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6 घंटे की सर्जरी के बाद जोड़ दिया कटा हुआ पैर

Fri, 30 Jan 2015 08:34 PM IST
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 30 Jan 2015 08:34 PM IST
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Doctors joined broken leg by special surgery.

केजीएमयू के डॉक्टरों ने पहली बार एक मासूम के कटे पैर को जोड़कर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। गोंडा के रकसड़िया गांव के दो साल का विनीत खेत की जुताई के दौरान ट्रैक्टर से गिर गया था। ट्रैक्टर में लगे हल से उसका बायां पैर कट कर घुटने से अलग हो गया था।

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घटना के करीब छह घंटे बाद परिवार के लोग बच्चे को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां डॉक्टरों की टीम ने छह घंटे की लंबी सर्जरी के बाद बच्चे के पैर को जोड़ने में सफलता तो पाई ही उसके परिवार के लिए धरती के भगवान साबित हुए। सर्जरी और इलाज के बाद अब बच्चा स्वस्थ है। हालांकि उसे पूरी तरह ठीक होने में नौ से दस महीने लगेंगे। उसे अपंगता का खतरा भी नहीं है।
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बालकराम 18 जनवरी को दोपहर करीब दो बजे ट्रैक्टर से खेत की जुताई करवा रहे थे। उनका दो साल का बेटा विनीत ट्रैक्टर पर ही बैठा था। जुताई के दौरान अचानक लगे झटके से विनीत नीचे गिर गया और ट्रैक्टर के हल में उसका बायां पैर फंस गया।
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अभी ड्राइवर संभल पाता, विनीत का पैर घुटने के पास से अलग हो गया। आनन-फानन में बालकराम बच्चे और उसके कटे पैर को लेकर निजी अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार देकर बच्चे को केजीएमयू रेफर कर दिया।

50 से ज्यादा टांकों से जोड़ा पैर

Doctors joined broken leg by special surgery.

केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. बृजेश मिश्रा बताते हैं कि बच्चे की उम्र बहुत कम होने कारण ये केस उनकी टीम के लिए बहुत चैलेंजिंग था। लेकिन अच्छी बात यह थी कि पैर में संक्रमण नहीं हुआ था।

इससे इलाज और री-ट्रांसप्लांट की गुंजाइश थी। सर्जरी के दौरान पैर के क्षत्रिग्रस्त हिस्से को अलग किया गया और कटी हुई नसों और धमनियों को फ्री मसल्स से जोड़ा गया, जिससे पूरे पैर में ब्लड की सप्लाई शुरू हो सके। सुबह पांच बजे तक यह ऑपरेशन चलता रहा। बच्चे को पचास से अधिक टांके और फिक्सेटर लगाए गए।

डॉ. बृजेश ने बताया कि फिक्सेटर छह हफ्ते बाद हटाया जाएगा। इसके बाद कुछ जरूरी जांच की जाएंगी और घुटने की मूवमेंट और उसकी वास्तविक स्थिति को जांचा जाएगा। उन्होंने बताया कि विनीत की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। उसे दो दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

डॉक्टर्स के लिए बहुत चैलेंजिंग था ऑपरेशन

Doctors joined broken leg by special surgery.

इस सर्जरी को करने वाली डॉक्टरों की टीम ने बताया कि बच्चों के सेल्स वयस्क के मुकाबले बहुत छोटी होती है। इसलिए इन्हें जोड़ना कठिन था। कटे हुए अंग पांच घंटे तक ही ठीक रहते हैं, लेकिन इस केस में छह घंटे से अधिक वक्त गुजर चुका था।

कटे पैर की नसों और धमनियों को तो नुकसान हुआ ही था। घुटने को भी बचाना जरूरी था। डॉ. बृजेश मिश्रा बताते हैं कि अमूमन शरीर से अलग हुआ अंग में पांच घंटे के भीतर ही संक्रमण हो जाता है, लेकिन ठंड होने के चलते विनीत के कटे हुए अंग और चोट की जगह पर कोई संक्रमण नहीं हुआ।

इसके अलावा दो साल के बच्चे के साहस ने भी डॉक्टरों की टीम को हौसला दिया। इन दोनों वजहों से डॉक्टरों की टीम ने घटना के करीब आठ घंटे बाद कटे अंग को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की और कामयाबी भी मिली। डॉ. बृजेश की मानें तो रात आठ से 11 बजे के बीच ट्रॉमा सेंटर में केस को लेकर जो तत्परता दिखाई गई, वह फायदेमंद रही।

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