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कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. वीके पॉल ने कहा, कोविड के लिए अगले 100 दिन संवेदनशील, हर स्तर पर अपनानी होगी सावधानी
Mon, 11 Oct 2021 09:43 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 11 Oct 2021 09:43 PM IST
सार
नीति आयोग के सदस्य व कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष डा. वीके पॉल ने कहा कि इस वक्त में कोविड संक्रमण नियंत्रित रहा तो भविष्य सुनहरा होगा। इससे पूरी तरह से निपटा जा सकेगा। क्योंकि अभी भी वायरस हमारे बीच मौजूद है।
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लोकभवन में आयोजित आयुष्मान कार्ड वितरण समारोह में मौजूद सीएम योगी, सुरेश खन्ना और डॉ. पॉल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नीति आयोग के सदस्य व कोविड टास्क फोर्स के अध्यक्ष डाॅ. वीके पॉल ने कहा कि कोविड 19 के लिहाज से अगले 100 दिन बेहद संवेदनशील हैं। इस वक्त में कोविड संक्रमण नियंत्रित रहा तो भविष्य सुनहरा होगा। इससे पूरी तरह से निपटा जा सकेगा। क्योंकि अभी भी वायरस हमारे बीच मौजूद है। वह सोमवार को लोक भवन में आयुष्मान कार्ड वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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डाॅ. पॉल ने उत्तर प्रदेश के ट्रिपल टी (ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट) मॉडल की तारीफ की। कहा कि इस रणनीति को अगले 100 दिन तक गंभीरता से बनाए रखना होगा। क्योंकि आगे त्योहार का सीजन है। भीड़ में संक्रमण की गति कई गुना बढ़ जाती है। उत्सव मनाते समय बेहद सावधान रहना होगा। आगामी 100 दिन में टीकाकरण भी हो जाएगा। जिन्हें पहली डोज लगी है, उन्हें दूसरी लग जाएगी और जिन्हें नहीं लगी है उन्हें कम से कम एक डोज लग जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वैज्ञानिक तरीकेसे महामारी रोकने में सफलता पाई है।
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चिकित्सा विशेषज्ञों के फार्मूले के तहत ही यहां जांच का दायरा बढाया गया और होम केयर सुविधाएं दी गईं। रैपिड रिस्पांस टीमें बनाई गई। पहली और दूसरी लहर से ली गई सबक ने तीसरी लहर को रोकने में कामयाबी दिलाई है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने तीसरी लहर की आशंका जाहिर की। ऐसें सभी राज्यों में हर स्तर पर निगरानी बढ़ी। संसाधन बढाए गए। ऐसे में तीसरी लहर टलती नजर आ रही है। उन्होंने प्रदेश में चिकित्सा सुवधिाओं के विस्तार और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर प्रसन्नता जताई। कहा कि इससे भविष्य में प्रदेश का स्वास्थ्य क्षेत्र मजबूत दिखेगा।
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आठ फीसदी करना होगा स्वास्थ्य बजट
नीति आयोग के सदस्य डॉ. पॉल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट बढ़ाने की जरूरत है। अभी यह पांच फीसदी है, जिसे आठ फीसदी करना होगा। इस दिशा में राज्य सरकार को भूमिका निभानी होगी। आठ फीसदी बजट करके प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर तरीके से दे सकते हैं।