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टूटे जबड़े को किया दुरुस्त
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युवती के टूटे जबड़े को किया दुरुस्त
बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने दो सर्जरी कर चेहरे को विकृत होने से बचाया
बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सकों ने सर्जरी के जरिए एक युवती के चेहरे को विकृत होने से बचा लिया। मरीज के पास आयुष्मान कार्ड था, इसलिए इलाज मुफ्त किया गया है। अब मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
सीतापुर के सकरन गधियाना निवासी कुंती (18) पुत्री सुरेंद्र सड़क हादसे में घायल हो गई थी। उसका जबड़ा टूट गया था और चेहरा विकृत हो गया था। बलरामपुर अस्पताल के दंत विभाग में डॉ. एसके तिवारी ने उसका उपचार शुरू किया। निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि यह ऑपरेशन निजी अस्पतालों में करीब 30 से 35 हजार रुपये में होता है। उन्होंन ऑपरेशन करने वाली टीम के डॉ. एसके तिवारी, डॉ. अजय, डॉ. गुलाम खान, डॉ. हर्ष, डॉ. स्नेहा आदि की तारीफ करते हुए कहा कि टीम भावना की वजह से यह ऑपरेशन सफल हो सका है।
ऐसे किया ऑपरेशन
डॉ. एसके तिवारी ने बताया कि मरीज का इंटर मैक्सीलरी फिब्रसेशन किया गया। इसमें जबड़े में दो एमएम की टाइटेनियम कोटेड मिनी प्लेट लगाई गई। इसके लिए चार होल गैप के दो और 12 एमएम के आठ स्क्रू लगाए गए। फिर निचले जबड़े की सर्जरी की गई और प्लेट लगाई गई। इस तरह दो बार की सर्जरी में जबड़ा तैयार हो गया और मरीज के चेहरे की विकृति खत्म हो गई।
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बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने दो सर्जरी कर चेहरे को विकृत होने से बचाया
बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सकों ने सर्जरी के जरिए एक युवती के चेहरे को विकृत होने से बचा लिया। मरीज के पास आयुष्मान कार्ड था, इसलिए इलाज मुफ्त किया गया है। अब मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
सीतापुर के सकरन गधियाना निवासी कुंती (18) पुत्री सुरेंद्र सड़क हादसे में घायल हो गई थी। उसका जबड़ा टूट गया था और चेहरा विकृत हो गया था। बलरामपुर अस्पताल के दंत विभाग में डॉ. एसके तिवारी ने उसका उपचार शुरू किया। निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि यह ऑपरेशन निजी अस्पतालों में करीब 30 से 35 हजार रुपये में होता है। उन्होंन ऑपरेशन करने वाली टीम के डॉ. एसके तिवारी, डॉ. अजय, डॉ. गुलाम खान, डॉ. हर्ष, डॉ. स्नेहा आदि की तारीफ करते हुए कहा कि टीम भावना की वजह से यह ऑपरेशन सफल हो सका है।
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ऐसे किया ऑपरेशन
डॉ. एसके तिवारी ने बताया कि मरीज का इंटर मैक्सीलरी फिब्रसेशन किया गया। इसमें जबड़े में दो एमएम की टाइटेनियम कोटेड मिनी प्लेट लगाई गई। इसके लिए चार होल गैप के दो और 12 एमएम के आठ स्क्रू लगाए गए। फिर निचले जबड़े की सर्जरी की गई और प्लेट लगाई गई। इस तरह दो बार की सर्जरी में जबड़ा तैयार हो गया और मरीज के चेहरे की विकृति खत्म हो गई।
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