{"_id":"663ec11a242327eadb079353","slug":"elections-2024-bsp-appears-to-be-in-a-dilemma-due-to-repeated-reversal-of-decisions-2024-05-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Elections 2024 : बार-बार फैसले पलटने से दुविधा में दिख रही बसपा, 15 टिकट बदल चुकी हैं पार्टी की मुखिया मायावती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Elections 2024 : बार-बार फैसले पलटने से दुविधा में दिख रही बसपा, 15 टिकट बदल चुकी हैं पार्टी की मुखिया मायावती
Sat, 11 May 2024 06:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अशोक मिश्रा, लखनऊ
अशोक मिश्रा, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 11 May 2024 06:22 AM IST
सार
पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को हटाए जाने के बाद सबकी नजरें बसपा सुप्रीमो मायावती के नए फैसले पर टिकी हैं। अभी चार चरणों का चुनाव बाकी है और बसपा में प्रत्याशियों को बदलने से लेकर संगठन में उलटफेर का सिलसिला जारी है।
विज्ञापन
बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लोकसभा चुनाव के दरम्यान बार-बार फैसले पलटने की वजह से बसपा बड़ी दुविधा में नजर आ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को हटाए जाने के बाद सबकी नजरें बसपा सुप्रीमो मायावती के नए फैसले पर टिकी हैं। अभी चार चरणों का चुनाव बाकी है और बसपा में प्रत्याशियों को बदलने से लेकर संगठन में उलटफेर का सिलसिला जारी है।जानकारों का तो यहां तक कहना है कि चुनाव के नतीजे मुफीद नहीं रहे तो बसपा सुप्रीमो कोई बड़ा फैसला भी ले सकती हैं।
विज्ञापन
मायावती ने आकाश के परिपक्व होने तक उन्हें कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया है, लेकिन अन्य राज्यों में संगठन को मजबूत करने के साथ लोकसभा चुनाव के लिए भी नेशनल कोऑर्डिनेटर का होना जरूरी है। मायावती के भाई आनंद कुमार पार्टी के उपाध्यक्ष हैं, लेकिन वह राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। इससे पहले मायावती बरेली के जोनल कोआॅर्डिनेटर ब्रह्मस्वरूप सागर, जिलाध्यक्ष राजीव सिंह को हटा चुकी हैं, तो झांसी के जिलाध्यक्ष जयपाल अहिरवार को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
विज्ञापन
वहीं, अपने भतीजे आकाश आनंद पर कार्रवाई करके उन्होंने साफ कर दिया कि बसपा के लिए यह चुनाव करो या मरो की स्थिति वाला है और वह किसी भी सूरत में गलतियों को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
विज्ञापन
तीन-तीन बार बदले प्रत्याशी
बसपा ने अब तक 15 सीटों पर प्रत्याशियों को बदला है। वाराणसी, आजमगढ़ और भदोही में तो तीन-तीन बार प्रत्याशी बदलने की नौबत आ चुकी है। जोनल कोआर्डिनेटर पर ज्यादा भरोसा और छोटे दलों से भी दूरी बनाए रखने की रणनीति से बसपा की चुनौती बढ़ी है।
तीसरा और चौथा चरण ज्यादा कठिन
तीसरे और चौथे चरण की सीटों पर बसपा बीते दस सालों में अपना खाता तक नहीं खोल सकी है। आगरा को छोड़कर तीसरे चरण की बाकी सीटों पर बसपा प्रत्याशियों का प्रदर्शन दमदार नहीं रहा। वहीं चौथे चरण की सीटों में उन्नाव और हरदोई को छोड़कर बाकी पर बसपा को दमदार प्रदर्शन के लिए खासी मशक्कत करनी होगी।
- बीते तीन लोकसभा चुनावों की बात करें तो बसपा ने तीसरे चरण की दो सीटों संभल और फतेहपुर सीकरी में वर्ष 2009 के चुनाव में जीत हासिल की थी। फतेहपुर सीकरी से सीमा उपाध्याय और संभल से शफीकुर्रहमान बर्क जीते थे। बाद में दोनों नेताओं ने बसपा छोड़ दी थी। तत्पश्चात वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और उसका कोई भी प्रत्याशी नहीं जीत सका। वर्ष 2019 का चुनाव में बसपा ने सपा के साथ मिलकर लड़ा और 10 सीटों पर जीती, लेकिन तीसरे और चौथे चरण की किसी भी सीट पर हाथी अपने पांव मजबूती से नहीं टिका सका था।