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जहर से दिल व गुर्दे दे चुके थे जवाब, लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने फिर से फूंक दी जान
Tue, 11 Feb 2020 03:31 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 11 Feb 2020 03:31 PM IST
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डॉ पीके दास व अन्य चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में लोहिया संस्थान के चिकित्सकों ने जहरीला पदार्थ खाने के बाद 60 फीसदी तक जवाब दे चुके दिल व अन्य अंगों में फिर से जान फूंक दी। लगातार 24 घंटे तक वेंटिलेटर पर रखने के बाद उसकी धड़कनें लौटाने में कामयाबी मिली। चिकित्सकों का दावा है कि ऐसे मामले में 10 फीसदी मरीजों की ही जान बच पाती है।
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कानपुर निवासी मरीज ने एल्युमिनियम फॉसफाइड की गोली खा ली थी। इसका इस्तेमाल गेहूं को कीड़े लगने से बचाने के लिए होता है। परिवारीजनों ने उसे कानपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से गंभीर अवस्था में उसे लोहिया संस्थान रेफर किया गया। यहां एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों ने उसे तत्काल वेंटिलेटर पर रखा।
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खूून को पतला करने वाली दवाएं दी गईं। एंटीबायोटिक्स व आर्गन फेल्योर रोकने वाली दवाओं के जरिए उसके अंगों को फिर से गतिशील किया गया। डॉ. पीके दास ने बताया कि मरीज का दिल करीब 60 फीसदी तक काम करना बंद कर दिया था। किडनी सहित अन्य अंग भी जवाब देने लगे थे।
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विभाग की टीम ने उसे बचाने के प्रयास शुरू किए। दूसरे दिन सुधार हुआ। एल्युमिनियम फॉसफाइड के जहर को बेअसर करने की कोई दवा बाजार में नहीं है। इसकी आधी गोली से ही जान जा सकती है। बचने की गुंजाइश पांच से 10 फीसदी ही रहती है। टीम में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. सूरज कुमार आदि भी शामिल थे।