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स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियां सक्रिय कराएं : हाईकोर्ट
Tue, 22 Sep 2026 02:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:44 AM IST
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्रदेश के स्कूलों में परिवहन सुरक्षा मामले पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने प्रदेश के मुख्य सचिव को जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति (डीएसवीएससी) को नियमित बैठकें आयोजित करने के लिए कहा है। साथ ही, स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों (एसटीएससी) के प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए भी सूचित करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने जिला अधिकारियों को धारा 222जी के तहत गठित विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के विधिवत गठन का कार्य सौंपा है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि समिति नियमों के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करे। मुख्य सचिव को ये निर्देश आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर जारी करने होंगे। इन निर्देशों में जिला मजिस्ट्रेटों को एक महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने के लिए कहा जाएगा। राज्य के वकील सभी रिपोर्टों को एकत्रित कर अनुपालन हलफनामा दाखिल करेंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और बृजराज सिंह की खंडपीठ ने दिया। यह फैसला गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की जनहित याचिका पर आया है। याचिका में स्कूलों की सुरक्षा और स्कूली बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था।
अदालत के पूर्व आदेश पर परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और लखनऊ की डीसीपी (ट्रैफिक) रवीना त्यागी 15 सितंबर को उपस्थित हुए। निरंजन ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन (26वां संशोधन) नियम, 2019 का अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नियम 222ए के तहत स्कूल वाहनों के लिए परमिट अनिवार्य है। शिक्षा संस्थान के लिए परमिट धारा 222-बी(1) और निजी बस के लिए धारा 222-बी(2) के तहत जारी होता है।
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यह भी बताया कि नियम 222ई के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को एसटीएससी के कामकाज की निगरानी करनी है। हालांकि, नियम 222जी के तहत गठित समिति वर्तमान में किसी भी विद्यालय में कार्यरत नहीं है। इसी आधार पर न्यायालय ने मुख्य सचिव को उक्त निर्देश जारी किए। अदालत ने सीबीएसई और आईसीएसई को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्णय लिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है।
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कोर्ट ने जिला अधिकारियों को धारा 222जी के तहत गठित विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के विधिवत गठन का कार्य सौंपा है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि समिति नियमों के अनुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करे। मुख्य सचिव को ये निर्देश आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर जारी करने होंगे। इन निर्देशों में जिला मजिस्ट्रेटों को एक महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने के लिए कहा जाएगा। राज्य के वकील सभी रिपोर्टों को एकत्रित कर अनुपालन हलफनामा दाखिल करेंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और बृजराज सिंह की खंडपीठ ने दिया। यह फैसला गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की जनहित याचिका पर आया है। याचिका में स्कूलों की सुरक्षा और स्कूली बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था।
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अदालत के पूर्व आदेश पर परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और लखनऊ की डीसीपी (ट्रैफिक) रवीना त्यागी 15 सितंबर को उपस्थित हुए। निरंजन ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन (26वां संशोधन) नियम, 2019 का अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नियम 222ए के तहत स्कूल वाहनों के लिए परमिट अनिवार्य है। शिक्षा संस्थान के लिए परमिट धारा 222-बी(1) और निजी बस के लिए धारा 222-बी(2) के तहत जारी होता है।
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यह भी बताया कि नियम 222ई के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को एसटीएससी के कामकाज की निगरानी करनी है। हालांकि, नियम 222जी के तहत गठित समिति वर्तमान में किसी भी विद्यालय में कार्यरत नहीं है। इसी आधार पर न्यायालय ने मुख्य सचिव को उक्त निर्देश जारी किए। अदालत ने सीबीएसई और आईसीएसई को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्णय लिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की गई है।