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सभी जिलों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करें : योगी
Fri, 07 May 2021 02:32 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 07 May 2021 02:32 PM IST
सार
कोविड-19 प्रबंधन के लिए गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कोविड-19 प्रबंधन के लिए गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। मीटिंग में बताया गया मई को दिन पहले 1032 मीट्रिक टन का वितरण किया गया। इसमें केवल रीफलर के माध्यम से ही 612 एमटी की आपूर्ति प्रदेश में की गई।
वाराणसी में जल्द क्रियाशील हो रहे डीआरडीओ के कोविड अस्पताल को ट्रायल के लिए 10 एमटी ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई। इनकी अन्य आवश्यकताओं की भी पूर्ति की जाए। कल तक जामनगर (गुजरात) से 80 टन ऑक्सीजन के प्रदेश में और जायेगा। दो ऑक्सीजन एक्सप्रेस आज रात्रि तक और आ रही हैं। एसीएस होम स्तर से सभी जिलों की जरूरत को देखते हुए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। ऑक्सिजन वेस्टेज को न्यून्तम रखने और आपूर्ति बढाने के लिये सभी जरूरी प्रयास किए जाएं।
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वाराणसी में जल्द क्रियाशील हो रहे डीआरडीओ के कोविड अस्पताल को ट्रायल के लिए 10 एमटी ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई। इनकी अन्य आवश्यकताओं की भी पूर्ति की जाए। कल तक जामनगर (गुजरात) से 80 टन ऑक्सीजन के प्रदेश में और जायेगा। दो ऑक्सीजन एक्सप्रेस आज रात्रि तक और आ रही हैं। एसीएस होम स्तर से सभी जिलों की जरूरत को देखते हुए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। ऑक्सिजन वेस्टेज को न्यून्तम रखने और आपूर्ति बढाने के लिये सभी जरूरी प्रयास किए जाएं।
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कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश
- कोविड संक्रमण की रोकथाम के लिए ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट' की रणनीति के साथ-साथ प्रदेशवासियों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर प्रदान करने की रणनीति के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। बीते 30 अप्रैल को कुल 03 लाख 10 हजार केस एक्टिव थे। आज एक सप्ताह की अवधि में 55,000 एक्टिव केस कम हुए हैं। 24 अप्रैल को सर्वाधिक 38 हजार पॉजिटिव केस आये थे, तब से नए केस में लगातार गिरावट आ रही है। साथ ही, स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। रिकवरी दर बेहतर होता जा रहा है।
- विगत 24 घंटे में 2,41,403 कोविड टेस्ट किए गए हैं। इसी अवधि में 28,076 नए पॉजिटिव केस की पुष्टि हुई है, जबकि 33,117 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। वर्तमान में 2,54,118 कुल एक्टिव केस हैं। इनमें 1,98,857 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं।
- वैक्सीनेशन की प्रक्रिया प्रदेश में तेजी से चल रही है। अब तक 01 करोड़ 34 लाख 30 हजार से अधिक डोज लगाए जा चुके हैं। अधिक संक्रमण दर वाले सात जिलों में 18-44 आयु वर्ग के 85,566 लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है। यह अच्छा है कि इस आयु वर्ग में वैक्सीन वेस्टेज घटकर 0.11% रह गया है। इसे शून्य तक लाने की आवश्यकता है।
- आगामी सोमवार से 11 और जिलों में 18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण अभियान का शुभारंभ होगा। सम्बंधित प्रभारी मंत्री/स्थानीय जनप्रतिनिधि किसी न किसी टीकाकरण केंद्र पर उपस्थित रहें। लोगों का उत्साहवर्धन के लिए जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सहायक होगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री के स्तर से वैक्सीन निर्माता कंपनियों से सतत संपर्क बनाये रखा जाए।
