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अधिकारी नहीं लटका सकेंगे फाइलें, जिला मुख्यालय भी ई-ऑफिस से जुड़ेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 13 Sep 2017 03:17 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनवरी 2018 से सभी जिला मुख्यालयों को ई-ऑफिस व्यवस्था से जोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि सभी विभागों को भी ई-ऑफिस से जोड़ा जाए।
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इससे पहले राज्य सचिवालय में एक अक्तूबर से ही ई-ऑफिस व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को शास्त्री भवन में ई-ऑफिस प्रणाली लागू किए जाने के संबंध में प्रजेंटेशन देखने के दौरान ये निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से पारदर्शिता आएगी और काम तेजी से होंगे। उन्होंने इस सिस्टम को सफल बनाने के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों व मंत्रियों को प्रशिक्षण दिलवाने को कहा ताकि इसका सही ढंग से इस्तेमाल हो सके।
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प्रजेंटेशन के दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि ई-ऑफिस को लेकर तेजी से तैयारियां चल रही हैं।
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95 विभागों, 455 अनुभागों से ई-ऑफिस पकड़ेगी रफ्तार
सचिवालय के 95 विभागों के 455 अनुभागों में एक अक्तूबर से ई-ऑफिस व्यवस्था लागू हो रही है। पारदर्शी प्रशासन में इस पहल को मील का पत्थर माना जा रहा है। सचिवालय के 4000 कर्मियों को इस प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए कंप्यूटर, स्कैनर, प्रिंटर आदि की भी व्यवस्था की जा रही है।
मंत्रियों ने सीखे ई-ऑफिस से राज चलाने के तरीके
कागज और फाइलों से प्रदेश को चलाने वाले मंत्री भी अब कंप्यूटर से राज चलाएंगे। मंगलवार को मुख्यमंत्री व उनके मंत्रियों को ई-ऑफिस पर काम के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
ई-ऑफिस सिस्टम में प्रार्थना पत्रों पर आदेश-निर्देश से लेकर नीतिगत मामलों तक अपने अभिमत और टिप्पणियां मंत्रियों को खुद ही देनी होंगी। इसके लिए उन्हें लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई मंत्री पहले से ही कंप्यूटर पर काम करते आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई मंत्री खासे सक्रिय हैं। ऐसे में इन्हें ई-ऑफिस से काम में कोई मुश्किल नहीं आने वाली।
ई-ऑफिस सिस्टम में प्रार्थना पत्रों पर आदेश-निर्देश से लेकर नीतिगत मामलों तक अपने अभिमत और टिप्पणियां मंत्रियों को खुद ही देनी होंगी। इसके लिए उन्हें लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई मंत्री पहले से ही कंप्यूटर पर काम करते आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई मंत्री खासे सक्रिय हैं। ऐसे में इन्हें ई-ऑफिस से काम में कोई मुश्किल नहीं आने वाली।
एमएसएमई व निर्यात प्रोत्साहन विभाग में ई-ऑफिस लागू
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग में ई-ऑफिस व्यवस्था मंगलवार से ही लागू हो गई। प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने दिन में विभाग के कर्मियों को इसके बारे में जानकारी दी और काम किया। शाम को विभाग में सफल प्रयोग के आधार पर प्रजेंटेशन भी दिया।
ई- ऑफिस के मुख्य फायदे
मैनुअल सिस्टम में बड़ी संख्या में रोज आने वाली शिकायतों, पत्रों पर कार्रवाई का स्तर पता करना बेहद कठिन है। ई-सिस्टम से हर मामले पर की जा रही कार्रवाई एक क्लिक से पता हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने हर काम के लिए समय सीमा तय कर रखी है, लेकिन इस पर अमल के आकलन की कोई व्यवस्था नहीं है। नए सिस्टम में काम की टाइमलाइन पास होते ही वरिष्ठ अधिकारियों को पता चल जाएगी। नई व्यवस्था में आरटीआई का जवाब चंद मिनटों में ही दिया जा सकेगा। बड़ी संख्या में कागज की बचत होगी। न तो डॉक्यूमेंट चोरी हो सकेंगे और न ही जलाए जा सकेंगे।
ई- ऑफिस के मुख्य फायदे
मैनुअल सिस्टम में बड़ी संख्या में रोज आने वाली शिकायतों, पत्रों पर कार्रवाई का स्तर पता करना बेहद कठिन है। ई-सिस्टम से हर मामले पर की जा रही कार्रवाई एक क्लिक से पता हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने हर काम के लिए समय सीमा तय कर रखी है, लेकिन इस पर अमल के आकलन की कोई व्यवस्था नहीं है। नए सिस्टम में काम की टाइमलाइन पास होते ही वरिष्ठ अधिकारियों को पता चल जाएगी। नई व्यवस्था में आरटीआई का जवाब चंद मिनटों में ही दिया जा सकेगा। बड़ी संख्या में कागज की बचत होगी। न तो डॉक्यूमेंट चोरी हो सकेंगे और न ही जलाए जा सकेंगे।