रूतबा तो देखिए, बुक करा लिया पूरा प्लेन
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पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व उनके करीबी पूर्व विधायक आरपी जायसवाल की आय से अधिक संपत्ति की जांच कर रही ईडी अब उस संस्था या व्यक्ति को तलाश कर रही है, जिसने पूरा प्लेन बुक कराकर दोनों के परिवारों को विभिन्न स्थानों की सैर कराई।
ईडी को इन हवाई यात्राओं में लाखों का खर्च होने की जानकारी पिछले दिनों मिली है।
इसके बाद से ही ईडी उसकी तलाश में जुट गई है, जिसने दोनों नेताओं की यह सेवा की। ईडी के सूत्रों के मुताबिक बसपा शासनकाल के दौरान ही हवाई यात्राओं का लुत्फ उठाया गया। ऐसी यात्रा कई बार हुईं।
विदेश में रिश्तेदारों को तोहफे भी भेजे
ईडी को यह भी सूचना मिली है कि लखनऊ और दिल्ली से पूर्व मंत्री के विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों के लिए खाद्य पदार्थ से लेकर अन्य सामान भेजे गए।
इसकी जांच की जा रही है। ईडी के अधिकारियों के अनुसार दोनों राजनेताओं की संपत्ति के बारे में अभी जानकारी जुटाया जाना जारी है।
दोनों ही की काफी संपत्ति ईडी ने पिछले दिनों सीज की है। मौजूदा समय में ईडी पूर्व मंत्री कुशवाहा व पूर्व विधायक जायसवाल और उनके करीबी लोगों के दर्जनों खातों की पड़ताल कर रही है।
इन सभी खातों में बसपा शासनकाल से हुई आमद व निकासी को परखा जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि किन खातों में एक मुश्त अधिक रकम कब और किसके खाते से जमा कराई गई।
इलाके के लोगों के नाम दर्ज खातों में मोटी रकम
ईडी के अनुसार अभी तक की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि पूर्व मंत्री ने करोड़ों की बेनामी संपत्ति बना रखी है और अपने कई कर्मचारियों या इलाके के लोगों के नाम से खोले गए खातों में भी मोटी रकम जमा कराई है।
आय से अधिक संपत्ति की जांच के मद्देनजर ईडी कुशवाहा के करीबियों के नाम से खरीदे गए वाहनों की भी जांच कर रही है।
ईडी ने इसके तहत पूर्व मंत्री, उनके करीबी रिश्तेदारों व अन्य के नामों पर पंजीकृत वाहनों की पड़ताल हो रही है।
एनजीओ के द्वारा ब्लैक मनी को व्हाइट भी बनाया गया
ईडी ने अपनी पड़ताल में उन एनजीओ को भी शामिल कर लिया है, जिन्हें पूर्व मंत्री व एक आईएएस अधिकारी की कृपा से करोड़ों का काम मिला।
इन एनजीओ को सिर्फ काम से ही नहीं नवाजा गया, उनके जरिए ब्लैक मनी को व्हाइट भी बनाया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एनजीओ का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जानकारी होने पर ईडी पूरे मामले की असलियत तलाशने में जुट गई है।
ईडी के सूत्र बताते हैं कि लखनऊ के एक साड़ी व्यवसायी और उनके मित्र एनजीओ संचालक के एक तत्कालीन प्रमुख सचिव से नजदीकी रिश्ते थे।
227 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग
प्रारंभिक तौर पर जो जानकारी सामने आई है उसके लिहाज से तो 227 करोड़ रुपये का मामला सामने आ रहा है। लेकिन ईडी के अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि जांच होने पर रकम कम भी हो सकती है।
ईडी ने इस जांच के तहत संबंधित एनजीओ के बही-खातों की पड़ताल शुरू कर दी है। इनके जरिए एनजीओ के किस खाते में कितना मनी ट्रांसफर दिखाया गया, इसकी तस्दीक हो रही है।
यह भी देखा जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग के बाद रकम को किसके खाते में डाला गया या कहां निवेश किया गया।