- प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार कोरोना संक्रमित अथवा लक्षण वाले लोग अभी टीकाकरण न कराएं। इसी प्रकार स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कोविड संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ होने के न्यूनतम एक माह बाद ही वैक्सीनेशन कराना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी इन महत्वपूर्ण जानकारियों से लोगों को जागरूक किया जाए।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि टीकाकरण केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन हो। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन से अव्यवस्था हो सकती है। अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को ही लागू रखना उचित होगा। जिनकी बारी है उनसे यथासंभव एक-दो दिन पूर्व फोन से संपर्क कर लिया जाना उचित होगा।
- संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए गांव-गांव टेस्टिंग का महा अभियान चल रहा है। लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं। निगरानी समितियां घर-घर जाएं, स्क्रीनिंग करें, होम आइसोलेशन के मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध कराएं। लक्षणयुक्त लोगों के बारे में आरआरटी को सूचना देकर उनका एंटीजन टेस्ट कराया जाए। डीएम और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि टेस्ट की यह प्रक्रिया गांव में ही हो। सीएचसी/पीएचसी पर जाने की कोई अवश्यकता नहीं है। आरआरटी की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। कांटेक्ट ट्रेसिंग और बेहतर करने की जरूरत है।
- होम आइसोलेशन में उपचाराधीन लोगों को समय से मेडिकल किट जरूर दी जाए।मुख्य सचिव कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी समीक्षा की जाए। निगरानी समितियां जिन लोगों को मेडिकल किट दें उनका विवरण आईसीसीसी को उपलब्ध कराएं। आईसीसीसी इसका सत्यापन करे। इसके बाद सीएम हेल्पलाइन से इसका पुनरसत्यापन किया जाए।
- होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों से हर दिन संवाद किया जाए। टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से चिकित्सक उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दें तो जनपदीय आईसीसीसी से भी बात की जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय से भी अधिकाधिक मरीजों से फोन कर उनका हाल-चाल लिया जाए। उन्हें मेडिकल किट, टेलीकन्सल्टेशन आदि सुविधाओं की उपलब्धता की सत्यता की परख करें।
- कतिपय जनपदों में सीएमओ आदि स्वास्थ्य सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के संक्रमित होने की जानकारी आई है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे जिलों में तत्काल नवीन तैनाती की जाए।
- प्रदेश में अंतरराज्यीय बस परिवहन को स्थगित किया गया है। निजी परिवहन ऑपरेटर आधी क्षमता के साथ ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ही संचालित हो सकेंगे। परिवहन विभाग इस व्यवस्था को सख्ती से लागू कराए।
- मरीजों को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध हों। सभी जिलों में एम्बुलेंस उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त प्रबंध भी किया जाए। निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाने ढंग से किराया वसूलने की घटनाएं संज्ञान में आई हैं। शासन स्तर से आज ही निजी एम्बुलेंस के लिए किराया दर तय करते हुए इसे प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।
- सभी सरकारी एवं निजी कार्यालयों में बीमार, दिव्यांग कर्मचारी और गर्भवती महिला कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा दी जाए। इन्हें कार्यालय आने की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसी प्रकार, सभी सरकारी कार्यालयों में 50% कार्मिक क्षमता से ही कार्य लिया जाए। एक समय मे एक तिहाई से अधिक कर्मचारी कतई उपस्थित न रहें। इस व्यवस्था को तत्काल प्रभावी बनाया जाए।
- राज्य सरकार के अधिकारी/कर्मचारी शासन द्वारा अनुमन्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नियमों के अंतर्गत ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की खरीद कर सकते हैं। कर्मचारियों को इससे बड़ी सहूलियत होगी। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएं।
