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Lucknow News: प्रतिबंधित संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े दुष्कर्म व धर्मांतरण के आरोपी डाॅ. रमीज के तार

Thu, 08 Jan 2026 01:35 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 01:35 AM IST
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Dr. Rameez, accused of rape and conversion, is linked to the banned Islamic Research Foundation.
डाॅ. रमीज के पीलीभीत ​स्थित घर पर कुर्की का नोटिस चिपकाता पुलिसकर्मी। 
लखनऊ। केजीएमयू में महिला रेजिडेंट के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोपी डॉक्टर रमीज के कनेक्शन प्रतिबंधित संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) से मिले हैं। इस संस्था का संचालक डॉ. जाकिर नाइक विदेश में कहीं छिपा है। यह संस्था धर्मांतरण कराती थी, जिसके कारण उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।
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डॉ. नाइक सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को धर्मांतरण के लिए उकसाता है। महाराष्ट्र में नाइक ने बड़ी संख्या में धर्मांतरण कराए थे। इसके लिए लोगों को मोटी रकम भी दी गई थी। माना जा रहा है कि डॉ. नाइक के करीबी आरोपी डॉक्टर को शरण दे रहे हैं। डॉ. नाइक विवादित बयानों के लिए भी जाना जाता है। सूत्रों का कहना है कि इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ने करीब 800 लोगों का धर्मांतरण कराया था। मुंबई पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया था। डॉ. नाइक का नाम सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। डॉ. रमीज के कनेक्शन की छानबीन की जा रही है। डॉ. नाइक भारत में वांटेड है, उसपर विदेशी फंडिंग और अवैध गतिविधियों के भी आरोप हैं।
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एक ही मकसद, कट्टरपंथ को बढ़ावा

छानबीन में सामने आया है कि डॉ. रमीज कट्टरपंथ को बढ़ावा देना चाहता था। वह छांगुर के साथ-साथ डॉ. नाइक से भी प्रभावित था। आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटाॅप मिलने के बाद पुलिस उसके सोशल मीडिया कनेक्शन की छानबीन करेगी। आईआरएफ पर काले धन को सफेद करने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। संस्था का मकसद युवाओं के बीच चरमपंथी और कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देना था। यही वजह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता को बनाए रखने के लिए संस्था पर प्रतिबंध लगाया गया था।
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डॉ. रमीज के घर पर चस्पा हुआ कुर्की का नोटिस

पीलीभीत/न्यूरिया। लखनऊ पुलिस की एक टीम ने न्यूरिया कस्बे पहुंचकर आरोपी चिकित्सक रमीज मलिक के पैतृक घर के बाहर कुर्की का नोटिस चस्पा किया। इससे पहले पुलिस ने प्रकरण में जुड़े काजी और निकाह के गवाह के शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला फीलखाना में स्थित घरों पर छापा मारकर अहम जानकारियां भी जुटाईं।


डॉ. रमीज का जिले के न्यूरिया हुसैनपुर कस्बे में मूल निवास है, हालांकि उसके परिजन लंबे समय से उत्तराखंड के खटीमा में रह रहे हैं। पूर्व में लखनऊ पुलिस ने न्यूरिया पहुंचकर जांच की थी। इस दौरान एक रिश्तेदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। इसमें घर को दान में दिए जाने की बात भी सामने आई थी। इसके साथ ही जांच में निकाह करने वाले काजी जाहिद हसन और उसमें गवाह बने युवक शारिक के भी शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला फीलखाना के होने की बात सामने आई थी। इस पर लखनऊ पुलिस की टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से बुधवार को काजी और गवाह के घर भी छापा मारकर जानकारी जुटाई थी। यह भी सामने आया कि आरोपी डॉक्टर और महिला के पीलीभीत आए बिना ही कूटरचित तरीके से निकाह के कागजात तैयार कराए गए थे। करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई के बाद पुलिस टीम वापस लौट गई। एसपी (डीआईजी) अभिषेक यादव ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़े मामले में लखनऊ पुलिस सदर कोतवाली और थाना न्यूरिया क्षेत्रों में जांच कर रही है। लखनऊ पुलिस जो भी सहयोग मांग रही है, उसे उपलब्ध कराया जा रहा है।
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