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Lucknow News: काॅपर-टी लगाने में अव्वल रहा डफरिन अस्पताल
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डफरिन अस्पताल।
लखनऊ। राजधानी के वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) में लक्ष्य पूरा करने के लिए डॉक्टरों पर प्रसूताओं पर दबाव बनाकर कॉपर-टी लगाने के आरोप लगे हैं। कुछ प्रसूताओं ने इसकी शिकायत भी की है। वहीं, इस बीच अप्रैल से दिसंबर 2025 तक कॉपर-टी लगवाने के मामले में यह अस्पताल जिले में सबसे आगे रहा है। इस अवधि में डफरिन अस्पताल में 4734 प्रसव हुए, जिनमें से 2026 महिलाओं ने प्रसव के बाद कॉपर-टी लगवाई। वहीं, लोकबंधु अस्पताल 1583 प्रसवोत्तर कॉपर-टी मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
डफरिन अस्पताल में गर्भपात के 344 मामलों में कॉपर-टी का प्रयोग नगण्य रहा, जबकि 25 सामान्य कॉपर-टी दर्ज किए गए। लोकबंधु अस्पताल में 3504 प्रसव और 354 गर्भपात के मामले सामने आए, जहां 1583 महिलाओं ने प्रसव के बाद कॉपर-टी अपनाई। झलकारीबाई अस्पताल में 1729 प्रसव के मुकाबले 606 प्रसवोत्तर कॉपर-टी और 44 गर्भपात के बाद कॉपर-टी के मामले दर्ज हुए। बीआरडी अस्पताल में आंकड़े कम रहे, जहां 253 प्रसव में केवल 16 प्रसव के बाद कॉपर-टी लगाई गई। आरएसएम अस्पताल में 352 सामान्य कॉपर-टी के मामले दर्ज होना उल्लेखनीय रहा।
Iदंपती की काउंसिलिंग के बाद सहमति देने पर ही कॉपर-टी लगाई जाती है। दबाव बनाकर कॉपर-टी लगाने की बात गलत है। वहीं, सामने आए मामलों की फाइलें निकलवाकर जांच कराई जा रही है।I
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I- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, प्रमुख अधीक्षक, डफरिन अस्पतालI
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डफरिन अस्पताल में गर्भपात के 344 मामलों में कॉपर-टी का प्रयोग नगण्य रहा, जबकि 25 सामान्य कॉपर-टी दर्ज किए गए। लोकबंधु अस्पताल में 3504 प्रसव और 354 गर्भपात के मामले सामने आए, जहां 1583 महिलाओं ने प्रसव के बाद कॉपर-टी अपनाई। झलकारीबाई अस्पताल में 1729 प्रसव के मुकाबले 606 प्रसवोत्तर कॉपर-टी और 44 गर्भपात के बाद कॉपर-टी के मामले दर्ज हुए। बीआरडी अस्पताल में आंकड़े कम रहे, जहां 253 प्रसव में केवल 16 प्रसव के बाद कॉपर-टी लगाई गई। आरएसएम अस्पताल में 352 सामान्य कॉपर-टी के मामले दर्ज होना उल्लेखनीय रहा।
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Iदंपती की काउंसिलिंग के बाद सहमति देने पर ही कॉपर-टी लगाई जाती है। दबाव बनाकर कॉपर-टी लगाने की बात गलत है। वहीं, सामने आए मामलों की फाइलें निकलवाकर जांच कराई जा रही है।I
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I- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, प्रमुख अधीक्षक, डफरिन अस्पतालI