- वर्तमान में 89 टैंकर ऑक्सीजन से सम्बंधित कार्य में क्रियाशील हैं। भारत सरकार ने प्रदेश को 400 मीट्रिक टन के टैंकर दिए हैं। रिलायंस और अडानी जैसे निजी औद्योगिक समूहों की ओर से टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं। ऑक्सीजन के संबंध में टैंकरों की संख्या और बढ़ाये जाने की जरूरत है। क्रायोजेनिक टैंकरों के संबंध में ग्लोबल टेंडर जारी करने की कार्यवाही कल तक पूरी कर ली जाए।
- होम आइसोलेशन और नॉन कोविड मरीजों को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति आवश्यकतानुसार सुनिश्चित कराई जाए। कई जिलों ने इस दिशा में अच्छा काम किया है। ऐसे ही सभी जिलों में होम आइसोलेशन के मरीजों को ऑन डिमांड ऑक्सीजन की आपूर्ति की व्यवस्था कराई जाए। इसके लिए एक सिस्टम तैयार करें।
- विभिन्न जनपदों में कतिपय निजी अस्पतालों द्वारा बेड, ऑक्सीजन आदि का कृत्रिम अभाव पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ निजी अस्पतालों में शासन द्वारा तय शुल्क दर से कई गुना अधिक की वसूली करने की घटनाओं की जानकारी मिली है। यह कतई उचित नहीं है। इस प्रकार की गतिविधियां आपराधिक हैं। कुछ जिलों में इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। सभी डीएम/सीएमओ ऐसे अस्पतालों पर नजर रखें और सख्ती के साथ यथोचित कार्रवाई करें। मरीज और उसके परिजन का किसी भी प्रकार उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- शासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी कई कोविड अस्पताल न तो मरीज के परिजन को उनके मरीज के स्वास्थ्य की दैनिक जानकारी दे रहे हैं और न ही खाली बेड्स की संख्या सार्वजनिक कर रहे। डीएम/सीएमओ ऐसे अस्पतालों से वार्ता कर व्यवस्था ठीक कराएं अन्यथा की दशा में कार्रवाई सुनिश्चित करें। चिकित्सा शिक्षा मंत्री स्तर से ऐसे अस्पतालों की निगरानी की जाए। एल-01 एल-02 एल-03 बेड्स की जनपदवार समीक्षा की जाए।
- आगरा में भारतीय सेना की मदद से एल-2 श्रेणी का 500 बेड का कोविड अस्पताल तैयार किया जा रहा है। एसजीपीजीआई, केजीएमयू में बेड विस्तार की कार्यवाही हो रही है। हमें मिशन मोड में कार्य करते हुए बेड की वर्तमान क्षमता को दोगुना करने की जरूरत है। सभी जिलों में इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए।
- सभी जिलों में आईसीसीसी में फोन लाइन्स बढ़ाई जाए। न्यूनतम 10 फोन लाइन हर जिले में हो। तीन शिफ्ट में काम हो। एडमिशन, आइसोलेशन मरीजों से संवाद आदि कार्यों के लिए अलग-अलग फोन लाइन होनी चाहिए। स्वास्थ्य राज्य मंत्री स्तर से इसकी दैनिक मॉनीटरिंग की जाए।
- ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य की जरूरतों के दृष्टिगत प्रदेश के सभी जिलों में ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। भारत सरकार, राज्य सरकार और निजी क्षेत्र द्वारा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। विभिन्न पीएसयू भी अपने स्तर पर प्लांट स्थापित करा रही हैं। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग और आबकारी विभाग द्वारा ऑक्सीजन जेनरेशन की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। एमएसएमई इकाइयों की ओर से भी सहयोग मिल रहा है। यह सभी कार्य यथासंभव तेजी से पूरे किए जाएं। इनकी हर दिन समीक्षा होनी चाहिए।
- सीएचसी स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों में वेंटिलेटर की सुविधा दी गई है। यह सभी क्रियाशील रहें, इसे सुनिश्चित करें। जिलों की जरूरतों के अनुसार और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदें जाएं। निजी औद्योगिक/वाणिज्यिक कंपनियों से हमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का सहयोग प्राप्त हो रहा है।
- एक्सप्रेस-वे, हाई-वे, मेडिकल कॉलेज सहित निर्माण की सभी बड़ी परियोजनाएं सतत जारी रहें। यह समयबद्ध रूप से पूरी हों। जिन परियोजनाओं में न्यूनतम 50 लोग तक कार्यरत हों, वहां कोविड केयर सेंटर स्थापित कराया जाए। पुलिस लाइंस में भी कोविड केयर सेंटर की स्थापना की कार्यवाही की जाए।
