लोहिया अस्पताल में बिना चीर-फाड़ ऑपरेशन की सुविधा
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डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने दिमागी बुखार से पीड़ित किशोरी की दिमाग की क्षतिग्रस्त झिल्ली को नाक के रास्ते इंडोस्कोप डालकर भरने में सफलता पाई है।
पीजीआई और केजीएमयू में फिलहाल इंडोस्कोपी से इलाज के अधिकतर मामलों में सिर खोलकर ही सर्जरी की जा रही है।
वहीं, लोहिया संस्थान के डॉक्टरों का दावा है कि वहां के न्यूरो सर्जरी विभाग में इंडोस्कोपी की इस आधुनिक तकनीक से सिर खोले बिना और कम खर्च पर ऑपरेशन हो रहा है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक सिंह ने बताया कि इस तकनीकी की मदद से इंडोस्कोपी सर्जरी वाले सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं।
बिना चीरा लगाए रायनोरिया का इलाज
बाराबंकी की प्रिया (17) को दिमागी बुखार था। काफी समय तक उसका प्राइवेट अस्पताल में इलाज चला, लेकिन ऑपरेशन के खर्च के बाद परिवारीजनों की हिम्मत जवाब दे गई।
लोहिया संस्थान पहुंचे तो जांच में पता चला कि प्रिया को रायनोरिया था। इस बीमारी में दिमाग की झिल्ली कट जाने से नाक से पानी निकलता रहता है।
इस पर डॉक्टरों ने नाक के रास्ते इंडोस्कोप डालकर दिमाग की झिल्ली को दवा की मदद से भर दिया। अब प्रिया की हालत पूरी तरह ठीक है।