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पीएफ घोटाला: प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने लखनऊ में ईओडब्ल्यू से हासिल किए दस्तावेज
Wed, 25 Dec 2019 10:43 AM IST
शाहरुख खान
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Dec 2019 10:43 AM IST
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फाइल फोटो
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यूपीपीसीएल के कर्मचारियों के पीएफ घोटाले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय की टीम मंगलवार को लखनऊ पहुंची है। प्रवर्तन निदेशालय, दिल्ली के उप निदेशक नेतृत्व में आई टीम इस घोटाले में मनी लांड्रिंग के कनेक्शन खंगाल रही है।
इस पूरे मामले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने ईओडब्ल्यू से दस्तावेज भी हासिल किए हैं। ईओडब्ल्यू के एक अधिकारी ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी लखनऊ आए हैं, उन्होंने ईओडब्ल्यू के अधिकारियों और विवेचक द्वारा अब तक की गई जांच के बारे में जानकारी हासिल की है।
साथ ही ईओडब्ल्यू से घोटाले से संबंधित दस्तावेज भी हासिल किए हैं। इन दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय दिल्ली में मुकदमा दर्ज करेगा। मुकदमा दर्ज होने के बाद जेल में बंद यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा, वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी और ट्रस्ट के सचिव रहे पीके गुप्ता को रिमांड पर लेकर या जेल में जाकर उनके बयान लेगी।
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ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने प्रवर्तन निदेशालय को बताया है कि किस तरह 28 ब्रोकर और बोगस फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये का खेल किया गया। इसमें कई फर्म केवल कालेधन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल की गईं।
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इस पूरे मामले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने ईओडब्ल्यू से दस्तावेज भी हासिल किए हैं। ईओडब्ल्यू के एक अधिकारी ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी लखनऊ आए हैं, उन्होंने ईओडब्ल्यू के अधिकारियों और विवेचक द्वारा अब तक की गई जांच के बारे में जानकारी हासिल की है।
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साथ ही ईओडब्ल्यू से घोटाले से संबंधित दस्तावेज भी हासिल किए हैं। इन दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय दिल्ली में मुकदमा दर्ज करेगा। मुकदमा दर्ज होने के बाद जेल में बंद यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी एपी मिश्रा, वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी और ट्रस्ट के सचिव रहे पीके गुप्ता को रिमांड पर लेकर या जेल में जाकर उनके बयान लेगी।
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ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने प्रवर्तन निदेशालय को बताया है कि किस तरह 28 ब्रोकर और बोगस फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये का खेल किया गया। इसमें कई फर्म केवल कालेधन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल की गईं।
गौरतलब है कि यूपी में नई सरकार बनने से ठीक पहले 17 मार्च 2017 को यूपीपीसीएल के कर्मचारियों के पीएफ का पैसा डीएचएफएल में निवेश में घोटाला सामने आया था। पीएफ के करीब 4000 करोड़ रुपये निवेश 14 ब्रोकर फर्मों के जरिए डीएचएफएल में किया गया था।
इसमें से अधिकतर फर्मों ने पहली बार निवेश कराने के लिए काम किया था। इसके अलावा 14 अन्य कंपनियों की मदद से कालेधन को सफेद करने का काम किया गया। 2 नवंबर को इस मामले में हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
बाद में मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई थी। इस मामले में अब तक एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें पूर्व एमडी एपी मिश्रा, पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी, ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता व दो चार्टर्ड एकाउंटेंट शामिल हैं।
इसमें से अधिकतर फर्मों ने पहली बार निवेश कराने के लिए काम किया था। इसके अलावा 14 अन्य कंपनियों की मदद से कालेधन को सफेद करने का काम किया गया। 2 नवंबर को इस मामले में हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
बाद में मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई थी। इस मामले में अब तक एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें पूर्व एमडी एपी मिश्रा, पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी, ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता व दो चार्टर्ड एकाउंटेंट शामिल हैं।