- प्रदेश में आंशिक कोरोना कर्फ्यू को प्रभावी रूप से लागू करें। दूध/दवा आदि के लिए आवागमन कर रहे लोगों का पुलिस सहयोग करे। ठेला-रिक्शा चालकों आदि जरूरतममंदों के लिए सामुदायिक भोजनालय का संचालन किया जाए। क्वारन्टीन सेंटरों में भोजन की समुचित व्यवस्था कराई जाए। राशन वितरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हों।
- बड़ी औद्योगिक इकाइयों में कोविड केयर सेंटर स्थापित कराए जाएं। वर्तमान में 544 उद्योगों में साढ़े 08 सौ से अधिक बेड की क्षमता के साथ को कोविड केयर सेंटर क्रियाशील हैं। इसे अन्य उद्योगों में भी विस्तार दिया जाए।
- विशेषज्ञों के आकलन के दृष्टिगत हमें सभी तरह की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। ऐसे में बेड, मैनपॉवर, चिकित्सकीय उपकरण, ऑक्सीजन और दवाओं की उपलब्धता वर्तमान क्षमता के सापेक्ष न्यूनतम दोगुना करने की कार्यवाही तेज हो। प्राथमिकता वाले इन कार्यों के लिए सचिव स्तर के अलग-अलग अधिकारियों को नामित किया जाए। किसी भी जिले में इनका कोई अभाव न हो। इस संबंध में मिशन मोड में कार्य करने की जरूरत है।
- विगत 24 घंटे में 2,41,403 कोविड टेस्ट किए गए हैं। इसी अवधि में 28,076 नए पॉजिटिव केस की पुष्टि हुई है, जबकि 33,117 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। वर्तमान में 2,54,118 कुल एक्टिव केस हैं। इनमें 1,98,857 लोग होम आइसोलेशन में उपचाराधीन हैं।
- वैक्सीनेशन की प्रक्रिया प्रदेश में तेजी से चल रही है। अब तक 01 करोड़ 34 लाख 30 हजार से अधिक डोज लगाए जा चुके हैं। अधिक संक्रमण दर वाले सात जिलों में 18-44 आयु वर्ग के 85,566 लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है। यह अच्छा है कि इस आयु वर्ग में वैक्सीन वेस्टेज घटकर 0.11% रह गया है। इसे शून्य तक लाने की आवश्यकता है।
- आगामी सोमवार से 11 और जिलों में 18-44 आयु वर्ग के टीकाकरण अभियान का शुभारंभ होगा। सम्बंधित प्रभारी मंत्री/स्थानीय जनप्रतिनिधि किसी न किसी टीकाकरण केंद्र पर उपस्थित रहें। लोगों का उत्साहवर्धन के लिए जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सहायक होगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री के स्तर से वैक्सीन निर्माता कंपनियों से सतत संपर्क बनाये रखा जाए।
- प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को टीकाकरण का सुरक्षा कवर निःशुल्क उपलब्ध करा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार कोरोना संक्रमित अथवा लक्षण वाले लोग अभी टीकाकरण न कराएं। इसी प्रकार स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कोविड संक्रमित व्यक्ति को स्वस्थ होने के न्यूनतम एक माह बाद ही वैक्सीनेशन कराना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी इन महत्वपूर्ण जानकारियों से लोगों को जागरूक किया जाए।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि टीकाकरण केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन हो। ऑन-द-स्पॉट पंजीयन से अव्यवस्था हो सकती है। अनावश्यक भीड़ न हो, इसके लिए ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को ही लागू रखना उचित होगा। जिनकी बारी है उनसे यथासंभव एक-दो दिन पूर्व फोन से संपर्क कर लिया जाना उचित होगा।
- संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए गांव-गांव टेस्टिंग का महा अभियान चल रहा है। लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं। निगरानी समितियां घर-घर जाएं, स्क्रीनिंग करें, होम आइसोलेशन के मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध कराएं। लक्षणयुक्त लोगों के बारे में आरआरटी को सूचना देकर उनका एंटीजन टेस्ट कराया जाए। डीएम और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि टेस्ट की यह प्रक्रिया गांव में ही हो। सीएचसी/पीएचसी पर जाने की कोई अवश्यकता नहीं है। आरआरटी की संख्या में तीन से चार गुना बढ़ोतरी के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। कांटेक्ट ट्रेसिंग और बेहतर करने की जरूरत है।
