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प्रदेश में न्यूरो सर्जरी की शुरुआत करने वाले डॉ. छाबड़ा नहीं रहे, जिस इलाज के लिए मशहूर, उससे हुई मौत
Wed, 01 Jul 2020 11:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 01 Jul 2020 11:07 AM IST
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dr. dk chhabra (file photo)
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में न्यूरो सर्जरी की शुरुआत करने वाले विख्यात न्यूरो सर्जन डॉ. डीके छाबड़ा (80) का मंगलवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वे कई दिनों से पीजीआई की क्रिटिकल केयर मेडिसिन में भर्ती थे। सिर के ट्यूमर का ऑपरेशन कर लोगों को नई जिंदगी देने वाले डॉ. छाबड़ा खुद ट्यूमर की चपेट में आ गए।
जिस बीमारी के इलाज के लिए मशहूर, उसी से हुई मौत
प्रदेश में न्यूरो सर्जरी की शुरुआत करने वाले विख्यात न्यूरो सर्जन डॉ. डीके छाबड़ा (80) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह कई दिनों से पीजीआई की क्रिटिकल केयर मेडिसिन में भर्ती थे।
सिर के हर प्रकार के ट्यूमर का ऑपरेशन कर बहुत से लोगों को नया जीवन देने वाले डॉ. छाबड़ा जिंदगी के अंतिम पड़ाव में खुद ट्यूमर की चपेट में आ गए। उनके निधन से चिकित्सकों में शोक की लहर दौड़ गई। भैंसाकुंड घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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केजीएमयू से एमबीबीएस और एमएस करने के बाद डॉ. छाबड़ा 1974 से 1986 तक न्यूरो सर्जन के रूप में काम करते रहे। इसके बाद पीजीआई चले गए, जहां 2003 तक रहे। उन्होंने यहां न्यूरो सर्जरी विभाग की स्थापना की। वह संस्थान के कार्यवाहक निदेशक की भी जिम्मेदारी निभाते रहे हैं।
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जिस बीमारी के इलाज के लिए मशहूर, उसी से हुई मौत
प्रदेश में न्यूरो सर्जरी की शुरुआत करने वाले विख्यात न्यूरो सर्जन डॉ. डीके छाबड़ा (80) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वह कई दिनों से पीजीआई की क्रिटिकल केयर मेडिसिन में भर्ती थे।
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सिर के हर प्रकार के ट्यूमर का ऑपरेशन कर बहुत से लोगों को नया जीवन देने वाले डॉ. छाबड़ा जिंदगी के अंतिम पड़ाव में खुद ट्यूमर की चपेट में आ गए। उनके निधन से चिकित्सकों में शोक की लहर दौड़ गई। भैंसाकुंड घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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केजीएमयू से एमबीबीएस और एमएस करने के बाद डॉ. छाबड़ा 1974 से 1986 तक न्यूरो सर्जन के रूप में काम करते रहे। इसके बाद पीजीआई चले गए, जहां 2003 तक रहे। उन्होंने यहां न्यूरो सर्जरी विभाग की स्थापना की। वह संस्थान के कार्यवाहक निदेशक की भी जिम्मेदारी निभाते रहे हैं।
यहां से सेवानिवृत्त होने के बाद विवेकानंद पॉलीक्लीनिक में सेवाएं देते रहे। डॉ. छाबड़ा ने एक अन्य डॉक्टर के साथ मिलकर दिमाग में भरने वाले पस व पानी को निकालने की तकनीक विकसित की। इसे छाबड़ा वेंट्रिकुलो पेरिटोनियल शंट कहा जाता है।
इसका उपयोग 28 देशों के डॉक्टर कर रहे हैं। डॉ. छाबड़ा के 300 से अधिक शोध पत्र व किताबें प्रकाशित हुई हैं। उनकी पत्नी डॉ. अपजित कौर केजीएमयू नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष हैं।
शोक जताने वालों का लगा रहा तांता
डॉ. छाबड़ा के निधन की जानकारी मिलते ही तमाम चिकित्सक भैंसाकुंड पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान, केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट, आईएमए अध्यक्ष डॉ. रमा श्रीवास्तव, सचिव डॉ. जेडी रावत, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉॅ. पीके गुप्ता, डॉ. आशीष वाखलू, डॉ. अनुपम वाखलू ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। विवेकानंद पॉलीक्लीनिक में शोक सभा में स्वामी मुक्तिनाथानंद सहित अन्य चिकित्सकों ने श्रद्धांजलि दी।
इसका उपयोग 28 देशों के डॉक्टर कर रहे हैं। डॉ. छाबड़ा के 300 से अधिक शोध पत्र व किताबें प्रकाशित हुई हैं। उनकी पत्नी डॉ. अपजित कौर केजीएमयू नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष हैं।
शोक जताने वालों का लगा रहा तांता
डॉ. छाबड़ा के निधन की जानकारी मिलते ही तमाम चिकित्सक भैंसाकुंड पहुंचे और श्रद्धांजलि दी। पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान, केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट, आईएमए अध्यक्ष डॉ. रमा श्रीवास्तव, सचिव डॉ. जेडी रावत, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉॅ. पीके गुप्ता, डॉ. आशीष वाखलू, डॉ. अनुपम वाखलू ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। विवेकानंद पॉलीक्लीनिक में शोक सभा में स्वामी मुक्तिनाथानंद सहित अन्य चिकित्सकों ने श्रद्धांजलि दी।