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बच्चा नीला पड़े तो हो जाएं सावधान, करीब 10 हजार में एक को होती है यह बीमारी

Sat, 01 Jun 2019 04:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 01 Jun 2019 04:40 PM IST
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doctors of lohia sansthan gave new life to new born baby in lucknow
इसी बच्चे को हुई सर्जरी - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ में लोहिया संस्थान के चिकित्सकों ने आपस में चिपकी सांस और आहार नली को अलग कर आठ दिन के एक नवजात को नई जिंदगी दी। उसकी हालत में सुधार है और वह दूध पी रहा है। करीब 10 हजार बच्चे में किसी एक बच्चे को यह बीमारी होती है।

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चिनहट निवासी रेखा ने फरवरी में बच्चे को जन्म दिया। दूध पीने के बाद बच्चे की सांसें फूल रही थीं। उसका पेट भी फूल जाता था। चिकित्सक ने तत्काल लोहिया संस्थान रेफर कर दिया। यहां आठ फरवरी को आए बच्चे की जांच कराई गई।
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एक्सरे, सीटी स्कैन के बाद पता चला कि बच्चे की सांस व भोजन नली आपस में जुड़ी हुई है। दूध का रिसाव सांस में नहीं हो रहा है। इस वजह से बच्चा नीला पड़ रहा है। इन दोनों नलियों के ऊपर से रक्त की बड़ी धमकी भी चिपकी थी।
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इस पर ऑपरेशन की योजना बनाई गई। गले के पास चीरा लगाकर दोनों नलिकाओं को अलग किया गया। करीब 90 मिनट के ऑपरेशन में किसी तरह का रक्तस्राव नहीं हुआ। ऑपरेशन के करीब आठ दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

इन सरकारी संस्थानों में हो रहा इलाज

doctors of lohia sansthan gave new life to new born baby in lucknow
डेमो
ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. श्रीकेश सिंह, डॉ. तनवीर रोशन, डॉ. केके यादव, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. शिल्पी मिश्रा, डॉ. रवि, डॉ. संदीप, सचिन, किरन व गौरव शामिल थे। चिकित्सकों की इस उपलब्धि पर निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी ने बधाई दी।

डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि इस बीमारी का इलाज सरकारी संस्थानों में एसजीपीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान में हो रहा है। बच्चे के जन्म के बाद उसे दूध पिलाते वक्त किसी तरह की दिक्कत हो तो तत्काल चिकित्सा संस्थानों में दिखाना चाहिए। इस मर्ज का असर होने पर बच्चे का शरीर नीला पड़ने लगता है और सांसें फूलने लगती हैं। वह तेजी से सांस खींचता है।
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