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बुलंदशहर हिंसा मामले में 44 आरोपियों पर चलेगा राजद्रोह का मुकदमा
Sat, 29 Jun 2019 12:14 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 29 Jun 2019 12:14 AM IST
सार
- जांच रिपोर्ट व साक्ष्यों के आधार पर गृह विभाग ने दी मंजूरी
- स्याना ने गोमांस मिलने पर हुआ था जमकर पथराव, आगजनी व हिंसा
- गोलीबारी में इंस्पेक्टर सुबोध सिंह और युवक सुमित की हो गई थी मौत
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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विस्तार
पिछले साल गोकशी की आशंका में बुलंदशहर में हुई हिंसा की घटना में शामिल 44 आरोपियों पर राजद्रोह का मुकदमा चलेगा। स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग ने सभी आरोपियों पर राजद्रोह की धारा में मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दे दी है। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बुलंदशहर पुलिस की रिपोर्ट को देखते हुए सरकार ने यह मंजूरी दी है।
बता दें कि 3 दिसंबर-2018 को बुलंदशहर के स्याना में गोकशी की सूचना मिलने पर भीड़ उग्र हो गई थी। लोग गोवंश के अवशेष लेकर चिंगरावठी पुलिस चौकी पर पहुंच गए थे और जमकर पथराव भी किया था। भीड़ इतनी उग्र हो गई थी कि वहां पर पथराव के साथ ही आगजनी भी कर दी गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इंसपेक्टर सुबोध सिंह ने जब मोर्चा संभाला तो उग्र भीड़ के बीच से ही कुछ लोगों ने इंसपेक्टर को गोली से मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसके अलावा भीड़ में शामिल एक सुमित नाम के एक युवक की भी गोली लगने से मौत हो गई थी।
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बता दें कि 3 दिसंबर-2018 को बुलंदशहर के स्याना में गोकशी की सूचना मिलने पर भीड़ उग्र हो गई थी। लोग गोवंश के अवशेष लेकर चिंगरावठी पुलिस चौकी पर पहुंच गए थे और जमकर पथराव भी किया था। भीड़ इतनी उग्र हो गई थी कि वहां पर पथराव के साथ ही आगजनी भी कर दी गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इंसपेक्टर सुबोध सिंह ने जब मोर्चा संभाला तो उग्र भीड़ के बीच से ही कुछ लोगों ने इंसपेक्टर को गोली से मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इसके अलावा भीड़ में शामिल एक सुमित नाम के एक युवक की भी गोली लगने से मौत हो गई थी।
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गोवंश का अवशेष मिलने के बाद उग्र भीड़ द्वारा पथराव, आगजनी व फायरिंग किए जाने और इंसपेक्टर समेत एक युवक की मौत के बाद स्याना क्षेत्र में कई दिनों तक तनाव का माहौल बना रहा। इस मामले में बुलंदशहर पुलिस ने अलग- अलग दो मामले दर्ज किए थे, जिसमें से एक मामला हिंसा, आगजनी व पथराव और इंस्पेक्टर व युवक की मौत का था जबकि दूसरा मामला गोकशी के संबंध में दर्ज किया गया था। गोकशी का मुकदमा बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज की ओर से दर्ज कराया गया था।
मुकदमा दर्ज कराने के बाद मामले की जांच राघवेंद्र मिश्रा को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच के आधार पर ही जांच अधिकारी ने 44 लोगों को आरोपी बनाते हुए उनपर राजद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति सरकार से मांगी थी। जांच रिपोर्ट के तथ्यों व साक्ष्यों को देखते हुए ही गृह विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ राजद्रोह की धारा के तहत मुकदमा दर्ज करने को मंजूरी दे दी है।
मुकदमा दर्ज कराने के बाद मामले की जांच राघवेंद्र मिश्रा को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच के आधार पर ही जांच अधिकारी ने 44 लोगों को आरोपी बनाते हुए उनपर राजद्रोह का मुकदमा चलाने की अनुमति सरकार से मांगी थी। जांच रिपोर्ट के तथ्यों व साक्ष्यों को देखते हुए ही गृह विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ राजद्रोह की धारा के तहत मुकदमा दर्ज करने को मंजूरी दे दी है।