मासूम की जांघ से घुसा सरिया पेट फाड़कर पीठ से निकला, मुश्किल से बची जान
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लखनऊ के मड़ियांव में सीतापुर रोड के पास बीते नौ अप्रैल को तीसरी मंजिल से गिरे जिस मासूम के जंघे से होते हुए पेट में सरिया घुसा था, ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। उसे सोमवार को छुट्टी भी दे दी गई।
मड़ियांव में सीतापुर रोड के पास किराए पर रह रहे टेंपो चालक के तीन साल के बेटे के दाहिने जंघे में 10 मिलीमीटर का सरिया घुसा था। सरिया पेट फाड़ते हुए पीठ के ऊपरी हिस्से में निकल गया था। बच्चे को देखते ही ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप तिवारी, डॉ. समीर मिश्रा, डॉ. यादवेंद्र व डॉ. अनीता के साथ उसे ओटी ले गए।
पैर के साथ पेट और सीने को खोलकर सरिया को निकाला गया। डॉ. यादवेंद्र ने बताया कि सरिया पैर से होते हुए पेट और पीठ के ऊपरी हिस्से में निकला था। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि सरिया लिवर से दो सेंटीमीटर दूर थी। लेकिन डॉयफ्राम फट गया था और छोटी आंत में छेद हो गया था। इसी तरह से सीना खोलकर देखा गया तो सरिया पेट के बाद तीरछी होकर पीट में निकलने की वजह से दिल बच गया था।
बिजलीकर्मी की दिलेरी से समय पर अस्पताल पहुंच सका बच्चा
डॉ. समीर मिश्रा ने बताया कि जिस वक्त बच्चा गिरा, उस वक्त वहां संविदा बिजलीकर्मी पंकज परमार काम कर रहा था। परिवारीजन नहीं थे। बिजलीकर्मी ने कटर से सरिया काटा और बाइक से बालक को गोद में लेकर ट्रॉमा पहुंचा था। करीब घंटे भर बाद परिवारीजन भी पहुुंचे।
बिजलीकर्मी की बहादुरी से बच्चे की जान बची। सरिया निकालने में देर हुई होती या उसे काटने के बजाय बालक को खींच कर निकाला गया होता तो जान जा सकती थी। ट्रॉमा सर्जरी विभाग बिजली कर्मी को सम्मानित करेगा।
डॉक्टरों ने दी ये सलाह
प्रो. संदीप तिवारी ने बताया कि अभिभावक खुली छत पर बच्चों को खेलने न दें। खेलते वक्त अक्सर गेंद सड़क पर जाती है और बच्चा लेने जाता है, इससे भी दुर्घटना होती है। इसलिए बच्चों को खेलने के लिए पार्क में ले जाएं। सड़क पर वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करें। हेलमेट की क्लैंप बांध कर रखें। वाहनों के बीच दूरी बनाए रखें।