प्रधानमंत्री उजाला योजना से 550 करोड़ रुपये की हुई बचत, बिजली व्यवस्था में भी हुआ सुधार
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उन्होंने इसे देश को प्रकाश पथ पर ले जाने का अचूक साधन बताया था। प्रधानमंत्री उजाला योजना के शुरुआती एक वर्ष में 125 शहरों में ही लगभग 9 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित हुए। इससे लगभग 550 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष बचत हुई थी। इस योजना का क्रियान्वयन बिजली मंत्रालय की संयुक्त उपक्रम कंपनी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) की ओर से किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री उजाला योजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने सुल्तानपुर जिले में जगह-जगह कैंप लगवाकर बाजार मूल्य से काफी सस्ती दरों पर एलईडी बल्बों का वितरण कराया। इसके माध्यम से देश में बिजली की खपत को कम किया जा रहा है।
ईईएसएल के अनुसार, 15 अगस्त 2018 तक 30,72,34,251 एलईडी बल्बों की बिक्री की जा चुकी है। इससे प्रत्येक वर्ष 15,960 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। प्रधानमंत्री उजाला योजना की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि सीएफएल की तुलना में एलईडी बल्ब 8-10 गुना और सामान्य इनकैंडेसेंट बल्ब (गोल आकार के बल्ब) के मुकाबले 50 गुना ज्यादा टिकाऊ हैं।
'बिजली आपूर्ति के घंटो में वृद्धि हुई'
उजाला योजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता बताते हुए समाजसेवी सुन्दर लाल टंडन ने एक साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे बिजली आपूर्ति के घंटो में वृद्धि हुई है। वहीं, प्रदेश में बिजली को लेकर होने वाले आंदोलनों पर भी विराम लग गया है। छात्रा दीपा वर्मा ने कहा, विद्युत बिलों में भी इस योजना से बचत ही बचत हो रही है,पहले एक बल्ब से एक ही कमरे में उजाला होता था तो अब वही उतनी ही बिजली से दस कमरों में उजाला होने लगा है।
कपडा व्यवसाई मंजीत सिंह ने कहा कि उजाला योजना की सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि बाजार में अब सिर्फ एल ई डी बल्ब ही मिलने लगे है। उपभोक्ता संजय शुक्ल ने बताया कि बिजली की बचत से ट्रांसफॉर्मर, विद्युत् तारो के जर्जर होने के क्रम में भी गिरावट आई है।
प्रधानमंत्री की इस योजना की सफलता में प्रदेश सरकार का भी पूर्ण योगदान है। वहीं, व्यवसाई कल्याण सिंह कहते है कि बिजली की खपत में निश्चित रूप से कटौती हुई है। मगर बिजली की दरों में हुई बढ़ोत्तरी से विद्युत उपभोक्ताओं को आपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।