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Lucknow News: आईआईटी के सहयोग से डॉक्टर विकसित करेंगे उपकरण
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लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान के डॉक्टर अब आईआईटी कानपुर और लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के सहयोग से तकनीक का इस्तेमाल सीखेंगे। इसके लिए दो दिवसीय हैकाथॉन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका मकसद डॉक्टरों को चिकित्सीय उपकरण विकसित करने में सक्षम बनाना है।
संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक, बाकी क्षेत्रों की तरह चिकित्सा में भी तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सीय उपकरण विकसित करने के लिए चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी के साथ ही इंजीनियरिंग समझ बेहद जरूरी है। इसको देखते हुए आईआईटी कानपुर और आईईटी लखनऊ के साथ करार किया गया है। इस करार के तहत पहली बार 31 जनवरी से एक फरवरी के बीच संस्थान में हैकाथॉन प्रतियोगिता होने जा रही है। प्रतियोगिता के दौरान आईआईटी कानपुर और आईईटी के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। इसमें डॉक्टर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। उनको विशेषज्ञ टिप्स भी देंगे।
आईआईटी और केजीएमयू ने विकसित किए हैं कई उपकरण
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय और आईआईटी कानपुर की साझा फेलोशिप- बायोडिजाइन-सिनर्जाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप फेलोशिप प्रोग्राम (एसआईबी-शाइन) के माध्यम से कई उपकरण विकसित किए जा चुके हैं। केजीएमयू और आईआईटी में तैयार मॉडल को 92 लाख रुपये की वित्तीय मदद भी मिल चुकी है। एमओयू के तहत कई उपकरण विकसित हो चुके हैं, जबकि कुछ का ट्रायल चल रहा है।
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संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक, बाकी क्षेत्रों की तरह चिकित्सा में भी तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सीय उपकरण विकसित करने के लिए चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी के साथ ही इंजीनियरिंग समझ बेहद जरूरी है। इसको देखते हुए आईआईटी कानपुर और आईईटी लखनऊ के साथ करार किया गया है। इस करार के तहत पहली बार 31 जनवरी से एक फरवरी के बीच संस्थान में हैकाथॉन प्रतियोगिता होने जा रही है। प्रतियोगिता के दौरान आईआईटी कानपुर और आईईटी के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। इसमें डॉक्टर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। उनको विशेषज्ञ टिप्स भी देंगे।
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आईआईटी और केजीएमयू ने विकसित किए हैं कई उपकरण
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय और आईआईटी कानपुर की साझा फेलोशिप- बायोडिजाइन-सिनर्जाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप फेलोशिप प्रोग्राम (एसआईबी-शाइन) के माध्यम से कई उपकरण विकसित किए जा चुके हैं। केजीएमयू और आईआईटी में तैयार मॉडल को 92 लाख रुपये की वित्तीय मदद भी मिल चुकी है। एमओयू के तहत कई उपकरण विकसित हो चुके हैं, जबकि कुछ का ट्रायल चल रहा है।
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