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5300 मेगावाट की बिजली परियोजनाएं लटकीं
अनिल श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sun, 27 Oct 2013 12:07 PM IST
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प्रदेश में 5300 मेगावाट क्षमता की नई बिजली परियोजनाओं पर एक बार फिर ग्रहण लग गया है।
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सोनभद्र जिले में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में प्रस्तावित चार परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी अधर में लटक गई है।
केंद्र ने सिंगरौली एक्शन प्लान के तहत इस इलाके में प्रस्तावित नई परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी देने पर रोक लगा दी है।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इस इलाके में नए सिरे से पर्यावरणीय अध्ययन करा रहा है।
इसके बाद तय किया जाएगा कि नई परियोजनाओं की स्थापना के लिए हरी झंडी दी जाए या नहीं।
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केंद्र के इस फैसले के बाद खास तौर पर दोपहा और ओबरा ‘सी’ परियोजनाओं को तगड़ा झटका लगा है जिनकी स्थापना की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है।
सोनभद्र जिले के दोपहा में प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के माध्यम से 1980 मेगावाट की तापीय परियोजना लगाई जानी है।
जबकि राज्य विद्युत उत्पादन निगम 1320-1320 मेगावाट क्षमता की ओबरा ‘सी’ और अनपरा ‘ई’ परियोजनाएं स्थापित करने की तैयारी में है।
इसके अलावा निजी कंपनी लैनको अनपरा ‘सी’ परियोजना में 660 मेगावाट की एक अतिरिक्त इकाई लगाना चाहती है। इन सभी परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी का मामला केंद्र के पास लंबित है।
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केंद्र ने पूरे देश में 43 ऐसे औद्योगिक क्लस्टर व क्षेत्र चिह्नित किए हैं जहां वायु प्रदूषण काफी ज्यादा है। इनमें सिंगरौली भी शामिल है।
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जनवरी 2010 में केंद्र ने इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने पर रोक लगा थी।
बाद में सिंगरौली एक्शन प्लान तैयार करके इस इलाके का पर्यावरणीय अध्ययन कराया गया और जुलाई 2011 में प्रदेश के गाजियाबाद व सिंगरौली समेत देश भर के आठ क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा लिया गया था।
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इसके बाद दोपहा और ओबरा ‘सी’ परियोजनाएं आगे बढ़ीं लेकिन अब एक बार फिर इन पर ब्रेक लग गया है।
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घटने के बजाय बढ़ गया प्रदूषण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस साल दोबारा इस इलाके में अध्ययन कराया तो सभी आठों क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा पाया गया।
क्रिटिकली एनवायरमेंटल पॉल्यूशन इंडेक्स (सीईपीआई) के अनुसार बीते ढाई वर्षों में एक्शन प्लान लागू किए जाने के बावजूद इन क्षेत्रों में प्रदूषण की भयावह स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
उल्टे 2011 के मुकाबले प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इसे देखते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से इन इलाकों में नई औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरणीय मंजूरी देने पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
इसके चलते सिंगरौली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सोनभद्र में नई बिजली परियोजनाओं पर फिलहाल ग्रहण लग गया है।
इन क्षेत्रों में पर्यावरणीय मंजूरी पर लगी रोक
गाजियाबाद (यूपी), सिंगरौली (यूपी-एमपी), पानीपत (हरियाणा), वापी (गुजरात), इंदौर (एमपी), झारसूगुडा (उड़ीसा), लुधियाना (पंजाब) और पातनचेरू-बोल्लारम (आंध्र प्रदेश)।
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