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सूबे में सूखे का गंभीर संकट, अफसर कर रहे इनकार

Tue, 13 Oct 2015 01:20 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 13 Oct 2015 01:20 AM IST
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Drought in Uttar Pradesh.

प्रदेश के 31 जिले ऐसे हैं जहां 50 फीसदी भी बारिश नहीं हुई है। धान सूख गए हैं और जहां बालियां आई हैं, उसके दानों में दम नहीं हैं। डेढ़ साल के भीतर लगातार तीसरी आपदा के शिकार किसानों को कुछ भी सूझ नहीं रहा है। अव्वल तो इस हाल में इन जिलों को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित कर देना चाहिए।

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मगर, सरकारी मशीनरी की सुनिए। वह सरकार को बता रही है कि उनके जिले में फसलों को कोई नुकसान ही नहीं हुआ। नतीजा यह है कि सरकार सूखे पर कोई फैसला ही नहीं कर पा रही है।
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प्रदेश के किसानों ने पिछले साल भी सूखा झेला था। सामान्य से 50 फीसदी से कम बारिश की वजह से जबर्दस्त नुकसान का हवाला देते हुए सरकार ने 44 जिलों को 16 सितंबर 2014 को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया था।
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बाद में इन जिलों की संख्या बढ़ गई। इस वर्ष सामान्य से 50 फीसदी से भी कम बारिश वाले जिलों की संख्या 31 पहुंच चुकी है। इनमें 16 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से 40 फीसदी से कम बारिश हुई है।

कौशांबी, फतेहपुर व अंबेडकरनगर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से 20 प्रतिशत भी बारिश नहीं हुई। अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि इन जिलों में बोई गई व रोपी गई फसलों का हाल क्या होगा? पहले सूखा, फिर बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि और अब एक बार फिर सूखे की मार झेल रहे किसानों की दशा पर कहीं कोई हरकत नहीं दिख रही है।

मात्र 13.2 फीसदी हुई बारिश

Drought in Uttar Pradesh.

केंद्र ने 33 फीसदी नुकसान पर भी आपदा राहत का लाभ देने का नियम बनाया है। मगर, यहां कई जिलों की मशीनरी गंभीर सूखे के संकट में भी नुकसान से साफ इन्कार कर रही है। अंबेडकरनगर सूबे में सबसे कम बारिश वाला जिला है।

वहां औसत वर्षा का 13.2 फीसदी ही बारिश हुई लेकिन, जिले से बताया गया है कि 15 प्रतिशत ही नुकसान हुआ है। हमीरपुर, महोबा, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, फैजाबाद, बाराबंकी व कन्नौज आदि जिलों की सूचना पर भरोसा करें तो वहां कम बारिश से फिलहाल फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

जिलों की जुबानी नुकसान की कहानी
बांदा ने कम बारिश से 42 से 43 फीसदी फसलों के नुकसान की बात कही है तो मथुरा ने बताया है कि  सूखे से स्थिति खराब है। ललितपुर का कहना है कि फसल का बहुत नुकसान हुआ है।

इलाहाबाद ने 15-20 फीसदी नुकसान बताया है। आगरा से बताया गया है कि सूखे की स्थिति बन रही है। गोरखपुर ने 30, कुशीनगर ने 15 से 20, जालौन ने 20 व महराजगंज ने 17 प्रतिशत फसलों के नुकसान की बात कही है। उन्नाव ने भी नुकसान की बात कही है पर कितना हुआ है, यह बात में बताएंगे।

गंभीर संकट का सामना करने वाले जिले

Drought in Uttar Pradesh.

प्रदेश में 30 प्रतिशत से कम बारिश वाले जिले हैं- अंबेडकरनगर-13.2%, फतेहपुर- 13.5%, कौशांबी-17.3%, कानपुर देहात-21.9%, कुशीनगर-25.5% और रायबरेली-28%।

30 से 40 प्रतिशत के बीच बारिश वाले जिले

महोबा- 32.7%, अमेठी-33%, पीलीभीत-33.6%, औरैया-35.2%, आगरा-35.6%, महराजगंज-36.1%, मैनपुरी-37.3%, देवरिया-37.6%, लखनऊ-39.1% और कानपुर नगर-39.1%।

40 से 50 फीसदी के बीच बरसात

चित्रकूट- 40.1, ललितपुर-40.3, हमीरपुर-40.9, रामपुर-41.5, उन्नाव-41.8, मऊ-41.9, फर्रुखाबाद-43.0, गाजियाबाद-45.9, इलाहाबाद-46.6, एटा-47.5, हाथरस-47.5, गोरखपुर-47.6, जालौन-48.1, झांसी-48.8 और संतकबीरनगर-49.3

सूखा राहत के उठाए जाते हैं ये कदम

Drought in Uttar Pradesh.

- सामान्य से 50 प्रतिशत से कम बारिश पर जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए।
- न्यूनतम 33 फीसदी नुकसान पर सिंचित क्षेत्र में 18000 रुपये प्रति हेक्टेयर व असिंचित क्षेत्र में 9000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलनी चाहिए।

- सभी प्रकार की वसूली बंद कर दी जाती है। बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के समय से ही वसूली स्थगित है। यह व्यवस्था इस महीने खत्म हो रही है।

- किसानों का किसी तरह का उत्पीड़न नहीं किया जाता। यह कदम बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि के समय से ही प्रभावी है।
- कृषि विभाग किसानों को डीजल में सब्सिडी दे सकता है मगर, सूबे का कृषि महकमा इससे अब तक बचता रहा है।

- कृषि बीमा योजनाओं के अंतर्गत किसानों को तत्काल 25 प्रतिशत की सहायता देनी चाहिए।

- वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराने चाहिए।

मामले पर मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना हैं‘जिलाधिकारियों से अब तक हुई बरसात और उससे फसलों के नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। जिलों में नुकसान का आकलन हो रहा है। 50 फीसदी से अधिक नुकसान पर सूखा घोषित किया जाता है। फिलहाल ऐसी सूचना नहीं है। सरकार हर स्थिति पर नजर रखे हुए है। मानक के हिसाब से कहीं भी नुकसान सामने आएगा तो सूखा राहत की कार्रवाई शुरू करवा दी जाएगी।’

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