फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   electricity rate may be increase

बिजली पर महंगाई का साया, पीएम करें हस्तक्षेप

Tue, 03 Sep 2013 02:30 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Tue, 03 Sep 2013 02:30 AM IST
विज्ञापन
electricity rate may be increase

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने प्राकृतिक गैस की कीमतों में दोगुना वृद्धि से बिजली उत्पादन लागत और दरों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है।

विज्ञापन


फेडरेशन ने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को पत्र भेजकर प्रभावी हस्तक्षेप करने व बढ़ी कीमतें वापस लेने की मांग की है।

फेडरेशन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि गैस की कीमतों में भारी वृद्धि करके रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेजा मुनाफा दिया जा रहा है जबकि गैस आपूर्ति में रिलायंस की नाकामी के चलते 15000 मेगावाट क्षमता की 31 बिजली परियोजनाएं ठप पड़ी हैं।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में फेडरेशन के महासचिव शैलेंद्र दुबे ने कहा है कि वित्तीय मामलों की स्टैंडिंग कमेटी के अनुसार के.जी. बेसिन की गैस उत्पादन लागत मात्र 2.74 डालर प्रति मिली मीटर ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जबकि आर्थिक मामलों की संसदीय समिति ने प्राकृतिक गैस का मूल्य 8.2 डालर प्रति एमएमबीटीयू निर्धारित कर दिया है जो तीन गुने से भी ज्यादा है।

वर्तमान में गैस का खरीद मूल्य 4.2 डालर प्रति एमएमबीटीयू है। इस हिसाब से भी गैस की कीमतों में दोगुना की वृद्धि किसी भी दृष्टिकोण से जायज नहीं है।

फेडरेशन का आरोप है कि एक अप्रैल 2014 से गैस की कीमतों में भारी वृद्धि रिलायंस को फायदा पहुंचाने के लिए की गयी है जो अनुचित तो है ही साथ ही अनैतिक भी क्योंकि एक अप्रैल 2014 वह तारीख है जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होगी।

दुबे ने कहा, रिलायंस को बेजा लाभ तब दिया जा रहा है जब उसकी अक्षमता के चलते 12 बिजली परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और 19 बिजलीघरों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है जिनकी कुल क्षमता 15000 मेगावाट है।

उल्लेखनीय है, रिलायंस के केजी डी-6 बेसिन से मार्च13 से अगस्त13 तक बिजलीघरों को कोई गैस नहीं मिली।

रिलायंस को मुनाफा देने का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि बिजलीघरों को गैस देने में विफल रहने के चलते रिलायंस पर भारत सरकार ने कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया जबकि करार के अनुसार रिलायंस से इसके एवज में 30 करोड़ डॉलर वसूलना चाहिए।


फेडरेशन की मांग है कि गैस आपूर्ति करने में विफल रहने के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज पर कार्रवाई की जाए और एक अप्रैल 2014 से की गई गैस कीमतों में भारी वृद्धि वापस ली जाए।

फेडरेशन की 13 सितंबर को दिल्ली में होने जा रही बैठक में इस बाबत आगे की कार्रवाई का निर्णय होगा। फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र की प्रति लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज व राज्यसभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली को भी भेजकर इस मामले को उठाने की मांग की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed