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लविवि में फंसी चांसलर व चक्रवर्ती मेडल की घोषणा

Sat, 14 Sep 2019 01:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 01:27 AM IST
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due to technical chancellor and chakraborty medal is not decided
लविवि : तकनीकी गड़बड़ी में फंसे चांसलर व चक्रवर्ती मेडल
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पहले 5 फिर 15 सितंबर तक आवेदन करने का जारी हुआ था विभागीय आदेश
इंटरव्यू के दौरान एक डीन व एक अभ्यर्थी ने उठाया मुद्दा तो हुई जानकारी
15 तक आवेदन लेने के बाद 17 को इंटरव्यू कर जारी होगा परिणाम
तकनीकी गड़बड़ी की वजह से लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित चांसलर व चक्रवर्ती मेडल की घोषणा नहीं की जा सकी। चांसलर मेडल के लिए छात्रों से आवेदन लेने के लिए अलग-अलग जारी पत्रों में 5 सितंबर और 15 सितंबर तक आवेदन करने की तिथि अंकित की गई थी। जबकि इसके इंटरव्यू 13 सितंबर यानी शुक्रवार को ही आहूत कर लिए गए। इंटरव्यू के दौरान एक डीन व एक अभ्यर्थी ने जब यह मुद्दा उठाया तो विवि प्रशासन को अपनी गलती पता चली। इसके बाद अब 17 सितंबर को इसकी घोषणा करने पर सहमति बनी। 15 सितंबर तक विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे।
चांसलर मेडल के लिए विवि प्रशासन ने एक आदेश में 5 सितंबर तक छात्रों से आवेदन मांगे थे। जबकि डिप्टी रजिस्ट्रार परीक्षा की ओर से जारी एक अन्य आदेश में 5 सितंबर और 15 सितंबर दोनों तिथि अंकित थी, जिसकी वजह से कुछ छात्रों व शिक्षकों को कनफ्यूजन हो गया। वहीं विवि ने पूर्व घोषित तिथि के अनुसार चांसलर मेडल के लिए आए हुए 28 आवेदकों व चक्रवर्ती, कुलपति मेडल के अभ्यर्थियों को भी शुक्रवार को साक्षात्कार के लिए बुलाया था।
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कुलपति प्रो. एसपी सिंह की अध्यक्षता में चांसलर मेडल के आवेदक विद्यार्थियों के इंटरव्यू भी हुए। एक छात्रा थोड़ी देर से इंटरव्यू के लिए पहुंची। इंटरव्यू ले रहे अधिकारियों ने जब उससे इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि मेडल के लिए आवेदन की आखिरी तिथि ही 15 सितंबर तय थी। आज के इंटरव्यू की मुझे कोई सूचना भी नहीं दी गई। मुझे एक दोस्त से जानकारी हुई तो मैं आनन-फानन यहां पहुंची हूं। इस दौरान एक डीन ने भी उस आदेश की कॉपी दिखाई जिसमें 15 सितंबर और 5 सितंबर दोनों तिथि अंकित थी। यह सुनते ही खलबली मच गई क्योंकि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं थी। फिर यह आदेश किसने जारी किया, इसकी खोजबीन शुरू की गई। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि डिप्टी रजिस्ट्रार परीक्षा की ओर से जारी आदेश में तकनीकी खामी से दो तिथि अंकित हो गई।
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मगर छात्रहित में निर्णय लिया गया कि जिन विद्यार्थियों के इंटरव्यू हो गए हैं, उनके परिणाम सुरक्षित किए जाते हैं। 15 सितंबर तक विद्यार्थियों के आवेदन लिए जाएंगे। अगर कोई और आवेदन आता है तो 17 को इंटरव्यू करके मेडल की घोषणा की जाएगी। इसी क्रम में चक्रवर्ती मेडल के इंटरव्यू भी 17 को ही आयोजित किया जाएगा। दीक्षांत समारोह 14 अक्तूबर को प्रस्तावित है।
ये विद्यार्थी करते हैं आवेदन
विवि में चांसलर गोल्ड मेडल स्नातक और परास्नातक के बहुमुखी प्रतिभा वाले सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी को दिया जाता है। इसी तरह चक्रवर्ती मेडल बेहतर सामाजिक कार्य करने वाले विद्यार्थी को मिलता है। इन दोनों के लिए विवि की ओर से इंटरव्यू का आयोजन किया जाता है, जिसमें से सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी का चयन किया जाता है। इंटरव्यू कमेटी की अध्यक्षता खुद कुलपति करते हैं और प्रति कुलपति, सभी डीन, परीक्षा नियंत्रक, प्रॉक्टर, चीफ प्रोवोस्ट आदि भी शामिल होते हैं। कुलपति स्वर्ण पदक सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेट को दिया जाता है। इसके लिए भी आज इंटरव्यू हुआ।
नेशनल पीजी के आनंद कुमार को कुलपति स्वर्ण पदक
नेशनल पीजी कॉलेज के एमए प्रथम वर्ष के छात्र आनंद कुमार यादव को ‘वाइस चांसलर गोल्ड मेडल फॉर द बेस्ट एनसीसी कैडेट’ के लिए चुना गया। शुक्रवार को ही कुलपति की अध्यक्षता में हुए इंटरव्यू के बाद इसकी घोषणा की गई। वहीं आनंद कुमार ने बताया कि वह सीडीएस के द्वारा आर्मी ऑफिसर बनना और देश सेवा करना चाहते हैं। आनंद ने 2017 में एनसीसी ज्वॉइन किया और पिछले साल आईएमए देहरादून में कैंप में शामिल हुए थे। लखनऊ से एकमात्र उनका चयन हुआ था। इस कैंप ने उन्हें काफी प्रभावित किया, जिसके बाद सेना में जाने के लिए मेहनत से लग गए। इससे पहले उनकी रुचि फायरिंग में थी, जिसकी वजह से उनका रुझान एनसीसी की तरफ हुआ। आनंद ने कहा कि यह मेरी बटालियन व मां-पिता के लिए गर्व का विषय है। पिता अशोक कुमार यादव सचिवालय में बतौर हवलदार तैनात हैं, जबकि मां अनीता गृहणी हैं।

गड़बड़ी की जांच के आदेश
तकनीकी गड़बड़ी के कारण आवेदन के लिए जारी पत्र में 5 और 15 सितंबर दोनों तिथि अंकित हो गई थी। छात्रहित में 15 तक आवेदन का मौका दिया गया है। 17 को इंटरव्यू के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। कुलपति ने उक्त गड़बड़ी की जांच के लिए भी निर्देश दिया है।
- प्रो. ध्रुवसेन सिंह, परीक्षा नियंत्रक, लविवि
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