दिन भर ठप रहा सर्वर, नहीं हो सकी शराब के ठेकों के लिए ई-लॉटरी, सामने आई विभागीय कमियां
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आधी अधूरी तैयारी के बीच शराब के ठेके के लिए शुरू हुई सरकार की ई-लॉटरी प्रक्रिया का पहला शो गुरुवार को फ्लाप हो गया। बैंक, आबकारी विभाग व एनआईसी में सामंजस्य की कमी के कारण शासन-प्रशासन की सारी तैयारी धरी रह गई। इसके बाद पूरी प्रक्रिया स्थगित कर दी गई। आरोप लग रहा है कि अफसरों व पुराने ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण ई-लॉटरी नहीं हो सकी, क्योंकि वे यह व्यवस्था चाहते ही नहीं।
आबकारी विभाग इसे तकनीकी गड़बड़ी बता रहा है और एक सप्ताह में दोबारा ई-लॉटरी कराने का दंभ भर रहा है। सुबह नौ बजे से जिलों के मुख्यालय पर डटे रहे आवेदकों को देर रात इसकी जानकारी दी गई। यह प्रक्रिया पूरे प्रदेश के 73 जिलों में एक साथ होनी थी।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टेक्निकल सपोर्ट देने वाली एजेंसी एनआईसी के सर्वर से सपोर्ट न मिलने के कारण लॉटरी नहीं निकाली जा सकी। देर रात साढ़े नौ बजे प्रमुख सचिव आबकारी कल्पना अवस्थी के निर्देश पर इस प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। साथ ही शुक्रवार से शुरू हो रही दूसरे चरण की प्रक्रिया भी निरस्त कर दी गई है। आबकारी आयुक्त धीरज साहू ने बताया कि नई तारीखों का एलान जल्द किया जाएगा। पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो इसके लिए आज की ई-लॉटरी को निरस्त किया गया है।
कहीं शराब माफियाओं की साजिश तो नहीं?
दरअसल आबकारी विभाग की नई पॉलिसी शराब कारोबार से जुड़े पुराने मठाधीशों के गले नहीं उतर रही है। इस ई-लॉटरी में खेल करने की कोशिश की गई। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पांच सितारा होटलों में शराब की दुकान लेने के इच्छुक लोगों के इंटरव्यू लिए गए और उनके हैसियत प्रमाणपत्र व अन्य दस्तावेज जमा कराए गए। दावा यहां तक किया जा रहा है कि शराब के पुराने सिंडीकेट की मिलीभगत से ही यह पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
26 हजार दुकानों के लिए होनी थी ई-लॉटरी
पहले चरण में कुल 26,005 दुकानों के लिए ई-लॉटरी होनी थी। इसके लिए पूरे प्रदेश से 3 लाख 67 हजार 419 लोगों ने आवेदन किया था। 2 लाख 44 हजार 737 लोगों ने ही हिस्सा लेने के लिए फीस जमा की। आवेदनों की स्क्रूटनी की गई तो लगभग 11 हजार आवेदक बाहर हो गए। कुल 2 लाख 33 हजार 892 आवेदक के दस्तावेज दुरुस्त पाए गए जिन्हें इसमें शामिल किया गया।