{"_id":"5f858a9e8ebc3e9bec4822b2","slug":"documents-varification-of-teachers-stopped-in-uttar-pradesh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शुल्क के अभाव में अटकी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच, विभाग ने शासन से मांगा मार्गदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शुल्क के अभाव में अटकी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच, विभाग ने शासन से मांगा मार्गदर्शन
Tue, 13 Oct 2020 04:38 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 13 Oct 2020 04:38 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन शुल्क के अभाव में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों की जांच अटक गई है। तीनों विभागों ने सत्यापन शुल्क को लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा है। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करने का दावा किया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हो रही है। सभी जिलों से शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच के लिए गठित कमेटी शिक्षकों के दस्तावेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों में सत्यापन के लिए भेज रही है।
शिक्षकों की संख्या लाखों में होने से प्रदेश और प्रदेश के बाहर के विवि में सत्यापन कार्य का भार बढ़ गया है। इसे देखते हुए विवि ने अब सत्यापन शुल्क की मांग शुरू की है। विवि प्रति दस्तावेज के सत्यापन के लिए सौ से दो सौ रुपये तक शुल्क मांग रहे हैं। शुल्क के अभाव में विश्वविद्यालयों ने सत्यापन कार्य बंद कर दिया है। इससे जांच का काम ठप हो गया है। वहीं, एक बीएसए ने बताया कि शिक्षकों के दस्तावेजों को सत्यापन के लिए संबंधित बोर्ड और विवि भेजने के लिए डाक टिकट पर बड़ा खर्च हो रहा है। लेकिन डाक टिकट के लिए बजट नहीं मिलने से परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हो रही है। सभी जिलों से शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच के लिए गठित कमेटी शिक्षकों के दस्तावेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों में सत्यापन के लिए भेज रही है।
विज्ञापन
शिक्षकों की संख्या लाखों में होने से प्रदेश और प्रदेश के बाहर के विवि में सत्यापन कार्य का भार बढ़ गया है। इसे देखते हुए विवि ने अब सत्यापन शुल्क की मांग शुरू की है। विवि प्रति दस्तावेज के सत्यापन के लिए सौ से दो सौ रुपये तक शुल्क मांग रहे हैं। शुल्क के अभाव में विश्वविद्यालयों ने सत्यापन कार्य बंद कर दिया है। इससे जांच का काम ठप हो गया है। वहीं, एक बीएसए ने बताया कि शिक्षकों के दस्तावेजों को सत्यापन के लिए संबंधित बोर्ड और विवि भेजने के लिए डाक टिकट पर बड़ा खर्च हो रहा है। लेकिन डाक टिकट के लिए बजट नहीं मिलने से परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
आकस्मिक निधि से सत्यापन शुल्क और डाक खर्च व्यय करने की अनुमति दे दी
अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार का कहना है कि हमने सभी बीएसए को जिला कार्यक्रम आकस्मिक निधि से सत्यापन शुल्क और डाक खर्च व्यय करने की अनुमति दे दी है। अब कोई समस्या नहीं होगी।