- होम आइसोलेशन में उपचाराधीन लोगों को समय से मेडिकल किट जरूर दी जाए।मुख्य सचिव कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी समीक्षा की जाए। निगरानी समितियां जिन लोगों को मेडिकल किट दें उनका विवरण आईसीसीसी को उपलब्ध कराएं। आईसीसीसी इसका सत्यापन करे। इसके बाद सीएम हेल्पलाइन से इसका पुनरसत्यापन किया जाए।
- होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों से हर दिन संवाद किया जाए। टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से चिकित्सक उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दें तो जनपदीय आईसीसीसी से भी बात की जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री कार्यालय से भी अधिकाधिक मरीजों से फोन कर उनका हाल-चाल लिया जाए। उन्हें मेडिकल किट, टेलीकन्सल्टेशन आदि सुविधाओं की उपलब्धता की सत्यता की परख करें।
- कतिपय जनपदों में सीएमओ आदि स्वास्थ्य सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के संक्रमित होने की जानकारी आई है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे जिलों में तत्काल नवीन तैनाती की जाए।
- प्रदेश में अंतरराज्यीय बस परिवहन को स्थगित किया गया है। निजी परिवहन ऑपरेटर आधी क्षमता के साथ ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ही संचालित हो सकेंगे। परिवहन विभाग इस व्यवस्था को सख्ती से लागू कराए।
- मरीजों को जरूरत पर तत्काल एम्बुलेंस उपलब्ध हों। सभी जिलों में एम्बुलेंस उपलब्ध कराए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त प्रबंध भी किया जाए। निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाने ढंग से किराया वसूलने की घटनाएं संज्ञान में आई हैं। शासन स्तर से आज ही निजी एम्बुलेंस के लिए किराया दर तय करते हुए इसे प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।
- सभी सरकारी एवं निजी कार्यालयों में बीमार, दिव्यांग कर्मचारी और गर्भवती महिला कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा दी जाए। इन्हें कार्यालय आने की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसी प्रकार, सभी सरकारी कार्यालयों में 50% कार्मिक क्षमता से ही कार्य लिया जाए। एक समय मे एक तिहाई से अधिक कर्मचारी कतई उपस्थित न रहें। इस व्यवस्था को तत्काल प्रभावी बनाया जाए।
- राज्य सरकार के अधिकारी/कर्मचारी शासन द्वारा अनुमन्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नियमों के अंतर्गत ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की खरीद कर सकते हैं। कर्मचारियों को इससे बड़ी सहूलियत होगी। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएं।
- वर्तमान में 89 टैंकर ऑक्सीजन से सम्बंधित कार्य में क्रियाशील हैं। भारत सरकार ने प्रदेश को 400 मीट्रिक टन के टैंकर दिए हैं। रिलायंस और अडानी जैसे निजी औद्योगिक समूहों की ओर से टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं। ऑक्सीजन के संबंध में टैंकरों की संख्या और बढ़ाये जाने की जरूरत है। क्रायोजेनिक टैंकरों के संबंध में ग्लोबल टेंडर जारी करने की कार्यवाही कल तक पूरी कर ली जाए।
- होम आइसोलेशन और नॉन कोविड मरीजों को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति आवश्यकतानुसार सुनिश्चित कराई जाए। कई जिलों ने इस दिशा में अच्छा काम किया है। ऐसे ही सभी जिलों में होम आइसोलेशन के मरीजों को ऑन डिमांड ऑक्सीजन की आपूर्ति की व्यवस्था कराई जाए। इसके लिए एक सिस्टम तैयार करें।
