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लाइसेंसी असलहे-कारतूसों की जांच में मिली गड़बड़ियां, चार के असलहे जब्त, केस दर्ज

Sat, 28 Sep 2019 01:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 01:21 AM IST
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Draw back in the testing of liecensed weapon
लाइसेंसी असलहे-कारतूसों की जांच में गड़बड़ियां, चार के असलहे जब्त, केस दर्ज
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राजधानी में लाइसेंसी असलहे और कारतूसों की सत्यापन प्रक्रिया के पहले ही दिन भारी गड़बड़ियां सामने आईं।
गोमतीनगर, पारा, आलमबाग और गोसाईंगंज थानाक्षेत्र के चार लाइसेंसी शस्त्रधारक खरीदे कारतूसों के इस्तेमाल का ब्योरा नहीं दे सके।
इस पर एसएसपी कलानिधि नैथानी ने इनके लाइसेंसी असलहे जब्त कर शस्त्र अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
उन्होंने सभी थाना प्रभारियों से अपने क्षेत्र के लाइसेंसी शस्त्रधारकों को कारतूसों का रिकॉर्ड लेकर बुलवाकर सत्यापन के निर्देश दिए हैं।
एसएसपी ने बताया कि लाइसेंसी असलहों के दुरुपयोग के कारण इनका सत्यापन करवाया जा रहा है।
दोपहर को वह खुद गोमतीनगर थाने पहुंचे और .30 बोर के लाइसेंसी शस्त्रधारकों को बुलवाकर इनके असलहों और कारतूसों की जांच की।
इस दौरान खरगापुर के कौशलपुरी निवासी प्रापर्टी डीलर कमलेश यादव से उनकी .32 बोर की पिस्टल के लाइसेंस पर खरीदे कारतूसों के बारे में पूछा गया तो वह जवाब नहीं दे सके।
उनका शस्त्र लाइसेंस वर्ष 2006 में जारी हुआ था। इसकी जांच में पता चला कि उन्होंने अब तक 225 कारतूस खरीदे थे।
ब्योरा मांगने पर वह सिर्फ 46 कारतूस और सात खोखे दिखा सके। एसएसपी ने बताया कि उनकी पिस्टल जब्त कर उपनिरीक्षक राजीव सिंह चौहान की ओर से केस दर्ज कराया गया है।
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वहीं, पारा थानाक्षेत्र के मानकनगर स्थित दौदाखेड़ा निवासी व के संस मैरिज लॉन संचालक राहुल सिंह पर भी शस्त्र अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
उनके पास .30 बोर की पिस्टल थी, जिसका लाइसेंस सितंबर 2012 को जारी हुआ था। उनके शस्त्र लाइसेंस में 75 कारतूस खरीदने की बात दर्ज है।
सत्यापन में उनके पास 25 कारतूस व 10 खोखे मिले। बाकी के 40 कारतूस के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
उन्होंने बताया कि सफीपुर के जमालनगर गांव में 35 बीघा खेती है, जिसमें जंगली जानवर भगाने को फायरिंग करते थे।
उन्होंने किसी दूसरे को कारतूस देने या इनका दूसरा इस्तेमाल करने से इनकार किया। इंस्पेक्टर त्रिलोकी सिंह ने उनकी पिस्टल जब्त कर केस दर्ज कराया है।
तीसरा मामला आलमबाग के कैलाशपुरी निवासी कैटरिंग कारोबारी प्रदीप कुमार गुप्ता का है। उनके पास .32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल थी।
उन्होंने 90 कारतूस खरीदे, जिसमें से 10 ही मौजूद हैं। बाकी कारतूसों का हिसाब वह नहीं दे सके।
इसके अलावा गोसाईंगंज में पीडब्ल्यूडी के वर्क एजेंट के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महिपालखेड़ा के सरसवा निवासी वेद प्रकाश यादव के पास .32 बोर की पिस्टल है।
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उन्होंने कुल 50 कारतूस खरीदे, जिसमें से मात्र 20 कारतूस व सात खोखे दिखा पाए। एसएसपी ने बताया कि उपरोक्त शस्त्रधारकों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए डीएम को रिपोर्ट दी जाएगी।

लाइसेंस पर चढ़ी थी पिस्टल, मिला रिवॉल्वर
एसएसपी ने बताया कि कई ऐसे लोग भी मिले जिनके लाइसेंस पर पिस्टल चढ़ी थी, लेकिन उनके पास रिवॉल्वर था। इन्हें लाइसेंस ठीक कराने की चेतावनी दी है। बताया कि ऐसे लोगों ने जब शस्त्र लाइसेंस बनवाया होगा तो पिस्टल खरीदकर उसे लाइसेंस पर चढ़वा लिया होगा। बाद में पिस्टल बेचकर रिवॉल्वर ले लिया होगा, लेकिन उसे लाइसेंस पर नहीं चढ़वाया होगा।
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