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डीआरडीओ की 2-डीजी औषधि नई कोशिकाओं कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने में कारगर
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लखनऊ। डीआरडीओ की कोविड रोधी औषधि 2-डीजी में शरीर में वायरल संक्रमण का गुणन कम करने की क्षमता है। इस औषधि से वायरस आसपास की अन्य कोशिकाओं को फिर से संक्रमित करने की क्षमता भी खो देता है। इसका मतलब है कि वायरस नई कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता है। यह जानकारी डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनंत नारायण भट्ट ने दी। वह मंगलवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर एनबीआरआई और आईआईटीआर, लखनऊ द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. भट्ट उस टीम के मुख्य सदस्य है, जिसने कोरोना के विरुद्ध कारगर स्वदेशी दवा ‘2-डीजी’ को हाल ही में विकसित किया है। उन्होंने बताया कि वायरस जनित बीमारी की तीन प्रमुख अवस्थाएं होती हैं। वायरस का गुणन, उच्च प्रतिरोधक प्रतिक्रिया और श्वसन तंत्र का नष्ट होना। 2डीजी दवा इनमें से पहली दो अवस्थाओं के दौरान ही वायरस पर प्रभाव डाल कर उसे बेअसर करने में कारगर है। यह दवा वायरस के गुणन के द्वारा नए वायरस के जन्म के समय उनके प्रोटीन आवरण की संरचना को प्रभावित करती है। इससे नए उत्पन्न वायरस आसपास की नई कोशिकाओं को संक्रमित करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस दवा को मनुष्यों पर आगे परीक्षण के लिए ड्रग जनरल कंट्रोल ऑफ इंडिया से क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी मिल चुकी हैं। इस औषधि में कैंसर रोधी गुण होने के कारण भविष्य में कैंसर के उपचार में भी इसका उपयोग संभव है। प्रो. एसके बारिक ने कहा कि देश के विभिन्न वैज्ञानिक संगठन कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए विभिन्न स्तरों पर साझा प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन को इस औषधि के लिए बधाई दी और कहा कि यह औषधि देश को महामारी से निकालने में कारगर सिद्ध होगी। अंत में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पीए शिर्के ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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डॉ. भट्ट उस टीम के मुख्य सदस्य है, जिसने कोरोना के विरुद्ध कारगर स्वदेशी दवा ‘2-डीजी’ को हाल ही में विकसित किया है। उन्होंने बताया कि वायरस जनित बीमारी की तीन प्रमुख अवस्थाएं होती हैं। वायरस का गुणन, उच्च प्रतिरोधक प्रतिक्रिया और श्वसन तंत्र का नष्ट होना। 2डीजी दवा इनमें से पहली दो अवस्थाओं के दौरान ही वायरस पर प्रभाव डाल कर उसे बेअसर करने में कारगर है। यह दवा वायरस के गुणन के द्वारा नए वायरस के जन्म के समय उनके प्रोटीन आवरण की संरचना को प्रभावित करती है। इससे नए उत्पन्न वायरस आसपास की नई कोशिकाओं को संक्रमित करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस दवा को मनुष्यों पर आगे परीक्षण के लिए ड्रग जनरल कंट्रोल ऑफ इंडिया से क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी मिल चुकी हैं। इस औषधि में कैंसर रोधी गुण होने के कारण भविष्य में कैंसर के उपचार में भी इसका उपयोग संभव है। प्रो. एसके बारिक ने कहा कि देश के विभिन्न वैज्ञानिक संगठन कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए विभिन्न स्तरों पर साझा प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन को इस औषधि के लिए बधाई दी और कहा कि यह औषधि देश को महामारी से निकालने में कारगर सिद्ध होगी। अंत में मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पीए शिर्के ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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