- विभिन्न जनपदों में कतिपय निजी अस्पतालों द्वारा बेड, ऑक्सीजन आदि का कृत्रिम अभाव पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ निजी अस्पतालों में शासन द्वारा तय शुल्क दर से कई गुना अधिक की वसूली करने की घटनाओं की जानकारी मिली है। यह कतई उचित नहीं है। इस प्रकार की गतिविधियां आपराधिक हैं। कुछ जिलों में इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। सभी डीएम/सीएमओ ऐसे अस्पतालों पर नजर रखें और सख्ती के साथ यथोचित कार्रवाई करें। मरीज और उसके परिजन का किसी भी प्रकार उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- शासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी कई कोविड अस्पताल न तो मरीज के परिजन को उनके मरीज के स्वास्थ्य की दैनिक जानकारी दे रहे हैं और न ही खाली बेड्स की संख्या सार्वजनिक कर रहे। डीएम/सीएमओ ऐसे अस्पतालों से वार्ता कर व्यवस्था ठीक कराएं अन्यथा की दशा में कार्रवाई सुनिश्चित करें। चिकित्सा शिक्षा मंत्री स्तर से ऐसे अस्पतालों की निगरानी की जाए। एल-01 एल-02 एल-03 बेड्स की जनपदवार समीक्षा की जाए।
- आगरा में भारतीय सेना की मदद से एल-2 श्रेणी का 500 बेड का कोविड अस्पताल तैयार किया जा रहा है। एसजीपीजीआई, केजीएमयू में बेड विस्तार की कार्यवाही हो रही है। हमें मिशन मोड में कार्य करते हुए बेड की वर्तमान क्षमता को दोगुना करने की जरूरत है। सभी जिलों में इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए।
- सभी जिलों में आईसीसीसी में फोन लाइन्स बढ़ाई जाए। न्यूनतम 10 फोन लाइन हर जिले में हो। तीन शिफ्ट में काम हो। एडमिशन, आइसोलेशन मरीजों से संवाद आदि कार्यों के लिए अलग-अलग फोन लाइन होनी चाहिए। स्वास्थ्य राज्य मंत्री स्तर से इसकी दैनिक मॉनीटरिंग की जाए।
- ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य की जरूरतों के दृष्टिगत प्रदेश के सभी जिलों में ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। भारत सरकार, राज्य सरकार और निजी क्षेत्र द्वारा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। विभिन्न पीएसयू भी अपने स्तर पर प्लांट स्थापित करा रही हैं। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग और आबकारी विभाग द्वारा ऑक्सीजन जेनरेशन की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। एमएसएमई इकाइयों की ओर से भी सहयोग मिल रहा है। यह सभी कार्य यथासंभव तेजी से पूरे किए जाएं। इनकी हर दिन समीक्षा होनी चाहिए।
- सीएचसी स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं। सभी जिलों में वेंटिलेटर की सुविधा दी गई है। यह सभी क्रियाशील रहें, इसे सुनिश्चित करें। जिलों की जरूरतों के अनुसार और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदें जाएं। निजी औद्योगिक/वाणिज्यिक कंपनियों से हमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का सहयोग प्राप्त हो रहा है।
- एक्सप्रेस-वे, हाई-वे, मेडिकल कॉलेज सहित निर्माण की सभी बड़ी परियोजनाएं सतत जारी रहें। यह समयबद्ध रूप से पूरी हों। जिन परियोजनाओं में न्यूनतम 50 लोग तक कार्यरत हों, वहां कोविड केयर सेंटर स्थापित कराया जाए। पुलिस लाइंस में भी कोविड केयर सेंटर की स्थापना की कार्यवाही की जाए।
- प्रदेश में आंशिक कोरोना कर्फ्यू को प्रभावी रूप से लागू करें। दूध/दवा आदि के लिए आवागमन कर रहे लोगों का पुलिस सहयोग करे। ठेला-रिक्शा चालकों आदि जरूरतममंदों के लिए सामुदायिक भोजनालय का संचालन किया जाए। क्वारन्टीन सेंटरों में भोजन की समुचित व्यवस्था कराई जाए। राशन वितरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हों।
- बड़ी औद्योगिक इकाइयों में कोविड केयर सेंटर स्थापित कराए जाएं। वर्तमान में 544 उद्योगों में साढ़े 08 सौ से अधिक बेड की क्षमता के साथ को कोविड केयर सेंटर क्रियाशील हैं। इसे अन्य उद्योगों में भी विस्तार दिया जाए।
- विशेषज्ञों के आकलन के दृष्टिगत हमें सभी तरह की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। ऐसे में बेड, मैनपॉवर, चिकित्सकीय उपकरण, ऑक्सीजन और दवाओं की उपलब्धता वर्तमान क्षमता के सापेक्ष न्यूनतम दोगुना करने की कार्यवाही तेज हो। प्राथमिकता वाले इन कार्यों के लिए सचिव स्तर के अलग-अलग अधिकारियों को नामित किया जाए। किसी भी जिले में इनका कोई अभाव न हो। इस संबंध में मिशन मोड में कार्य करने की जरूरत है।