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महिला अधिकारी से अश्लीलता करने का आरोपी बाबू निलंबित
Wed, 04 Dec 2019 10:58 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 04 Dec 2019 10:58 PM IST
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घोटाला के लिए चर्चित हो चुके बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में अब महिला कर्मियों से अश्लील हरकत करने और शोषण करने का भी खेल शुरू हो चुका है। विभाग के ही एक बाबू द्वारा अपनी ही महिला अधिकारी का अश्लील वीडियो तैयार कर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है।
मामले की जानकारी होने पर निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने आरोपी कनिष्ठ सहायक वरुण सागर को निलंबित कर आरोपों की जांच अयोध्या के जिला कार्यक्रम अधिकारी को सौंप दिया है। यह मामला दो महीने पुराना है और निदेशालय में ही बाबुओं के अधिष्ठान संबंधित पटल देखने वाले प्रधान सहायक द्वारा इस मामले को घुमाया जाता रहा।
सीतापुर जिला के विकास खंड मछरेहटा स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में तैनात एक महिला अधिकारी ने अपने मातहत कनिष्ठ सहायक वरुण सागर के खिलाफ लखनऊ के अलीगंज थाने में 5 अक्तूबर को ही एफआईआई दर्ज कराई थी। जिसमें सीडीपीओ ने अपने ही कनिष्ठ सहायक वरुण सागर पर पिछले कई महीने से अश्लील हरकत करने, यौन शोषण करने समेत कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे।
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पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी बाबू द्वारा होली के मौके पर दफ्तर में ही नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ फोटो खिंचवाकर ब्लैकमेल कर रहा था और सोशल मीडिया व विभागीय वाट्सएप ग्रुप पर भी वायरल कर उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहा था।
पीड़िता ने इस मामले में निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार को भी 7 अक्तूबर को पत्र लिखा था, जिसमें वरुण सागर पर जान से मारने व समाज में बदनाम करने की धमकी देने व शादी का दबाव बनाने जैसे कई और गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन, निदेशालय में मौजूद बाबुओं के कॉकस ने वह पत्र दबा दिया।
इस वजह से आरोपी के खिलाफ करीब एक महीने से कार्रवाई लटकी रही। कई दिनों तक प्रतीक्षा करने के बाद पीड़िता ने जब निदेशक से मिलकर अपने साथ घटी घटना की जानकारी दी तो निदेशक ने तत्काल बाबु को निलंबित कर मामले की जांच अयोध्या के डीपीओ को सौंप दी है।
बाबुओं के कॉकस ने खूब की आरोपी को बचाने की कोशिश
पीड़िता की शिकायत पर निदेशालय में संबंधित मामले देखने वाले अधिकारी के स्तर से बाबू के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति तो पिछले महीने ही कर दी गई थी, लेकिन यह फाइल संबधित मामला देखने वाले पटल पर पहुंची तो इसे वहां तैनात पटल प्रभारी ने फाइल को दबा दिया और आरोपी बाबू को बचाने के लिए फाइल पर इस तरह से लिखा-पढ़ी कर दी कि मामला करीब एक महीने तक अटका रहा।
पीड़िता अधिकारी ने आकर मुझे बाबू द्वारा वायरल की गई अश्लील बातचीत, फोटो व वीडियो के बारे में जानकारी दी, जिसका हमने निदेशालय में तैनात महिला अधिकारियों से परीक्षण कराया व बातचीत का ऑडियो सुनवाया। कनिष्ठ सहायक वरुण सागर के इस कृत्य को कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन मानते हुए हमने तत्काल निलंबित कर दिया है।
- शत्रुघ्न सिंह, निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार
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मामले की जानकारी होने पर निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने आरोपी कनिष्ठ सहायक वरुण सागर को निलंबित कर आरोपों की जांच अयोध्या के जिला कार्यक्रम अधिकारी को सौंप दिया है। यह मामला दो महीने पुराना है और निदेशालय में ही बाबुओं के अधिष्ठान संबंधित पटल देखने वाले प्रधान सहायक द्वारा इस मामले को घुमाया जाता रहा।
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सीतापुर जिला के विकास खंड मछरेहटा स्थित बाल विकास परियोजना कार्यालय में तैनात एक महिला अधिकारी ने अपने मातहत कनिष्ठ सहायक वरुण सागर के खिलाफ लखनऊ के अलीगंज थाने में 5 अक्तूबर को ही एफआईआई दर्ज कराई थी। जिसमें सीडीपीओ ने अपने ही कनिष्ठ सहायक वरुण सागर पर पिछले कई महीने से अश्लील हरकत करने, यौन शोषण करने समेत कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे।
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पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी बाबू द्वारा होली के मौके पर दफ्तर में ही नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ फोटो खिंचवाकर ब्लैकमेल कर रहा था और सोशल मीडिया व विभागीय वाट्सएप ग्रुप पर भी वायरल कर उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहा था।
पीड़िता ने इस मामले में निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार को भी 7 अक्तूबर को पत्र लिखा था, जिसमें वरुण सागर पर जान से मारने व समाज में बदनाम करने की धमकी देने व शादी का दबाव बनाने जैसे कई और गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन, निदेशालय में मौजूद बाबुओं के कॉकस ने वह पत्र दबा दिया।
इस वजह से आरोपी के खिलाफ करीब एक महीने से कार्रवाई लटकी रही। कई दिनों तक प्रतीक्षा करने के बाद पीड़िता ने जब निदेशक से मिलकर अपने साथ घटी घटना की जानकारी दी तो निदेशक ने तत्काल बाबु को निलंबित कर मामले की जांच अयोध्या के डीपीओ को सौंप दी है।
बाबुओं के कॉकस ने खूब की आरोपी को बचाने की कोशिश
पीड़िता की शिकायत पर निदेशालय में संबंधित मामले देखने वाले अधिकारी के स्तर से बाबू के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति तो पिछले महीने ही कर दी गई थी, लेकिन यह फाइल संबधित मामला देखने वाले पटल पर पहुंची तो इसे वहां तैनात पटल प्रभारी ने फाइल को दबा दिया और आरोपी बाबू को बचाने के लिए फाइल पर इस तरह से लिखा-पढ़ी कर दी कि मामला करीब एक महीने तक अटका रहा।
पीड़िता अधिकारी ने आकर मुझे बाबू द्वारा वायरल की गई अश्लील बातचीत, फोटो व वीडियो के बारे में जानकारी दी, जिसका हमने निदेशालय में तैनात महिला अधिकारियों से परीक्षण कराया व बातचीत का ऑडियो सुनवाया। कनिष्ठ सहायक वरुण सागर के इस कृत्य को कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन मानते हुए हमने तत्काल निलंबित कर दिया है।
- शत्रुघ्न सिंह, निदेशक, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार