवनशैली है। पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट फूड का चलन बढ़ा है। वहीं शारीरिक गतिविधियां और व्यायाम कम हुआ है। इससे एक ओर मोटापा बढ़ रहा है तो दूसरी ओर संतुलित पोषण की कमी से कम वजन की समस्या भी बनी हुई है। उन्होंने पौष्टिक भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाने की सलाह दी।
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गांव के मुकाबले शहर के डेढ़ गुना पुरुषों में मोटापा
ज्यादा वजन या फिर मोटापे की समस्या सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। पुरुषों में भी मोटापे की समस्या है। रिपोर्ट के अनुसार 15 से 49 वर्ष आयु के 21.8 फीसदी पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं। शहरी पुरुषों में यह आंकड़ा 29.4 फीसदी है, जबकि ग्रामीण पुरुषों में 19.1 फीसदी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में प्रदेश के पुरुषों में यह आंकड़ा 18.5 फीसदी था।
मोटापे की वजह से हो सकती हैं ये समस्याएं
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, फैटी लिवर, जोड़ों का दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस), खर्राटा और सोते समय सांस बार-बार रुकने की समस्या, पित्ताशय की पथरी, मानसिक तनाव और डिप्रेशन, कैंसर का जोखिम।